पांच सौ साल पहले उदयपुर के समोर बाग में स्थापित पुतली बता देती है कि पीछोला झील में कितना पानी


उदयपुर की पीछोला झील की पाल के नीचे बनी संगमरमर की पुतली ।
इतिहास में महाराणा उदयपुर सिंह ने अपनी उदयपुर को बनाया था। पीछोला को पाल के माध्यम से बांधकर उसे झील का रूप दिया गया। उसी दौरान उदयपुर के पैलेस तथा समोर बाग के नीचे भी महाराणाओं ने महल का निर्माण किया था और तभी पुतली का निर्माण भी कराया गया।

उदयपुर। जिस पीछोला झील के किनारे उदयपुर शहर की नींव रखी गई, उसमें कितना पानी है, इसकी जानकारी बड़ी पाल की तलहटी में लगी संगमरमर की प्रतिमा यानी 'पुतली' बता देती है। बिना बिजली और मोटर के संचालित इस पुतली के घड़े से पानी बहने लगे तो समझो झील लबालब होने जा रही है। पांच सौ पहले स्थापित इस तितली के रहस्य को देखकर हर कोई चौंक उठता है।

इतिहास की पुस्तकों में जिक्र है कि पीछोला बांध जिसे अब झील कहा जाता है कि पाल के नीचे समोर बाग मौजूद है। जहां वर्तमान में मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य महेंद्र सिंह मेवाड़ सपरिवार रहते हैं। पीछोला की पाल के नीचे संगमरमर की पुतली बनी हुई है। जो यह बताती है कि पीछोला में कितने फीट पानी मौजूद है। झील लबालब होने को होती है कि इस पुतली के घड़े से पानी बहना शुरू हो जाता है। जलस्तर उससे अधिक पहुंचने पर इस पुतली के पीछे से झरने के रूप में पानी बहने लगता है। फिलहाल तीन दिन में हुई अच्छी बारिश के चलते पीछोला झील लबालब होने को है और बड़ी पाल की तितली और झरने से पानी तेजी से बह रहा है।

इतिहास में इस बात का उल्लेख है कि 1568 में तत्कालीन महाराणा उदयपुर सिंह ने अपनी राजधानी उदयपुर को बनाया था। उसी दौरान पीछोला को पाल के माध्यम से बांधकर उसे झील का रूप दिया गया। उसी दौरान उदयपुर के पैलेस तथा समोर बाग के नीचे भी महाराणाओं ने महल का निर्माण किया था और तभी पुतली का निर्माण भी कराया गया।

स्थापत्य कला और तकनीक का अनूठा उदाहरण

समोर बाग की पुतली मेवाड़ में स्थापत्य कला और तकनीक का अनूठा उदाहरण है। बिना मोटर और बिजली के अपने-आप पुतली के मटके से पानी बहने लगता है। इसके पीछे पानी के दबाव से बिना मोटर के ही झरना शुरू हो जाता है। यह ना केवल मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि सज्जननिवास उद्यान यानी गुलाब बाग की सिंचाई के लिए भी उपयोगी होता था। पुतली और झरने से निकला पानी नहर के माध्यम से गुलाब बाग तथा कमल तलाई में पहुंचता है। झील भरने के साथ पुतली से अपने-आप पानी निकलने की पड़ताल कई बार की गई लेकिन यह रहस्य ही बना हुआ है। जब पीछोला का जलस्तर आठ फीट हो जाता है तो पुतली के मटके से पानी की धार गिरने लगती है। जलस्तर बढ़ने के साथ पानी का प्रवाह बढ़ने लगता है और झील ओवरफ्लो की स्थिति होने पर झरने से तेजी से पानी बहता है।

कहीं टूट ना जाए पीछोला की पाल

पुतली से पानी का बहाव हर साल बढ़ने पर मेवाड़ के पूर्व राजघराने के सदस्य विश्वराज सिंह मेवाड़ जो पाल के नीचे बने समोर बाग के पैलेस में सपरिवार रहते हैं, ने पाल के कमजोर होने की आशंका जताई है। वह बताते हैं कि पीछोला की पाल की मरम्मत की दरकार है। हर बार प्रशासन और नगर निकाय के अधिकारी पाल का निरीक्षण करने आते हैं और इसकी मरम्मत करने की दरकार महसूस करते हैं लेकिन मानसून की विदाई के साथ वह भी इस बात को भूल जाते हैं। यदि पीछोला की पाल ध्वस्त हो जाती है कि यह आधे उदयपुर के लिए खतरा बन सकती है। पूर्व में जब पीछोला की पाल टूट गई थी तब भी आधा उदयपुर डूब में आ गया था। विश्वराज सिंह मेवाड़ बताते हैं कि राज्य सरकार को भी इसकी जानकारी दी गई है।