अमेरिका ने सऊदी से क्‍यों हटाया पैट्रियट मिसाइल सिस्टम, जानें क्‍या है इसका चीन से लिंक, अमेरिकी रणनीति में बड़ा बदलाव

 

अमेरिका ने सऊदी से क्‍यों हटाया अपनी पैट्रियट मिसाइल। फाइल फोटो।
अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों के हटने के बाद बाइडन प्रशासन ने सऊदी अरब में यह कदम क्‍यों उठाया। क्‍या अमेरिका ने सच में सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया। बाइडन प्रशासन की क्‍या रणनीति है। इस रणनीति के पीछे चीन का क्‍या लिंक है। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

नई दिल्‍ली, ऑनलाइन डेस्‍क। अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अमेरिका ने सऊदी अरब में तैनात पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और टर्मिनट हाई एल्टिट्युड एरियल डिफेंस सिस्‍टम हो हटा दिया है। आखिर अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों के हटने के बाद बाइडन प्रशासन ने सऊदी अरब में यह कदम क्‍यों उठाया। क्‍या अमेरिका ने सच में सऊदी अरब का साथ छोड़ दिया। इसके पीछे बाइडन प्रशासन की क्‍या रणनीति है। अमेरिका की इस रणनीति के पीछे चीन का क्‍या लिंक है। आइए जानते हैं विशेषज्ञों की राय।

अब चीन पर पूरी तरह से फोकस करेगा अमेरिका

  • प्रो. हर्ष पंत का कहना है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडन अब सेना को पूरी तरह से चीन पर केंद्र‍ित करना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि अब बाइडन प्रशासन का पूरा ध्‍यान चीन पर होगा जो राष्‍ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर उसका मुख्‍य प्रतिद्वंदी बनकर उभरा है। प्रो. पंत ने कहा कि बाइडन ने शुरू में यह संकेत दिया था कि वह ईरान के साथ तनाव कम करेंगे। उन्‍होंने कहा कि अमेरिका अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु समझौते पर फिर से बातचीत करने का इच्‍छुक हैं। हालांकि, बाइडन के पूर्ववर्ती डोनाल्‍ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सख्‍त रुख अपना रखा था।
  • अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को लगता है कि खाड़ी देशों में अब जंग का खतरा कम हुआ है। इस बीच, सऊदी अरब ने खुद से हूती विद्रोहियों के खिलाफ अपनी सुरक्षा को मजबूत कर लिया है। उन्‍होंने कहा कि इसी रणनीति के तहत अमेरिका ने खाड़ी देशों सऊदी अरब, इराक, कुवैत, जॉर्डन से आठ पैट्रियोटऐंटी मिसाइल स‍िस्‍टम हटाने का फैसला लिया था।
  • उन्‍होंने कहा कि बाइडन प्रशासन के रुख में यह बदलाव खाड़ी देशों में तनाव के कम होने और सऊदी अरब-ईरान में बातचीत शुरू होने और अमेरिका के रणनीतिक अनिवार्यता में बदलाव के बाद आया है। बाइडन प्रशासन ने यह फैसला ऐसे समय पर लिया है जब अफगानिस्‍तान से भी अमेरिकी अभियान खत्‍म हो गया है। इस वजह से इस इलाके से सैनिकों और हथियारों को कम किया जा रहा है।

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  • उन्‍होंने कहा कि प्रशांत महासागर चीन की बढ़ती आक्रामकता को रोकने के लिए अमेरिका ने मिसाइलों की तैनाती शुरू कर दी है। दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना बना चुका चीन अब प्रशांत महासागर और आसपास के इलाकों में तेजी से नौसैनिक गतिविधियों को बढ़ा रहा है। इसी की काट खोजने के लिए अमेरिका ने एयर डिफेंस और अटैक मिसाइलों की एक पूरी सीरीज को चीन के चारों ओर तैनात कर दिया है। अमेरिकी नौसेना ने आस्‍ट्रेलिया में पैट्रियट मिसाइल डिफेंस लॉन्चर की भी तैनाती की है।
  • उन्‍होंने कहा कि इसका एक अन्‍य कारण कोरोना महामारी भी है। इस महामारी का असर अमेरिकी अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ा है। इसलिए अमेरिका का जोर है कि कम से कम देशों में सैनिकों की तैनाती कर अमेरिकी सैन्‍य खर्च को बचाया जाए। इस वजह से भी अमेरिका विभिन्‍न देशों में तैनात सैनिकों को और अपने उपकरणों को समेट रहा है। अब वह दुश्‍मन नंबर वन और टू के हिसाब से अपनी रणनीति में बदलाव करने के लिए बाध्‍य हुआ है।

अमेरिका ने 2019 में तैनात किए थे ये हथियार

  • वर्ष 2019 के अंत में अमेरिका ने सऊदी अरब में अपने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और कई हजार अमेरिकी सैनिकों को तैनात किया था। उस समय हूती विद्रोहियों के सऊदी की एक तेल कंपनी के ऊपर किए गए हमले के कारण तेल का उत्पादन घट गया था। इस कारण पूरी दुनिया में तेल की कीमतों में अप्रत्याशित इजाफा देखने को मिला था।
  • पैट्रियट मिसाइल इस समय पूरे अमेरिका, जर्मनी, ग्रीस, इजरायल, जापान, कुवैत, नीदरलैंड, सऊदी अरब, कोरिया, पोलैंड, स्वीडन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, रोमानिया, स्पेन और ताइवान की सेना में शामिल है। 2003 के इराक युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना ने पैट्रियट मिसाइल सिस्टम को तैनात किया था। कुवैत में तैनात इस मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने दुश्मनों की कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया था।

महाविनाशक हथियार से लैस होगी अमेरिकी सेना

चीन के खिलाफ अपनी सैन्‍य रणनीति के तहत अमेरिका 100 बिलियन डालर की परमाणु मिसाइल खरीद रहा है। अमेरिका का यह महा विनाशक हथियार है। इस मिसाइल की ताकत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से लगभग 20 गुना अधिक है। यह मिसाइल अमेरिका से लांच होने के बाद चीन की बीजिंग को पल भर में बर्बाद करने की क्षमता रखता है। अत्याधुनिक तकनीकी से बनी गाइडेड सिस्टम के कारण 10000 किलोमीटर की यात्रा करने के बावजूद अपने लक्ष्‍य को भेदने में सक्षम है। अमेरिकी वायुसेना ने इस मिसाइल की 600 यूनिट के लिए ऑर्डर देने का प्लान किया है।