जगराओं में मुंह-खुर बीमारी ने तोड़ी छोटे पशुपालकों की कमर, पूर्व विधायक कलेर बोले- पंजाब सरकार दे आर्थिक मदद


जगराओं के पूर्व विधायक एसआर कलेर की फाइल फोटो।
जगराओं पूर्व विधायक एसआर कलेर ने कहा कि पायल हलके के अंदर पशुओं की मुंह-खुर की भयानक महामारी ने किसानों के पशुधन का बेहद नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में पशु इस बीमारी की भेंट चढ़ गए हैं।

संवाद सहयोगी, जगराओं। पंजाब सरकार के कारण दो वक्त की रोटी कमा कर खाने वाले छोटे सहायक धंधे खत्म हो रहे हैं। गरीब आदमी को भुखमरी के रास्ते पर छोड़ दिया गया है। ये आरोप यहां शिरोमणि अकाली दल के हलका प्रभारी और पूर्व विधायक एसआर कलेर ने लगाए। उन्होंने कहा कि पायल हलके के अंदर पशुओं की मुंह-खुर की भयानक महामारी ने किसानों के पशुधन का बेहद नुकसान पहुंचाया है। बड़ी संख्या में पशु इस बीमारी की भेंट चढ़ गए हैं। सरकार और प्रशासन ने समय पर पशुपालन विभाग को महामारी से निपटने के निर्देश जारी नहीं किए। 

उन्होंने कहा कि पशुओं में फैली इस बिमारी के कारण इस समय हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। छोटी किसानी और मजदूर परिवारों के लोग अपने पशुधन का नुकसान सहने में असमर्थ हैं। मुंह खुर की बीमारी के कारण रोजाना मरने वाले पशुओं की गिनती लगातार बढ़ रही है और लोगों को लाखों रुपये का नुकसान सहन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से बर्बाद हुए लोग अपने पशुओं का दूध बेचकर गुजारा कर रहे हैं। पशु धन के सहारे अपने परिवार पालने वाले लोग इस समय बर्बादी की कगार पर खड़े हैं। उन्होंने इस बर्बादी का कारण मौजूदा पंजाब सरकार की गलत नीतियों को बताया।

पशुओं की मुंह-खुर बीमारी की रोकथाम के लिए कदम उठाए सरकार 

कलेर ने कहा कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और कांग्रेस प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू निजी लड़ाई को छोड़कर लोगों के मसलों और मुश्किलों के समाधान पर ध्यान दें। पंजाब सरकार पशुओं में फैल रही मुंह खुर की भयानक बीमारी की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाए। साथ ही, जिन लोगों के पशुओं का नुकसान इस बीमारी के कारण हुआ है, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करके फिर से अपने पैरों पर खड़े होने लायक बनाया जाए।

क्या होता है मुंह-खुर रोग

मुंह-खुर रोग विषाणु से होता है और अत्यधिक संक्रामक है। एक पशु से दूसरे में छूने से फैलती है। इससे दूध देने वाले पशु दूध देना कम कर देते हैं हालांकि बीमारी से उनकी मौत नहीं होती है। यह बीमारी दूध देने वाले पशुओं विशेष तौर पर गायों, भैंस, भेड़, बकरी में आम तौर पर होता है।