कुछ गोशाला बंद, कहीं जरूरत से ज्यादा, अब सड़कों की गाय कहां जाए ?


इलाके में सड़क पर घूमती बेसहारा गाय।
दक्षिणी निगम के पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक रविंद्र शर्मा बताया कि बेसहारा गाय पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है कि सभी गायों में माइक्रोचिप लगाई जाए। उनका कहना है कि इस संबंध में वह दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग को पत्र लिख चुके हैं।

नई दिल्ली,  संवाददाता। इलाहबाद हाईकोर्ट ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का सुझाव दिया है। लेकिन, राजधानी में तो गायों का संरक्षण करना ही निगमों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बना हुआ है। दिल्ली में बेसहारा घूमने वाली गायों की संख्या इतनी हो गई है कि उनके लिए गोशालाओं में रखने के लिए जगह तक नहीं बची है। यही कारण है कि नगर निगम सड़कों पर घूमने वाली बेसहारा गायों को पकड़ तो रहा है, लेकिन उन्हें गोशालाओं में छोड़ने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गोशाला संचालक पकड़ी गई गायों को रखने से इन्कार कर देते हैं।

बेसहारा गायों की हो रही परेशानी

दरअसल, 15 दिन पूर्व हुई स्थायी समिति बैठक में डिप्टी चेयरपर्सन पूनम भाटी ने सड़कों पर घूमने वाली बेसहारा गायों की वजह से होने वाली परेशानी को रखा था। बैठक में विभाग को हर 15 दिन में 200 गायों को पकड़ने का निर्देश दिया गया था। विभाग ने 11 दिन में 198 गायों को पकड़ तो लिया, लेकिन जब नजफगढ़ स्थित डाबर हरेकृष्णा गोशाला में छोड़ने गए तो संचालकों ने इन्हें लेने से इन्कार कर दिया। इसके बाद बड़ी मशक्कत और कहासुनी के बाद गोशाला संचालक इन गायों को लेने के लिए तैयार हुए।

दो गोशालाएं हो गईं बंद

दक्षिणी निगम पहले मानव गोशाला और आचार्य सुशील मुनि गोशाला में पहले बेसहारा गायों को छोड़ता था, लेकिन अब इनके बंद होने से निगम की मुसीबत बढ़ गई है। आचार्य सुशील मुनि गोशाला बीते चार वर्षों से बंद पड़ी है। वहीं, दिल्ली सरकार ने मानव गोशाला में अनियमितता के चलते यहां पर पकड़ी गईं गायों को छोड़ने की पाबंदी लगा दी है।

जरूरी है माइक्रोचिपिंग

दक्षिणी निगम के पशु चिकित्सा विभाग के निदेशक रविंद्र शर्मा बताया कि बेसहारा गाय पर लगाम लगाने के लिए जरूरी है कि सभी गायों में माइक्रोचिप लगाई जाए। उनका कहना है कि इस संबंध में वह दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग को पत्र लिख चुके हैं। माइक्रोचिपिंग से इन पशुओं और इनके मालिकों की पहचान करने में आसानी होगी।

2,800 की है जगह 3,500 गाय रख रहे हैं

नजफगढ़ में डाबर हरेकृष्णा गोशाला के संचालक कृष्णा यादव ने कहा कि 34 एकड़ में गोशाला है। इसमें 2,800 गाय रखने की क्षमता है। हम पहले से ही 3,500 गायों को रख रहे हैं। हम नया शेड भी बना रहे हैं, लेकिन निगम से फंड न मिलने की वजह से दिक्कत आ रही है। प्रति गाय 20 रुपये की राशि मिलती है।निगमायुक्त को निर्देश दिया है कि वह जो गोशाला बंद हो गई है उसे शुरू करवाने के लिए दिल्ली सरकार के पशुपालन विभाग से बातकर इस मामले को सुलझाएं।