चौथे टेस्ट मैच में भारतीय टीम को कैसे मिली ऐतिहासिक जीत, ये रहे 5 बड़े कारण

 

टीम इंडिया ने जीत दर्ज की (फोटो विराट कोहली ट्विटर)
 लंदन के केनिंग्टन ओवल में भारतीय टीम ने पांच दशक से चला आ रहा जीत का सूखा समाप्त कर दिया है। भारत ने मेजबानों के खिलाफ बड़ी जीत दर्ज की है। इस जीत में अहम योगदान किसने दिया। इसके कारण जान लीजिए।

नई दिल्ली, तीन सितंबर की रात को लंदन के ओवल स्टेडियम में ही नहीं, संपूर्ण क्रिकेट जगत में सिर्फ विराट कोहली और टीम इंडिया की कमजोरियों पर चर्चा हो रही थी। पांच टेस्ट मैचों की सीरीज के चौथे टेस्ट के दूसरे दिन के तीसरे सत्र में भारत के 191 रन के जवाब में इंग्लैंड की पहली पारी 290 रन पर आलआउट हो गई थी। तीसरा टेस्ट पारी से हारने वाली टीम इंडिया फिर हार की तरफ बढ़ रही थी। हालांकि, जैसा सोचा जाता है, हमेशा वैसा हो, जरूरी नहीं है। 

दूसरे दिन का खेल खत्म होते-होते भारत ने बिना विकेट खोए 43 रन जरूर बनाए, लेकिन सब यही कह रहे थे कि अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा फार्म में नहीं हैं। पुजारा तब तक इस सीरीज में सिर्फ एक अर्धशतक लगा सके थे। रवींद्र जडेजा अपनी भूमिका से न्याय नहीं कर पाए थे। रविचंद्रन अश्विन को नहीं खिलाने पर विराट की आलोचना हो रही थी। विराट खुद 52 अंतरराष्ट्रीय पारियों से शतक नहीं लगा सके थे और रोहित शर्मा ने कभी भी विदेशी जमीन पर टेस्ट शतक नहीं लगाया था, लेकिन अगले तीन दिन में सभी कमजोरियों से पार पाकर सर्वशक्तिमान टीम इंडिया का उदय हुआ।

ये था मैच का टर्निग प्वाइंट

इस मैच के शुरुआती तीन दिन सिर्फ यही लग रहा था कि यह मैच या तो भारतीय टीम हारेगी या मैच ड्रा होगा, लेकिन चौथे दिन रोहित शर्मा के शतक और आखिरी दिन जसप्रीत बुमराह की रिवर्स स्विंग, रवींद्र जडेजा के कंजूसी भरे स्पेल व महत्वपूर्ण समय पर उमेश यादव और शार्दुल ठाकुर के लिए गए विकेट ने अंग्रेजों को तहस-नहस कर दिया। इसी के साथ भारत ने 50 साल बाद ओवल स्टेडियम में 157 रनों से टेस्ट विजय हासिल की। 1971 में अजीत वाडेकर की कप्तानी में भारतीय ने इससे पहले यह कारनामा किया था। अब यह भी तय हो गया है कि टीम इंडिया इंग्लैंड में यह सीरीज हारेगी नहीं, क्योंकि उसने 2-1 से बढ़त ले ली है और आखिरी मैच 10 सितंबर से मैनचेस्टर में होना है।

आलराउंडर शार्दुल ठाकुर

हार्दिक पांड्या के टेस्ट में गेंदबाजी नहीं कर पाने और अधिकतर समय अनफिट रहने के कारण टीम इंडिया को एक अदद तेज गेंदबाजी आलरांडर की तलाश थी। शार्दुल ठाकुर ने इस सीरीज में दो टेस्ट मैचों की तीन पारियों में महत्वपूर्ण 117 रन बनाने के साथ सात विकेट लिए हैं। इसमें निचले क्रम में खेलते हुए दो अर्धशतक शामिल हैं। मौजूदा टेस्ट सीरीज के पहले तीन टेस्ट मैचों में शतक जड़ने वाले इंग्लिश कप्तान जो रूट इंग्लैंड की हार को टालने की कोशिश करते रहे, लेकिन शार्दुल ने सोमवार को दूसरे सत्र में उन्हें बोल्ड करके सबसे बड़ा विकेट लिया।

रोहित, मामला फिट

भारत की दूसरी पारी में शतक जड़ने वाले सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा मैन आफ द मैच चुने गए। रोहित ने पहली बार विदेशी सरजमीं पर शतक लगाया। यहां तक कि वे दूसरी पारी के दौरान चोटिल भी हो गए, लेकिन बल्लेबाजी जारी रखी। इसी का नतीजा रहा कि भारत ने पहले तो 99 रन की बढ़त को पीछे छोड़ा और फिर एक बड़ा स्कोर इंग्लैंड के सामने खड़ा किया। रोहित शर्मा ने सभी आलोचकों को करारा जवाब दिया है और वे भारत की जीत का प्रमुख कारण रहे हैं।

इंग्लैंड की कमजोर बल्लेबाजी

इंग्लैंड ने सोमवार को अपनी दूसरी पारी बिना किसी नुकसान के 77 रन से आगे बढ़ाई। अंतिम दिन उसे जीत के लिए 291 रन की और जरूरत थी, जबकि भारत को 10 विकेट झटकने थे। जिस तरह से इंग्लैंड के सलामी बल्लेबाजों हसीब हमीद और रोरी ब‌र्न्स ने रविवार को दिन के अंतिम सत्र में बल्लेबाजी की थी उसे देखते हुए ऐसा लग रहा था कि इंग्लैंड की टीम आसानी से घुटने नहीं टेकेगी। हालांकि, ब‌र्न्स अर्धशतक पूरा करने के बाद अगली ही गेंद पर विकेट गंवा बैठे। बदलाव के तौर पर आए शार्दुल ने उन्हें रिषभ पंत के हाथों कैच कराया।

बूम-बूम बुमराह

पोप और बेयरस्टो को बुमराह ने बोल्ड किया। इन दो गेंदों ने इंग्लैंड की बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी। पहली पारी में 81 रन बनाने वाले पोप के सामने बुमराह पुरानी गेंद लेकर आए थे। गुड लेंथ की गेंद पर फेंकी गेंद पोप के बल्ले और पैड को चीरते हुए गिल्लियां बिखेर गई। इसी के साथ बुमराह ने अपने 100 टेस्ट विकेट पूरे किए। अपने अगले ही ओवर में उन्होंने अतिरिक्त जोर लगाते हुए यार्कर फेंकी। इस इनस्विंगर के सामने बेयरस्टो का न ही पैर चला न ही बल्ला। वह शून्य पर पवेलियन लौट गए। इसके बाद मोइन अली को भी जडेजा ने बिना रन बनाए पवेलियन भेज दिया। इसके बाद इंग्लैंड ने हल्का-फुल्का संघर्ष किया जो उसकी हार टालने के लिए नाकाफी था।