भारत में बच्चों के लिए शुरू हो रहा है वैक्सीनेशन, अगले महीने से वैक्सीन लेने के योग्य होंगे बालक-बालिकाएं!

 

भारत में बच्चों के लिए शुरू हो रहा है वैक्सीनेशन, अगले महीने से वैक्सीन लेने के योग्य होंगे बालक-बालिकाएं!

अक्टूबर से कंपनी जिसे जाइडस कैडिला के नाम से जाना जाता है एक महीने में 10 मिलियन खुराक का उत्पादन करेगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने फिलहाल इसको लेकर कोई बात नहीं कही है। यह दुनिया की पहली डीएनए-आधारित COVID-19 वैक्सीन है।

नई दिल्ली, रायटर। भारत में बच्चों को भी जल्द वैक्सीन देने का कार्य शुरू किया जाएगा। भारत में अब करोड़ों-करोड़ों वैक्सीन एक ही दिन में दी जाने लगी है, जिससे वैक्सीन की कमी को लेकर अतीत में उठ रही आवाजें भी बंद हुईं हैं और यह देश में अधिक वैक्सीन के प्रोडक्शन का भी प्रमाण है। बच्चों को वैक्सीन के मामले पर सीधी नजर रखे हुए दो सूत्रों ने रायटर को बताया, '12 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी भारतीय बच्चे अगले महीने से COVID-19 टीकाकरण के लिए पात्र हो जाएंगे।' बताया गया कि दवा निर्माता कैडिला हेल्थकेयर के ZyCoV-D को लान्च किए जाने के बाद बच्चों को जल्द टीका लगाने में सफलता मिलती नजर आ रही है।

दुनिया की पहली डीएनए-आधारित COVID-19 वैक्सीन, ZyCoV-D ने पिछले महीने भारतीय नियामकों से आपात इस्तेमाल की मंजूरी प्राप्त की। बताया गया कि अक्टूबर से, कंपनी, जिसे जाइडस कैडिला के नाम से जाना जाता है, एक महीने में 10 मिलियन खुराक का उत्पादन करेगी।वहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय ने वैक्सीन दिए जाने के अनुरोध पर फिलहाल कोई जवाब नहीं दिया है। हालांकि, सूत्रों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी। बता दें कि यह भारत में बच्चों के लिए स्वीकृत एकमात्र वैक्सीन है।

सूत्रों ने पहले भी बताया था कि वैक्सीन ZyCoV-D के इस साल के अक्टूबर की शुरुआत में आने की संभावना है। बता दें कि भारत के ड्रग रेगुलेटर ने 20 अगस्त को ही जायडस कैडिला की इस वैक्सीन के इमरजेंसी इस्तेमाल की मंजूरी दे दी थी। ZyCoV-D दुनिया की पहली plasmid DNA कोरोना वैक्सीन है। तीन डोज की इस वैक्सीन को लगाने के लिए इंजेक्शन की जरूरत नहीं होगी। पहली खुराक के 28वें दिन दूसरी और फिर 56 दिन बाद तीसरी खुराक लेनी होगी।

जायडस कैडिला की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 'तीन डोज वाली यह वैक्सीन जब मानव शरीर में जाती है तब वहां SARS-CoV-2 वायरस का स्पाइक प्रोटीन बनाती है। इससे एक इम्यून रेस्पांस विकसित होता है जो इस बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने में सक्रिय भूमिका निभाती है। प्लग एंड प्ले तकनीक जिसपर plasmid DNA प्लेटफार्म आधारित है वह आसानी से वायरस का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है।'