अनिल घणवत ने लिखा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र, कहा- किसान आंदोलन पर बनी कमेटी की रिपोर्ट हो सार्वजनिक

 

किसान आंदोलन पर बनी सुप्रीम कोर्ट की कमेटी के सदस्य रहे अनिल घनवत की फाइल फोटो।

किसानों के आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई कमेटी के सदस्य रहे अनिल घणवत ने चीफ जस्टिस को पत्र लिखा है। पत्र में अनिल घणवत ने मांग की हैै कि कमेटी द्वारा दी गई रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए।

चंडीगढ़। तीन कृषि कानूनों को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों को शांत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से जो तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई थी। इसी कमेटी के सदस्य रहे अनिल घणवत सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। घणवत शेतकारी संगठन के प्रधान भी हैं। उन्होंने लिखा कि इस रिपोर्ट की सिफारिशों पर अमल करवाने के लिए केंद्र सरकार को कहा जाए।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र में अनिल घणवत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसान आंदोलन को देखते हुए 12 जनवरी को जो चार सदस्यीय कमेटी बनाई थी उसने अपनी रिपोर्ट 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी थी, लेकिन उन्हें उन्हें लगता है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस रिपोर्ट पर कोई ध्यान ही नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि कमेटी ने विभिन्न किसान संगठनों, अर्थशास्त्रियों और कृषि विशेषज्ञों के साथ बातचीत करके दो महीने में यह रिपोर्ट तैयार की है। सुप्रीम कोर्ट ने पांच महीनों में न तो इसे सार्वजनिक किया है और न ही इसे केंद्र सरकार को भेजा है।

दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में अनिल घणवत ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखे जाने की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि इतने लंबे समय तक चल रहे किसान आंदोलन को देखकर वह दुखी हैं। उन्होंने रिपोर्ट के अंश बताने से इन्कार करते हुए कहा कि हमने सभी लोगों से इस पर बात की है और मुझे पूरी आशा है कि यदि इस रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू कर दिया जाए तो किसानों की ज्यादातर मांगें पूरी हो जाएंगी। उन्होंने माना कि किसी भी क्षेत्र में मनमानी ठीक नहीं है, लेकिन हर बात को कार्पोेरेट से जोड़ना भी सही नहीं है।कहा कि क्या किसान जो ट्रैक्टर, मोटरें आदि खरीदते हैं वह कार्पोरेट कंपनियां नहीं हैं, अगर इसी तरह की बड़ी कंपनियां खाद्यान्नों की खरीद में भी आ जाएं तो उन्हें क्या दिक्कत है। बल्कि प्रतिस्पर्धा में उन्हें उनकी फसल का ज्यादा अच्छा दाम मिलेगा। अनिल घणवत ने कहा कि वह खुद किसान परिवार से हैं और किसानों के दर्द को समझते हैं। हमने संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को भी कमेटी के साथ चर्चा में शामिल होने का कई बार न्यौता दिया था, लेकिन वे नहीं आए।

घणवत ने कहा कि अगर आते तो ज्यादा अच्छा होता, उनके विचार भी रिपोर्ट का हिस्सा बन पाते । काबिलेगौर है कि सुप्रीम कोर्ट ने 12 जनवरी को जिस चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था, उसमें प्रसिद्ध कृषि अर्थशास्त्री अशोक गुलाटी, अर्थशास्त्री पीके जोशी, अनिल घणवत और भूपेंद्र सिंह मान शामिल थे। हालांकि भूपेंद्र सिंह मान ने कमेटी की सदस्यता से तुरंत इस्तीफा दे दिया, क्योंकि इस कमेटी को संयुक्त किसान मोर्चा ने खारिज कर दिया था।