दिल्ली दंगा: शिकायत में जिक्र न होने पर दो आरोपित आगजनी के आरोप से मुक्त

 

आगजनी के आरोप हटने के बाद अब केस सेशन ट्रायल के योग्य नहीं रह गया था।
 दंगा करने घातक हथियारों का इस्तेमाल करने और समान मंशा से गैर कानूनी समूह में शामिल होने समेत अन्य आरोपों पर सुनवाई के लिए इस मामले को मुख्य महानगर दंडाधिकारी की कोर्ट में भेज दिया है।

नई दिल्ली,  संवाददाता। दिल्ली दंगे से जुड़े चोरी, तोड़फोड़ और आगजनी के एक मामले में आरोपित नीरज उर्फ काशी और मनीष उर्फ राहुल को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत से आगजनी के आरोप से मुक्त कर दिया है। दंगा करने, घातक हथियारों का इस्तेमाल करने और समान मंशा से गैर कानूनी समूह में शामिल होने समेत अन्य आरोपों पर सुनवाई के लिए इस मामले को मुख्य महानगर दंडाधिकारी की कोर्ट में भेज दिया है। चूंकि आगजनी के आरोप हटने के बाद अब केस सेशन ट्रायल के योग्य नहीं रह गया था।

आगजनी का नहीं था जिक्र

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने आदेश में कहा कि शिकायतकर्ताओं ने मूल शिकायत से लेकर पूरक बयानों में कहीं भी आगजनी का जिक्र नहीं किया। रिकार्ड में चश्मदीद गवाह और वीडियो फुटेज भी नहीं है। घटना से जुड़ी कुछ तस्वीरें हैं, उनसे भी प्रतीत नहीं होता कि आगजनी की घटना हुई थी। ऐसे में आरोपितों पर आगजनी के आरोप तय नहीं हो सकते।

शिकायत में घटना की तारीख एवं समय का जिक्र ही नहीं

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि शिकायतकर्ता नबी हसन सलमानी ने अपनी शिकायत में घटना की तारीख और समय का जिक्र नहीं किया है। वहीं, मनीष सिंह और मुहम्मद अफसर की शिकायत में घटना 25 फरवरी, 2020 की बताई गई है। शिकायतकर्ता बाजिद हसन ने घटना 26 फरवरी, 2020 की बताई है।

पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न

इसके अलावा शिकायतकर्ता रेशमा परवीन की मूल शिकायत में घटना की तारीख का जिक्र नहीं था, लेकिन पूरक बयान में उन्होंने घटना 26 फरवरी 2020 रात की बताई। कोर्ट ने आदेश में कहा कि अलग-अलग तारीखों की घटना को पुलिस ने एक प्राथमिकी में जोड़ दिया है। यह पुलिस की कार्यशैली पर प्रश्न चिह्न है। शिकायतकर्ताओं ने आगजनी का जिक्र नहीं किया है, ऐसे में सिर्फ सिपाहियों के बयान पर आरोप तय नहीं किया जा सकता।