20 वर्षों में भाषा आधारित बाजार की सिरमौर बनेगी हिंदी- गिरिराज किराडू

 

अगामी 20 वर्षों में हिंदी भाषा आधारित बाजार की सिरमौर बन जाएगी।

 वर्ष पहले हिंदी भाषा केंद्रित आयोजनों में रोजगार प्रसार आदि को लेकर रोना रोया जाता था लेकिन अब हिंदी दुनिया की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बन गई है। अगामी 20 वर्षों में हिंदी भाषा आधारित बाजार की सिरमौर बन जाएगी।

नई दिल्ली,  संवाददाता। चंद वर्ष पहले हिंदी भाषा केंद्रित आयोजनों में रोजगार, प्रसार आदि को लेकर रोना रोया जाता था लेकिन अब हिंदी दुनिया की तीसरी सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा बन गई है। अगामी 20 वर्षों में हिंदी भाषा आधारित बाजार की सिरमौर बन जाएगी। ‘स्वावलंबन की राह पर हिंदी’ विषय पर आयोजित सत्र में विशेषज्ञों ने ये विचार रखे। परिचर्चा में माइक्रोसाफ्ट में भारतीय भाषा के निदेशक बालेंदु शर्मा दधीच, स्टोरीटेल के पब्लिशिंग मैनेजर एवं हेड गिरिराज किराडू एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक प्रभात रंजन शामिल हुए।

सत्र की शुरुआत 'आह हिंदी से वाह हिंदी' की यात्रा सरीखे प्रश्न से हुई। बालेंदु शर्मा दधीच ने कहा कि यूनिकोड के आने से पहले कंप्यूटर सिर्फ अंग्रेजी के मुफीद था। इसे इस तरह बनाया गया था कि यह अंग्रेजी के शब्दों को ही पहचानता था। कुल 127 फांट को यह पहचानता था जो सिर्फ अंग्रेजी के थे लेकिन अब आप हिंदी को किसी भी फांट में बदलिए, कंप्यूटर आसानी से पहचान लेता है। यह यूनिकोड की वजह से संभव हो पाया है। जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि भारत की कुल आबादी के 55 फीसद लोग हिंदी बोलते हैं।

बालेंदु शर्मा दधीच ने आगे कहा कि इस बड़ी आबादी ने बाजार को आकर्षित किया है। ऐसे में हिंदी में रोजगार के अवसर अब बढ़ गए हैं। हिंदी में जितनी तरक्की हुई है, उसमें बड़ा योगदान अंग्रेजी पढ़ने वालों का है। अंग्रेजी पढ़कर बहुराष्ट्रीय कंपनियों, विदेशों में जाकर काम करने वालों ने ही कुछ साल बाद हिंदी को अपनाया। भारत के शुरुआती ब्लागर में ऐसे ही लोग शामिल थे। बहुराष्ट्रीय कंपनियों में भी अब हिंदी की अलख जग रही है। इन कंपनियों में काम करने वाले लोग हिंदी भाषा के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं।

वहीं गिरिराज किराडू ने कहा कि कुछ समय पहले तक हालात यह थे कि फांट को कन्वर्ट करने के बावजूद दो घंटे प्रूफ रीडिंग में लगते थे लेकिन अब यह स्थिति नहीं है। हिंदी का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। अगले 20 साल में यह सबसे बड़ा भाषा आधारित बाजार होगा। विभिन्न अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि एक नए पाठक वर्ग का उदय हो रहा है जो हिंदी साहित्य को पढ़कर नहीं सुनकर समझना चाहता है। इसका फायदा यह होगा कि एक लेखक तीन श्रेणियों ईबुक, आडियो और किताब के जरिये जन-जन तक पहुंच सकेगा।

उन्‍होंने यह भी कहा कि भारत सरकार को हिंदी को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, तकनीक आदि की पढ़ाई हिंदी में कराने पर बल देना चाहिए। वहीं प्रभात रंजन ने कहा कि कुछ साल पहले तो हिंदी में रोजगार के सीमित अवसर थे लेकिन अब युवाओं को कई क्षेत्रों में हिंदी में रोजगार मिल रहा है। जरूरत इस बात की है कि तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा भी हिंदी में दी जाए।