क्‍या है निपाह वायरस, जिससे केरल में हुई है एक बच्‍चे की मौत, सिर्फ सावधानी ही है बचाव

 

चमगादड़ों और सूअरों के जरिए फैलता है निपाह वायरस
निपाह वायरस से भारत में एक 12 वर्षीय बच्‍चे की मौत हो चुकी है। इसके बाद ये जरूरी हो जात है कि हम ये जान लें कि आखिर ये जानलेवा वायरस है क्‍या और इससे कैसे बचा जा सकता है।

नई दिल्‍ली। केरल में जानलेवा निपाह वायरस की चपेट में आए 12 वर्षीय एक बच्‍चे की मौत हो गई है। केरल के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री वीणा जार्ज ने इसकी जानकारी दी है। इस बच्‍चे के खून के नमूने को पुणे की नेशनल इंस्टिट्यूट आफ वीरोलाजी भेजा गया था, जिसके बाद इसमें निपाह वायरस की पुष्टि हुई थी। इसके बाद केंद्र की तरफ वहां पर नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल की एक टीम को रवाना कर दिया गया है। इस बीच ये जानना बेहद जरूरी है कि आखिर ये वायरस क्‍या है और कैसे फैलता है। आपको ये भी बता दें कि इस वक्‍त केरल कोरोना महामारी की मार झेल रहा है। कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक मामले भी केरल से ही आ रहे हैं। ऐसे में निपाह वायरस का यहां पर मिलना एक खतरनाक संकेत हो सकता है। ये काफी कुछ कोरोना वायरस से ही मिलता जुलता है।

आपको बता दें कि निपाह वायरस एक तरह का नया वायरस है जो जानवरों के जरिए इंसानों में बड़ी तेजी से फैलता है। ये एक वायरल संक्रमण होता है। इसका परिणाम काफी गंभीर हो सकता है। अफसोस की बात ये है कि इसका एक कारगर इलाज फिलहाल हमारे पास नहीं है। इसकी वैक्‍सीन और दवा बनाने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक कड़ी मेहनत कर रहे हैं। ये वायरस सबसे पहले मलेशिया के काम्पुंग सुंगई निफा के इलाके में पाया गया था। इसके बाद बांग्‍लादेश और भारत में भी इसके मामले सामने आए थे। इस वायरस को निप्‍स के नाम से भी जाना जाता है।

कैसे फैलता है ये वायरस

आपको बता दें कि निपाह वायरस संक्रमित चमगादड़ों और सूअर के संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित इंसान के किसी दूसरे व्‍यक्ति के संपर्क में आने पर इसका प्रसार होता रहता है। मलेशिया में इसका मामला सामने आने की वजह सूअर ही था। वहीं सिंगापुर में ये चमगादड़ों से फैला था। भारत और बांग्‍लादेश में भी इसकी यही वजह रही है। यदि इस वायरस से संक्रमित चमगादड़ किसी भी फल को खाता है तो ये वारयस उस फल के जरिए इंसानों तक पहुंच जाता है।

ये हैं इसके लक्षण

  • इस वायरस से संक्रमित व्‍यक्ति को बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश होना और उल्‍टी होना, चक्‍कर आना, एटिपिकल निमोनिया होता है।

क्‍या बरतें सावधानी

  • इस वायरस का इलाज फिलहाल नहीं मिल सका है, इसलिए सावधानी ही इसका एकमात्र इलाज है।
  • फलों को खरीदते और खाते समय पूरी सावधानी बरतें
  • चमगादड़ों और सुअरो के संपर्क में आने से बचें।
  • संक्रमित व्‍यक्ति के संपर्क में आने से बचें।
  • इसके प्रति जितना अधिक हो सके लोगों को जागरुक करें।
  • मुंह पर मास्‍क लगाएं और हाथों को कुछ-कुछ समय के बाद साबुन या सेनेटाइजर से साफ करते रहें।
  • लक्षण दिखाई देने पर मरीज को तुरंत एहतियात के साथ अस्‍पताल लेकर जाएं या डाक्‍टर की सलाह लें।