राधाष्टमी पर बरसाना तक दौड़ेंगी 100 बस, दो दिन तक होगा संचालन

 

80 बस गोवर्धन होकर, 20 बस कोसीकलां होकर जाएंगी।

 बस गोवर्धन होकर 20 बस कोसीकलां होकर जाएंगी। 13 व 14 सितंबर को होगा बरसाना के लिए बसों का संचालन। बस संचालन के लिए टीआइ तैनात किए जाएंगे। चालक-परिचालकों को ड्यूटी पर रहने के निर्देश दे दिए गए हैं।

आगरा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के बाद ब्रज में राधाष्टमी की धूम होगी। बरसाना में श्रद्धालुओं का रेला उमड़ेगा। प्रशासन के साथ उप्र. राज्य परिवहन निगम ने भी राधाष्टमी की तैयारियां शुरू कर दी हैं। राधाष्टमी पर बरसाना के लिए 100 बस संचालित की जाएंगी, ताकि श्रद्धालुओं को बरसाना पहुंचने में दिक्कत न हो।

राधाजी की कृपा पाने को देश भर से श्रद्धालु आते हैं। बरसाना में श्रद्धा की अविरल धारा बहती है। इस आयोजन के लिए प्रशासन के साथ परिवहन निगम ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। श्रद्धालुओं के आवागमन की जिम्मेदारी परिवहन निगम की होती है। परिवहन निगम ने राधाष्टमी पर बरसाना के लिए बस संचालन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। बरसाना के लिए 13 व 14 सितंबर को बस चलाई जाएंगी। 60 बस जेनर्म की और 40 बस निगम की होंगी। 80 बस गोवर्धन होकर और 20 बस कोसीकलां होकर जाएंगी। बस संचालन के लिए टीआइ तैनात किए जाएंगे। चालक-परिचालकों को ड्यूटी पर रहने के निर्देश दे दिए गए हैं। व्यवस्थाओं पर अधिकारी भी नजर रखेंगे ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो। आवश्यकता पड़ने पर बसों की संख्या बढ़ा दी जाएगी। स्टेशन अधीक्षक संतोष कुमार ने बताया कि बरसाना के लिए 100 बस का संचालन किया जाएगा। 60 बस जेनर्म की और 40 बस निगम की संचालित की जाएंगी।

देवछट पर बजेगी बायगीरों के मंत्रों की थाली

भले ही इलाज के मामले में देश कितना अपडेट हो गया हो, लेकिन समाज में झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र पर विश्वास करने वालों की अभी भी कोई कमी नहीं है। लोग बिषवेल, कंठमाला समेत सर्पदंश से जुड़े मामलों में डाक्टरी इलाज के बजाय बायगीरों का सहारा लेते नजर आते है। देवछट पर गांव नगला गढ़ समेत आधा दर्जन गांवों में बायगीरों का मेला लगता हैै। जहां सर्पदंश की बीमारियों से पीड़ित मरीजों का झांड़-फूंक से इलाज किया जाता है। बायगीर होतीलाल की माने तो बिषवेल पूर्व जन्म में सर्पदंश के बंध न खुलवाने की बीमारी है। बायगीर का दावा है कि इसका इलाज झांड़-फूंक व तंत्र-मंत्र से ही संभव है। सर्पदंश से जुड़े रोगों के इलाज के लिए देवछट पर मेला का आयोजन किया जाता है। बायगीर भगवती प्रसाद का कहना है कि डाक्टरी इलाज से कोई फायदा न होने पर पीड़ित लोग बिषवेल व कंठमाला के इलाज को मेला में आते हैं। उन्होंने बताया कि मेला में सर्पदंश से जुड़ी बीमारी का सामूहिक उपचार किया जाता है। पानीगांव, कराहरी, नगला सिरिया, चौकड़ा व भीम समेत कई गांवों में देवछट पर बायगीरों का मेला लगता है।