दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनाव में इस बार शिक्षकों के वेतन में देरी भी बना हुआ है बड़ा मुद्दा

 

डीएसजीएमसी पर काबिज पक्ष आर्थिक दिक्कतों को बता रहा वजह तो विपक्ष के मुताबिक भ्रष्टाचार जिम्मेदार।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के चुनाव में गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूलों (जीएसपीएस) में शिक्षकों के वेतन में देरी भी बड़ा मुद्दा है। विपक्षी दल जहां इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हमलावर हैं वहीं सत्तारूढ़ दल इसके पीछे आर्थिक दिक्कतों को वजह बता रहा है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीएसजीएमसी) के चुनाव में गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूलों (जीएसपीएस) में शिक्षकों के वेतन में देरी भी बड़ा मुद्दा है। विपक्षी दल जहां इस मामले में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए हमलावर हैं, वहीं, सत्तारूढ़ दल इसके पीछे आर्थिक दिक्कतों को वजह बता रहा है। चूंकि ये स्कूल सिख परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं और इनसे मतदाताओं का भावनात्मक लगाव भी है, ऐसे में यह मुद्दा बड़े स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।

डीएसजीएमसी द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में कई स्कूल, कालेज व इंजीनियरिंग कालेज संचालित किए जाते हैं। गुरु हरकिशन पब्लिक स्कूल की श्रृंखला का उसमें अहम स्थान है। कमेटी द्वारा इस श्रृंखला के 12 स्कूल संचालित होते हैं, जो दिल्ली के बच्चों को शिक्षित करने में उत्कृष्ट योगदान दे रहे हैं। इनके नाम तमाम उपलब्धियां हैं। इनमें हजारों छात्र पढ़ते हैं तो सैकड़ों की संख्या में टीचर और अन्य स्टाफ कार्यरत हैं।

इन्हें कोरोना काल से पहले से ही वेतन मिलने में दिक्कत हो रही है। इसके साथ ही डीएसजीएमसी चुनाव में इन स्कूलों में टीचरों की कमी और इनमें छठें वेतन आयोग की सिफारिशों का पूरी तरह से न लागू होना भी मुद्दा बन रहा है। वेतन की मांग को लेकर कोरोना काल से पहले भी कई बार शिक्षकों ने आंदोलन किया, धरना-प्रदर्शन किए। मामला अदालत के दरवाजे तक भी गया। अदालत ने डीएसजीएमसी को तत्काल वेतन भुगतान के आदेश दिए, लेकिन अब भी इस समस्या का हल नहीं निकल सका है।

कोरोना काल में तकरीबन डेढ़ वर्ष से यह संकट और बढ़ गया है। परमजीत सिंह सरना की अध्यक्षता वाला शिरोमणि अकाली दल दिल्ली (सरना) इसके लिए सीधे सत्तापक्ष के भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराता है। उसके मुताबिक न सिर्फ बड़े पैमाने पर स्कूल मद की राशि में हेरफेर हुआ है, बल्कि बिना जरूरत और योग्यता के चहेते लोगों की भर्ती भी हुई है। इसके चलते कभी दिल्ली की शिक्षा में स्वर्णिम कीर्तिमान बनाने वाले ये स्कूल आजकल गलत खबरों की वजह से चर्चा में हैं। वहीं, डीएसजीएमसी अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा के गुट का कहना है कि कोरोना के चलते वेतन भुगतान में देरी हुई है, क्योंकि छात्रों की फीस पूरी नहीं आ रही है।