दिल्ली पुलिस का एक सिपाही गरीब बच्चों में जगा रहा शिक्षा की लौ, वर्दी का फर्ज निभाने के बाद लगाते हैं पाठशाला


50 से अधिक झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चे लेते हैं कक्षा, बच्चों को देते हैं पाठ्यक्रम सामग्री
ऐसा ही काम दिल्ली पुलिस का एक सिपाही इन दिनों लाल किले की प्राचीर में कर रहा है जो पार्किंग के अंदर गरीब असहाय और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को शिक्षा दे रहा है। वह रोजाना 50 से अधिक बच्चों के अंदर शिक्षा की अलख जगा रहा है।

नई दिल्ली। यू ही नहीं देशभर में दिल्ली पुलिस को दिल की पुलिस कहा जाता है। दरअसल समय-समय पर पुलिस के अधिकारी और उसके जवान ऐसा नेक काम करते रहते हैं, जिससे वह लोगों का दिल जीत लेते हैं। ऐसा ही काम दिल्ली पुलिस का एक सिपाही इन दिनों लाल किले की प्राचीर में कर रहा है, जो पार्किंग के अंदर गरीब, असहाय और झुग्गी झोपड़ी में रहने वाले बच्चों को शिक्षा दे रहा है। वह रोजाना 50 से अधिक बच्चों के अंदर शिक्षा की अलख जगा रहा है। इसके अलावा वह दिन में अपनी ड्यूटी कर वर्दी का फर्ज भी पूरी तरह से निभाते हैं। वहीं उत्सवों के दौरान बच्चों को उपहार भी देते हैं, जिससे उनके चेहरों पर मुस्कान आती है।

मूलरूप से राजस्थान के भरतपुर के रहने वाले 33 वर्षीय थान सिंह इन दिनों निहाल विहार दिल्ली में रहते हैं। उनका कहना है कि वह वर्ष 2010 में दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुए थे। उससे पहले वह मीराबाग की झुग्गी बस्ती में रहते हुए कपड़ों पर प्रेस, होटल में वेटर और बसों में भूट्टे बेच चुके हैं। उन्होंने कहा कि घर के अंधेरे में रहकर शिक्षा प्राप्त की है, जिसके लिए उनके माता-पिता ने बहुत मेहनत की है। थान सिंह का कहना है कि वह किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं देखना चाहते थे और ये उनका एक सपना है। ऐसे में वह जब लाल किले पर ड्यूटी के लिए तैनात किए गए तो देखा कि आसपास के इलाके में बहुत मजदूर रहते हैं, जिनके बच्चे भी उनके साथ मजदूरी करते हैं। करीब छह साल पहले उन्होंने ड्यूटी के बाद बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। इसके बाद धीरे-धीरे बच्चों की संख्या बढ़ती रही और उन्हें पढ़ाने के लिए जगह की तलाश करनी पड़ी।

लाल किले की पार्किंग में लगती है पाठशाला

थान सिंह ने बताया कि जब उनके पास 20 बच्चे हो गए तो वह उन्हें शाम के वक्त लाल किले स्थित सुनहरी मस्जिद के पास बनी पार्किंग में लेकर पढ़ाने लगे। अब धीरे धीरे बच्चों की संख्या बढ़ गई है तो बच्चों को पार्किंग के अंदर ही बने मंदिर में पढ़ा रहे हैं, जिसमें पुलिस समेत अन्य विभागों के अफसर उनकी मदद भी कर रहे हैं। वहीं, अब 50 से अधिक बच्चों को पढ़ाने के लिए पुलिस अधिकारियों की पत्नियां व अन्य परिवार के सदस्य भी सामने आने लगे हैं। वह भी बच्चों के लिए आर्थिक मदद करते हैं।

अपने वेतन से 10 हजार रुपये बच्चों पर करते हैं खर्च

उन्होंने कहा कि वह अपने वेतन में से करीब 10 हजार रुपये बच्चों की शिक्षा पर खर्च करते हैं, जिसमें वह बच्चों को बेग, पुस्तक, कापी, पेंसिल समेत अन्य पाठ्य सामग्री मुहैया कराते हैं। वहीं, पाठशाला में आने वाले अतिथि भी बच्चों के लिए पाठ्य सामग्री और उनके खाने पीने की वस्तुएं भी लेकर आते हैं। सिपाही ने बताया कि वह जब ड्यूटी पर अधिक व्यस्त रहते हैं तो उन्हें पढ़ाने के लिए एक अंकिता शर्मा नाम की शिक्षिका भी रहती है, जो बच्चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान समेत अन्य विषयों की पढ़ाई कराती हैं।