गर्भावस्था में मां के अवसाद में रहने से बच्चे को भी खतरा, पढ़ें- अध्ययन में सामने आई अहम बात

 

गर्भावस्था में मां के अवसाद में रहने से बच्चे को भी खतरा, पढ़ें- अध्ययन में सामने आई अहम बात
टीम ने बताया कि 24 साल की माताओं के प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद की मानसिक स्थितियों का अध्ययन किया गया। इसमें जानकारी मिली कि जो महिलाएं अवसाद में थीं उनके बच्चों में सामान्य माताओं के बच्चों की तुलना में अवसाद का स्तर तीन अंक ज्यादा देखा गया।

लंदन, एएनआइ। गर्भावस्था के दौरान मां की स्थिति का बच्चे पर सीधा असर होता है। अब एक नई शोध में सामने आया है कि गर्भावस्था में अगर मां अवसाद (डिप्रेशन) में होती है, तो इससे बच्चे में भी अवसाद में होने का खतरा बना रहता है। इस संबंध में किए गए अध्ययन के नतीजे जर्नल बीजेपीसिक ओपन में प्रकाशित हुए हैं।

अध्ययन करने वाली टीम ने बताया कि 24 साल की माताओं के प्रसव पूर्व और प्रसव के बाद की मानसिक स्थितियों का अध्ययन किया गया। इसमें जानकारी मिली कि जो महिलाएं अवसाद में थीं, उनके बच्चों में सामान्य माताओं के बच्चों की तुलना में अवसाद का स्तर तीन अंक ज्यादा देखा गया।

इस अध्ययन में यह भी जानकारी मिली कि होने वाले बच्चे पर पिता के अवसाद में रहने का भी असर होता है। हालांकि पिता से आने वाले असर के अध्ययन में सैंपल सीमित संख्या में लिए गए थे।

अध्ययन 10 साल से 24 साल तक की उम्र तक के 5029 व्यक्तियों पर किया गया। अध्ययन में देखा गया कि इन 14 साल में बचपन और किशोरावस्था में अवसाद के जोखिम कैसे होते हैं। शोध में जानकारी मिली कि जिन महिलाओं में प्रसव के बाद अवसाद हुआ, उनके बच्चों में समय के साथ इसके लक्षण प्रकट हुए। जो महिलाएं प्रसव से पहले ही अवसाद में थीं, उनके बच्चों में अवसाद का स्तर पूरा था। इस शोध के परिणामों को मानचेस्टर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने भी समर्थन दिया है।

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रायल कालेज आफ साइकियाट्रिस्ट के डा. जोआन ब्लैक ने कहा कि यह अध्ययन मां और पिता दोनों के ही मानसिक स्वास्थ्य के बच्चों पर पड़ने वाले असर को देखता है। अध्ययन बताता है कि माता-पिता दोनों के अवसाद की स्थिति का होने वाले बच्चे पर असर पड़ता है।