उम्मीद के साथ बढ़ते रहें आगे, सकारात्मक सोच के साथ रखें इनोवेटिव अप्रोच

 

उम्मीद के साथ बढ़ते रहें आगे, सकारात्मक सोच के साथ रखें इनोवेटिव अप्रोच।

इंटरनेट की दुनिया में पल-पल चीजें बदलती रहती हैं। बाजार से लेकर ग्राहकों की मांग में भी नियमित परिवर्तन आते रहते हैं। इसलिए हर स्तर पर सकारात्मक सोच के साथ इनोवेटिव अप्रोच रखना पड़ता है। आज पठन-पाठन से लेकर परीक्षाएं तक आनलाइन होने लगी हैं।

नई दिल्ली। टेक्नोलाजी के जरिये स्टूडेंट्स को पर्सनलाइज्ड एजुकेशन उपलब्ध कराने के विजन के साथ अभिषेक पाटिल एवं उनके पार्टनर ने आलिव बोर्ड आनलाइन प्लेटफार्म लांच किया था। आज 8 लाख से अधिक रजिस्टर्ड यूजर्स के साथ बेंगलुरु स्थित यह एडुटेक स्टार्टअप देश के 2500 से अधिक शहरों के स्टूडेंट्स को बैंकिंग, इंश्योरेंस एवं अन्य सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली परीक्षाओं की तैयारी में मदद कर रहा है। आलिव बोर्ड के सह-संस्थापक एवं सीईओ अभिषेक पाटिल मानते हैं कि जिस काम से समाज में प्रभावशाली बदलाव आए, उसी से संतुष्टि मिलती है। इसलिए कभी निराश नहीं होना चाहिए, उम्मीद नहीं टूटने देनी चाहिए। हाल ही में कंपनी ने प्री-सीरीज ए फंडिंग के तहत 23 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

अभिषेक एक कारोबारी परिवार से आते हैं। पिता जी का होटल, फिल्म प्रोडक्शन समेत कई प्रकार का कारोबार था। इनकी भी ख्वाहिश हमेशा एक उद्यमी बनने की ही रही। लक्ष्य स्पष्ट था, इसलिए बेंगलुरु से टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग करने के बाद इन्होंने करीब दो वर्ष उनके साथ काम का अनुभव हासिल किया। इस दौरान बिजनेस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार देने की कोशिश रही। इसके बाद वह अमेरिका की नोट्रेडेम यूनिवर्सिटी से एमबीए करने चले गए। वहां से लौटने पर करीब दो वर्ष इनमोबी कंपनी में बतौर स्ट्रेटेजी ऐंड एनालिसिस हेड काम किया। वह बताते हैं, 'अलग-अलग प्रकार के कार्य अनुभव से मुझमें इतना आत्मविश्वास आ गया था कि एक नई शुरुआत कर सकूं। इसके बाद अपने पूर्व सहकर्मी वी सतीश के साथ मिलकर हमने आलिव बोर्ड डाट काम लांच किया।'

छात्रों को क्वालिटी कंटेंट देना है उद्देश्य

एक अनुमान के अनुसार, सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने वाले आनलाइन प्लेटफार्म की संख्या दिनोंदिन विस्तार पा रही है। खासकर कोरोना काल में इसका बाजार और व्यापक हुआ है। टियर दो एवं तीन शहरों में इंटरनेट कनेक्टिविटी के बेहतर होने से अधिकाधिक विद्यार्थी आनलाइन प्लेटफार्म की मदद से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। अभिषेक बताते हैं, ‘मुझे शुरू से एजुकेशन स्पेस में दिलचस्पी थी। मैं उन स्टूडेंट्स के लिए कुछ करना चाहता था जो दूर-दराज के इलाकों से क्वालिटी एजुकेशन व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए शहर आते हैं जबकि आज पठन-पाठन से लेकर परीक्षाएं तक आनलाइन होने लगी हैं।

शुरुआत में मार्केट अध्ययन के दौरान हमने भी पाया था कि परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोई आनलाइन प्लेटफार्म नहीं था। हमने एक प्रयोग किया। सबसे पहले सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स एवं कंटेंट को स्केल करने की चुनौती सामने आई। अब हमारी इनहाउस एकेडमिक टीम है, जो कंटेंट तैयार करती है। स्टूडेंट्स हमारे प्लेटफार्म पर मौजूद वीडियो लेक्चर्स, लाइव ग्रुप प्रैक्टिस सेशंस, कस्टमाइज्ड स्टडी प्लानर्स, आल इंडिया टेस्ट सीरीज से भी मदद ले सकते हैं।‘

खुद पर विश्वास होना जरूरी

इंटरनेट की दुनिया में पल-पल चीजें बदलती रहती हैं। बाजार से लेकर ग्राहकों की मांग में भी नियमित परिवर्तन आते रहते हैं। इसलिए हर स्तर पर सकारात्मक सोच के साथ इनोवेटिव अप्रोच रखना पड़ता है। अभिषेक ने बताया कि कैसे एक समय उन्हें लगा कि बिजनेस में मनमुताबिक नतीजे नहीं मिल रही थीं। मन में इसे बंद करने तक का खयाल आया था। डेडलाइन भी निर्धारित कर ली। हालांकि उम्मीद नहीं टूटने दी। कंपनी के बीटुबी बिजनेस माडल में परिवर्तन लाया और आखिरकार आगे बढ़ने में सफल रहे। दरअसल, पारिवारिक बिजनेस संभालने के कारण अभिषेक को अपनी कमजोरियों से निपटना आ गया था। उन्होंने नये प्रयोग किए, जो सफल रहे। वह कहते हैं, ‘एजुकेशन के क्षेत्र में वैसे ही कड़ी प्रतिस्पर्धा है। ऐसे में अपने ऊपर विश्वास, जुनून एवं जिद ही हमें मार्केट में स्थापित करता है। हम वहीं करते हैं, जो हमारा दिल करता है।‘