IIT ने बनाया फाइटर रोबोट, एक सेकेंड में दागता है पांच गोलियां, जानें और क्‍या हैं खूबियां

 

रोबोट एक सेकेंड में पांच गोलियां चलाता है

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस मशीन लर्निंग और गणितीय माडलिंग से लैस यह रोबोट एक सेकेंड में पांच गोलियां चलाता है। ड्रोन को पहचानकर उसे यह रोक सकता है। इसमें लिडार (प्रकाश की मदद से दूरी का आकलन करने का उपकरण) थ्री डी कैमरा माइक्रो प्रोसेसर और कई तरह के सेंसर लगे हैं।

 कानपुर। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म 'रोबोट' का चिट्टी तो आपको याद ही होगा। पलक झपकते गोलियों की बौछार करने में माहिर। अब इस फिल्मी कहानी को हकीकत का जामा पहनाया है भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर के विज्ञानियों ने। इनका बनाया रोबोट आने वाले समय में सरहद की निगहबानी के साथ ही देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों के मंसूबों पर पानी फेर सकता है।

एआइ की मदद से ड्रोन पर भी कर सकता हमला

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, मशीन लर्निंग और गणितीय माडलिंग से लैस यह रोबोट एक सेकेंड में पांच गोलियां चलाता है। ड्रोन को पहचानकर उसे यह रोक भी सकता है। इसमें लिडार (प्रकाश की मदद से दूरी का आकलन करने का उपकरण), थ्री डी कैमरा, माइक्रो प्रोसेसर और कई तरह के सेंसर लगे हैं। लेजर लाइट और आटोमेटिक बैरल (नाल) सेटिंग से इसका निशाना अचूक होता है। यह रोबोट का प्रोटोटाइप माडल है, जिससे फाइबर की गोलियां निकलती हैं। भविष्य में इसे सेना और सुरक्षा एजेंसियों की जरूरत के हिसाब से विकसित किया जा सकता है। आने वाले समय में अत्याधुनिक संसाधनों से लड़े जाने वाले युद्ध को देखते हुए रोबोट के इस प्रोटोटाइप को अहम माना जा रहा है।

पेटेंट की प्रक्रिया शुरू

रोबोट दो साल पहले कनाडा में फाइटर रोबोट का खिताब जीत चुका है। 2022 में फिलाडेल्फिया में होने वाली रोबो मास्टर प्रतियोगिता के लिए इसका एडवांस वर्जन तैयार किया जा रहा है। एडवांस वर्जन के लिए विशेषज्ञों ने पेटेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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ऊबड़-खाबड़ रास्ते पर भी चलेगा

आइआइटी की इंटेलीजेंट सिस्टम एंड कंट्रोल लैब में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा के निर्देशन में एमटेक अंतिम वर्ष के अशोक कुमार चौधरी, बीटेक तृतीय वर्ष के आयुष, सिद्धार्थ, आर्यन, बीटेक अंतिम वर्ष के लवनीश कुमार, मुस्कान अग्रवाल और वैभव वरदान ने फीनिक्स नाम का यह रोबोट तैयार किया है। यह 20 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चारों दिशाओं में चल सकता है।

इसे ऊबड़-खाबड़ रास्तों में भी उपयोग में ला सकते हैं। अभी रोबोट द्वारा दागी जाने वाली गोलियों की गति 25 मीटर प्रति सेकेंड है। इसको जरूरत के हिसाब से बढ़ाया जा सकता है। विशेषज्ञों ने रोबोट को टैंक के आकार का बनाया है, जिसमें निशाने के मुताबिक यह अपनी बैरल के कोण को अपने आप निर्धारित कर सकता है।

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स्वतः ले सकता है निर्णय 

छात्र अशोक कुमार चौधरी ने बताया कि ड्रोन की निगरानी के साथ ही यह उसका सफाया भी कर सकता है। इसके लिए रोबोट में आन बोर्ड थ्रीडी कैमरे और माइक्रो प्रोसेसर लगे हैं। यह ड्रोन की स्पीड, दूरी का आकलन कर संदेश भेज सकेगा। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से स्वत: निर्णय लेकर ड्रोन पर हमला कर सकता है।

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फीनिक्स कई तरह की खूबियों से सुसज्जित है। इसमें तकनीक और सेंसर को बढ़ाया जा रहा है। छात्रों की ओर से अभी मुकाबले के लिए तैयार किया जा रहा है। आने वाले समय में इसका उपयोग सरहद की रखवाली के लिए भी किया जा सकता है।

प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग, आइआइटी कानपुर