पंजाब के सीएम के लिए सिंघु बार्डर से आई बुरी खबर, नवजोत सिंह सिद्धू को सता रहा नया डर

 

Kisan Andolan: पंजाब के सीएम के लिए सिंघु बार्डर से आई बुरी खबर, नवजोत सिंह सिद्धू को सताने लगा डर

सिंघु बार्डर पर बैठे किसानों की ओर से कहा गया है कि पंजाब के सीएम को यहां पर मंच नहीं मिलेगा बल्कि पंडाल में बैठकर अन्य किसानोें के साथ बातें सुननी होंगी। उन्हें भाषण देने की भी अनुमति नहीं मिलेगी।

नई दिल्ली/सोनीपत, डिजिटल डेस्क। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर पर 27 नवंबर, 2021 से किसानों धरना-प्रदर्शन जारी है। इस बीच पंजाब के नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के साथ-साथ पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के लिए भी दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बार्डर से बुरी खबर आई है। बताया जा रहा है कि अगर नवजोत सिंह सिद्धू और पंजाब सीएम चरणजीत सिंह चन्नी दोनों सिंघु बार्डर पर किसानों का समर्थन करने आए तो उन्हें 'अपमानित' भी होना पड़ सकता है। दरअसल, पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने आंदोलनरत किसानों से मिलने की इच्छा जताई है। इसकी जानकारी लगने पर सिंघु बार्डर पर बैठे किसानों की ओर से कहा गया है कि पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह को यहां पर मंच नहीं मिलेगा, बल्कि पंडाल में बैठकर अन्य किसानों के साथ बातें सुननी होंगी। उन्हें भाषण देने की भी अनुमति नहीं मिलेगी। कुछ ऐसा ही हाल नवजोत सिंह सिद्धू का भी होगा, अगर उन्होंने भी सिंघु बार्डर पर आने की कोशिश की तो।

नवजोत सिंह सिद्धू को सता रहा 'अपमान' का डर

इस बात से पंजाब कांग्रेस मुखिया नवजोत सिंह सिद्धू भी सहम गए हैं। दरअसल, नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस का मुखिया बनने के दौरान इच्छा जताई थी कि वह प्रदर्शनकारी किसानों के पास जाना चाहते हैं। इस दौरान उन्होंने शायराना अंदाज में यह भी कहा था कि वह प्यासे हैं और किसान कुआं। कई महीने बीतने के बाद भी नवजोत सिंह सिद्धू किसानों के बीच नहीं गए। अब उन्हें डर लग रहा है कि किसानों के बीच जाने पर कहीं वह अपमानित न हो जाएं। बताया जा रहा है कि वाकपुट और चपल नवजोत सिंह किसी मंच पर जाएं और बिना बोलें वापस आ जाएं, यह मुमकिन नहीं है। ऐसे में नवजोत सिंह सिद्धू यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि वह किसानों के बीच जाएं तो जाएं कैसे? उनके करीबियों के मानें तो संयुक्त किसान मोर्चा अपने मंच का इस्तेमाल किसी भी राजनीतिक दल के नेता को नहीं करने दे रहा है, ऐसे में नवजोत सिंह सिद्घू का यह डर सता रहा है कि कहीं वह किसान के अपमान का शिकार न हो जाएं।

किसानों का ठोंग सरीखा लगता है राजनीतिक दलों के नेताओं का भाषण

गौरतलब है कि सीएम पद का ऐलान होने पर चरण जीत सिंह चन्नी ने कहा था कि जरूरत पड़ी तो वे अपना सिर काटकर किसानों को देंगे। चरणजीत सिंह चन्नी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अपनी पहली पत्रकारवार्ता के दौरान कहा था कि वह किसानों के लिए हर कुर्बानी देने को तैयार हैं। अगर जरूरत पड़ी तो वह अपना सिर काटकर भी उन्हें दे देंगे। इसके बाद अपनी विधानसभा चमकौर साहिब पहुंचे चरण जीत सिंह चन्ना ने अनाज मंडी में एक जनसभा में कहा था कि वह एक बार सिंघु बार्डर जाना चाहते हैं। जहां से कृषि कानूनों को लेकर संघर्ष किया जा रहा है। मैं उस जगह पर नतमस्तक होना चाहता हूं।