ट्रेन के डिब्‍बों को निजी कंपनियों को पट्टे पर देने और बेचने की नीति बना रहा भारतीय रेलवे, जानें पूरी योजना


निजी कंपनियां थीम आधारित पर्यटन सर्किट ट्रेनें चलाने के लिए रेलवे के कोच खरीद सकेंगी और पट्टे पर ले सकेंगी।
भारतीय रेलवे एक ऐसी नीति बना रहा है जिसके तहत निजी कंपनियां थीम आधारित सांस्कृतिक धार्मिक और अन्य पर्यटन सर्किट ट्रेनें चलाने के लिए रेलवे के कोच खरीद सकेंगी और पट्टे पर ले सकेंगी। पूरी योजना जानने के लिए पढ़ें यह रिपोर्ट...

नई दिल्‍ली, पीटीआइ। भारतीय रेलवे एक ऐसी नीति बना रहा है जिसके तहत निजी कंपनियां थीम आधारित सांस्कृतिक, धार्मिक और अन्य पर्यटन सर्किट ट्रेनें चलाने के लिए रेलवे के कोच खरीद सकेंगी और पट्टे पर ले सकेंगी। रेलवे ने शनिवार को एक विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी पीटीआइ के मुताबिक रेलवे ने बताया कि नीति निर्माण, नियम और शर्तों को तय करने के लिए रेल मंत्रालय की ओर से कार्यकारी निदेशक स्तर की एक समिति का गठन किया गया है।  

जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारतीय रेलव रेल आधारित पर्यटन का विस्तार करने की योजना बना रहा है। इस कवायद का मकसद पर्यटन क्षेत्र की क्षमता का भरपूर इस्‍तेमाल करना है। भारतीय रेलवे पर्यटन क्षेत्र के पेशेवरों की दक्षता का लाभ उठाने के लिए भी यह पहल कर रहा है। भारतीय रेलवे का मकसद विपणन, आतिथ्य क्षेत्र, ग्राहक के साथ संपर्क, पर्यटन सर्किटों का विकास आदि जैसी पर्यटन गतिविधियों में पर्यटन क्षेत्र के पेशेवरों की क्षमता का फायदा उठाना है।

रेलवे की ओर से जारी बयान में यह भी कहा गया है कि इच्छुक कंपनियों को रेल कोच पट्टे पर दिए जाएंगे ताकि वे थीम आधारित पर्यटक सर्किट ट्रेन के रूप में इनका संचालन करें। वहीं सूत्रों का कहना है कि योजना के मुताबिक निजी कंपनी को कम से कम 16 कोचों वाली ट्रेन पट्टे पर लेनी होगी या खरीदनी होगी। यह कवायद ऐसे समय हो रही है जब रेलवे निजी ट्रेनों के संचालन के लिए निजी कंपनियों को लाने का प्रयास कर रहा है।

 हालांकि कारपोरेट क्षेत्र ने अभी इसमें कम दिलचस्पी दिखाई है। जारी बयान के मुताबिक इस योजना में निजी कंपनियों को कोचों में मामूली सुधार की भी इजाजत दी जाएगी। रेल कोच को कम से कम पांच वर्षों के लिए पट्टे पर लिया जा सकता है। इसे आगे कोचों की कोडल लाइफ यानी इसके संचालन की उम्र तक बढ़ाया जा सकेगा। रेलवे की योजना के मुताबिक कोच को लीज पर लेने वाली कंपनी ही मार्ग, यात्रा कार्यक्रम, शुल्क आदि का निर्धारण करेगी।