सीतामढ़ी के बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब मछली पालन से किसानों को होगी बेहतर आमदनी

 

सीतामढ़ी़ में मछली पालन की ट्रेन‍िंंग ले रहे बाढ़़ प्रभाव‍ित क‍िसान। प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर
सीतामढ़ी जिले के पुपरी में कार्प मछली पालन को लेकर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण शुरू वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन एवं मछली बीज उत्पादन की शुरुआत की जाए तो किसान हर साल बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

सीतामढ़ी,सं। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रशिक्षण सभागार में कार्प मछली पालन को लेकर पांच दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण की शुरुआत वरीय वैज्ञानिक डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कि यह जिला बाढ़ प्रभावित होने के कारण जहां खरीफ फसलों को नुकसान होते रहता है। वहीं वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन एवं मछली बीज उत्पादन की शुरुआत की जाए तो किसान हर साल बेहतर आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

एक एकड़ के तालाब से 4 से 5 लाख रुपये की शुद्ध आमदनी हो सकती है। उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार ने मछली पालन के अलावा तालाब में बत्तख पालन और खेत के मेड़ पर पूरे साल सब्जी की खेती कर अतिरिक्त लाभ प्राप्त करने की जानकारी दी। बताया कि बत्तख पालन से दो प्रकार के लाभ मिलते हैं। इनमें पहला अंडा उत्पादन और दूसरा तालाब में मछलियों के लिए पोषण की गुणवत्ता को बढ़ाना। पोषण की गुणवत्ता बढऩे से मछलियों में रोग की संभावना कम होती है और उत्पादन में वृद्धि होती है।

कोर्स कोर्डिनेटर सह मत्स्य सहायक प्रकाश चंद्रा ने बेहतर मछली पालन के लिए भोजन प्रबंधन एवं रोग प्रबंधन पर जानकारी दी। बेहतर व संतुलित भोजन आपूर्ति के लिए नियमित रूप से तालाब में चूना, गोबर की खाद, यूरिया, सिंगल सुपर फॉस्फेट, चावल की भूसी, सरसों की खल्ली का प्रयोग करने को कहा। मछली उत्पादन के लिए नए तालाब का निर्माण करने वाले किसानों को मिट्टी के प्रकार, तालाब के पानी का पीएच मान, बांध की चौड़ाई, स्थायी जल स्रोत की सुविधा, तालाब के तलहटी का ढलुआ रखने को कहा। मौके पर मौसम वैज्ञानिक रंधीर कुमार समेत दो दर्जन किसानों ने भाग लिया।

जलस्तर में कमी के बावजूद लहुरिया मदरसा के समीप एक फीट पानी हो रहा बहाव

परिहार। प्रखंड के लहुरिया गांव के लोग बाढ़ की त्रासदी झेलने को विवश हैं। लहुरिया के अलावा सुतिहारा, खुरसाहा, बारा, बंसबरिया आदि गांव में भी बाढ़ से व्यापक क्षति हुई है। प्रखंड से गुजरने वाली मरहा एवं हरदी नदी के जलस्तर में काफी कमी आई है। इसके बावजूद लहुरिया मदरसा के समीप सड़क पर करीब 1 फीट पानी का तेज बहाव हो रहा है। सड़क पर पानी कम होने के बाद आवागमन चालू हो गया है, लेकिन जोखिम बरकरार है। बता दें कि करीब 2 माह पूर्व हरदी नदी ने धारा बदल कर लहुरिया, खुरसाहा की तरफ रुख कर लिया था। जिस कारण बाढ़ की त्रासदी झेलना इन गांव के लोगों की नियति बन गई।

नदी के जलस्तर में कमी के बावजूद गांव के वार्ड नंबर 4, 5 एवं 6 में लोग जल जमाव का सामना करने को विवश हैं। नदी की धारा मुडऩे के बाद कई एकड़ जमीन नदी में विलीन हो गया। दर्जनों एकड़ उपजाऊ भूमि इन में नदी में रेत भर दिया। कई एकड़ में लहलहा रही फसल बाढ़ के पानी की आगोश में चला गया। ग्रामीण संजीव कुमार ने बताया कि पानी बढ़ते ही परवाहा - लालबंदी पथ पर आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। लोगों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर जिला एवं प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है। मोहम्मद ज्याउल ने बताया कि बीते 28 अगस्त की रात वार्ड नंबर 5 निवासी रजाउल मुस्तफा का घर बाढ़ एवं बारिश के कारण गिर गया। फिलहाल वह दूसरे के घर में शरण लिए हुए हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं की गई।