रांची में किन्‍नर समाज करेगा महारुद्राभिषेक यज्ञ, कोरोना महामारी के खात्‍मे को की जाएगी प्रार्थना

 

Maha Rudrabhishek Yagya, Jharkhand Ranchi News धार्मिक अनुष्ठानों में किन्नर समाज की रुचि हमेशा से रही है।

 धार्मिक अनुष्ठानों में किन्नर समाज की रुचि हमेशा से रही है। भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को किन्नर समाज अपना आराध्य मानता है। इसी भावना के तहत किन्नर समाज की तरफ से रांची में महारुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है।

रांची, सं। अब तक आपने किन्नर समाज से जुड़ी एक से बढ़कर एक कहानियां सुनी होंगी। लेकिन क्या कभी आपने किन्नर समाज की ओर से आयोजित किया जाने वाला महारुद्राभिषेक देखा है। अगर आप इस अनोखी पूजा विधि को देखना चाहते हैं तो आपका रांची में स्वागत है। कुछ समय पहले ही देश में पहली बार किन्नर अखाड़ा स्थापित किया गया। अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में कुंभ के दौरान किन्नर समाज के साधु संत धर्म ध्वजा लेकर निकले थे। धार्मिक अनुष्ठानों में किन्नर समाज की रुचि हमेशा से रही है। भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप को किन्नर समाज अपना आराध्य मानता है।

इसी भावना के तहत किन्नर समाज की ओर से रांची में महारुद्राभिषेक यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। आगामी 21 अगस्त को यह महारुद्राभिषेक होने जा रहा है। तीसरा लिंग उत्थान समिति और महाकाल मंदिर उज्जैन की आचार्य अमरजीत ने बताया कि किस मंदिर में महारूद्रभिषेक किया जाना है, यह सावन की आखिरी सोमवार की शाम में तय होगा। इसके बाद कार्यक्रम के लिए समाज के लोग इकट्ठा होंगे। आयोजन से पहले ही यह कार्यक्रम लोगों की चर्चा और आकर्षण का विषय बन गया है। तृतीय लिंग समुदाय झारखंड के बैनर तले यह आयोजन किया जा रहा है।

कोरोना महामारी के खात्मे के आराध्य देव से होगी प्रार्थना

अमरजीत बताती है कि किन्नर समाज की तरफ से आयोजित किए जाने वाले इस महारुद्राभिषेक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनकल्याण है। इसके तहत भगवान शिव से देश और दुनिया से कोरोना महामारी के खात्मे के लिए प्रार्थना की जाएगी। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि किन्नर समाज की ओर से की गई प्रार्थनाएं स्वीकार की जाती हैं। घर में बच्चों के जन्म पर किन्नर समाज की ओर से गाना बजाना कर पुत्र-पुत्री के सकुशल होने की प्रार्थना की जाती है। लोगों का ऐसा विश्वास है कि किन्नर समाज का हाथ लगने के बाद नवजात सभी संकटों से हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाता है। यही कारण है कि परिवारों के द्वारा किन्नरों को आयोजन के बाद एक बड़ी राशि पुरस्कार के रूप में दी जाती है।