कंधार में रिहायशी सैन्य बस्तियां खाली करने का फरमान, प्रतिबंधों के चलते अफगानिस्तान में 153 मीडिया हाउस हुए बंद

 

तालिबान के खिलाफ हजारों अफगानों ने किया प्रदर्शन

कंधार में गर्वनर हाउस के बाहर एकत्र हजारों अफगानों ने विरोध प्रदर्शन किया है। करीब तीन हजार परिवारों को एक रिहायशी सैन्य कालोनी खाली करने को कहा गया है। इसी के विरोध में यह जोरदार प्रदर्शन किया गया।

काबुल, रायटर। अफगानिस्तान में तालिबानी कहर जारी है। दक्षिणी शहर कंधार में रिहायशी सैन्य बस्तियां खाली कराए जाने पर हजारों की तादाद में अफगानों ने तालिबान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। इसके अलावा, बीस प्रांतों में कम से कम 153 अफगान मीडिया हाउसों को काम करने से रोक दिया गया है।

कंधार में गर्वनर हाउस के बाहर एकत्र हजारों अफगानों ने विरोध प्रदर्शन किया है। करीब तीन हजार परिवारों को एक रिहायशी सैन्य कालोनी खाली करने को कहा गया है। इसी के विरोध में यह जोरदार प्रदर्शन किया गया। स्थानीय मीडिया ने फुटेज जारी करते हुए बताया कि इस कालोनी में सेवानिवृत्त हुए अफगानी सुरक्षा बलों के जरनल और अन्य सैन्य अफसरों के परिवार रहते हैं। इनमें से कुछ परिवार ऐसे हैं जो यहां तीस साल से भी अधिक समय से रहते आ रहे हैं। लेकिन उन्हें घर खाली करने के लिए सिर्फ तीन दिन का समय दिया गया है। हालांकि तालिबान के प्रवक्ता ने इन लोगों को निकाले जाने के विरोध पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

पिछले एक महीने में अफगानिस्तान में मीडिया का भी गला घोंटा गया है। कम से कम 153 अफगान मीडिया हाउसों को देश के बीस प्रांतों में काम करने से रोक दिया गया है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार तालिबान का सत्ता पर कब्जा होते ही मीडिया की आजादी का नामोनिशान बाकी नहीं रहा है। रेडियो, प्रिंट और टीवी चैनल समेत डेढ़ सौ से अधिक मीडिया हाउस प्रतिबंधों और आर्थिक संकट के कारण बंद पड़ गए हैं। अफगानिस्तान पत्रकार संघ के उप प्रमुख हुजुतुल्ला मुजादीदी के मुताबिक जो थोड़ा मीडिया शेष है, जल्द ही उनका भी नामोनिशान नहीं रहेगा।

संयुक्त राष्ट्र में अपदस्थ सरकार के दूत ने कहा-तालिबान से सारे वादे तोड़े

संयुक्त राष्ट्र में अफगानिस्तान की अपदस्थ सरकार के राजदूत नासिर अहमद अंदिशा का कहना है कि महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर पहले ही तालिबान ने अपने सारे वादे तोड़ दिए हैं।

नासिर अहमद ने मंगलवार को मानवाधिकार परिषद को बताया कि तालिबान ने सत्ता पर कब्जा करने के बाद वादा किया था कि वह महिलाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों का पूरा ध्यान रखेगा। लेकिन पूरे अफगानिस्तान में उसके इन वादों की एक भी झलक नहीं मिलती है। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजशीर घाटी में तालिबान ने अधिकाधिक क्रूरता दिखाई है। वह चुन-चुन कर लोगों को मार रहे हैं और जान से मारने की सजाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनकी अंतरिम सरकार में भी महिलाओं को कोई जगह नहीं दी गई है और सरकार में सिर्फ पश्तून जाति के ही लोग शामिल किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस कठिन समय में अफगानिस्तान को लेकर विश्व को चुप नहीं बैठना चाहिए।