अफगान पर तालिबान के काबिज होने से पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों का हौसला बढ़ेगा

 

अफगान पर तालिबान के काबिज होने से पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी संगठनों का हौसला बढ़ेगा
पाकिस्तान का तालिबान प्रेम अब उसी पर भारी पड़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार तालिबान की जीत पर जश्न मनाने वाला पाकिस्तान अब इस बात को महसूस कर रहा है कि तालिबान की जीत आतंकवादियों को अपने ही क्षेत्र में उग्रवाद के लिए उकसा रही है।

इस्लामाबाद, एएनआइ। पाकिस्तान का तालिबान प्रेम अब उसी पर भारी पड़ता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अफगानिस्तान पर तालिबान के काबिज होने पर जश्न मनाने वाला पाकिस्तान अब इस बात को महसूस कर रहा है कि समूह की जीत आतंकवादियों को अपने ही क्षेत्र में उग्रवाद के लिए उकसा रही है।

तालिबान की जीत की सराहना करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि तालिबान ने गुलामी की बेड़ियां तोड़ दीं है। तो वहीं, इमरान इस बात से अनजान थे कि वह अपने क्षेत्र के उग्रवादियों को उकसा रहे है। द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, कई दिनों तक पाकिस्तान के विभिन्न शीर्ष नेताओं और सेवानिवृत्त सेना जनरलों ने तालिबान की जीत का जश्न मनाया।

अब, पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं पर अशांति की स्थिति देखी जा रही है। द वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि तालिबान की हालिया जीत के बाद, आतंकवादी समूह पाकिस्तान में विद्रोह पैदा करने के लिए उकसा रहे हैं। तालिबान ने न केवल आतंकवादियों को बल्कि पाकिस्तान के कट्टर धार्मिक दलों को भी प्रेरित किया है।इस्लामाबाद में पाकिस्तानी शांति अध्ययन संस्थान के निदेशक, मुहम्मद आमिर राणा ने कहा, "तालिबान के सत्ता में आने से, पाकिस्तान विरोधी आतंकवादी समूहों का हौसला बढ़ेगा, लेकिन यह यहीं खत्म नहीं होता है।

पाकिस्तानी अधिकारियों को अब यह भी डर सताने लगा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (पाकिस्तानी तालिबान) अफगान पर तालिबान की जीत को देखते हुए फिर से उभर सकता है क्योंकि टीटीपी अफगान तालिबान से संबद्ध है। पिछले दशक में, टीटीपी ने पाकिस्तानी राज्य और नागरिक ठिकानों पर लगभग 1,800 हमले किए।

जुलाई में, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि टीटीपी के पास अफगान सीमा पर लगभग 6,000 प्रशिक्षित लड़ाके थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि तालिबान और टीटीपी ने संबंध बनाए रखे हैं।

हाल ही में, टीटीपी ने अफगानिस्तान में तालिबान की जीत का भी जश्न मनाया और पिछले हफ्ते एक और हमले का दावा किया जिसमें दो पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। पाकिस्तान में टीटीपी की उपस्थिति पिछले वर्षों में कमजोर पड़ने लगी क्योंकि देश की सेना ने उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर आक्रमण किया।