आप जानते हैं राकेश टिकैत की उस कसम के बारे में, जिसकी वजह से घर नहीं जा पा रहे

 

Rakesh Tikait News: आप जानते हैं राकेश टिकैत की वह कसम, जिसकी वजह से घर नहीं जा पा रहे

मुजफ्फरनगर में रविवार को आयोजित किसान महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश अपने भाई भाकियू अध्यक्ष राकेश टिकैत के साथ मंच भी साझा करेंगे। मुजफ्फरनगर राकेश टिकैत का गृह जिला है लेकिन वह अपने घर पर नहीं जाएंगे। एक कसम उन्हें इससे रोक रही है।

नई दिल्ली/गाजियाबाद,डिजिटल डेस्क। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर रविवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में किसान की महापंचायत होगी। यह महापंचायत मुजफ्फरनगर के जीआइसी कालेज में होगी, इस दौरान भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश अपने भाई भाकियू अध्यक्ष राकेश टिकैत के साथ मंच भी साझा करेंगे। मुजफ्फरनगर राकेश टिकैत का गृह जिला है, लेकिन वह अपने घर पर नहीं जाएंगे। राकेश टिकैत को  घर जाने से एक कसम रोक रही है।

दरअसल, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत किसान आंदोलन शुरू होने के बाद अपने गृह जिले मुजफ्फरनगर नहीं गए हैं और घर पर जाने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता है। राकेश टिकैत ने आंदोलन शुरू होने के दौरान ही घोषणा की थी कि जब तक तीनों केंद्रीय कृषि कानून पूरी तरह से वापस नहीं होंगे उनकी घर वापसी नहीं होगी।

9 महीने से नहीं तोड़ी है कसम

26 नवंबर, 2020 यानी जब तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन शुरू हुआ है, राकेश टिकैत अपने घर नहीं गए हैं। यह अलग बात है कि उनके परिवार के सदस्य कई यूपी गेट पर प्रदर्शन स्थल पर आ चुके हैं। गौरतलब है कि यूपी गेट पर चल रहे किसानों के धरने प्रदर्शन की अगुवाई राकेश टिकैत ही कर रहे हैं। यह अलग बात है कि राष्ट्रीय स्तर का किसान नेता बनने के बाद राकेश टिकैत देशभर विभिन्न राज्यो में रैली कर किसानों को कृषि कानूनों के अवगुण बता रहे हैं। नवंबर-दिसंबर में ही राकेश टिकैत ने प्रण ले लिया था- 'जब तक कानून वापसी नहीं, तब तक घर वापसी नहीं।' यही वजह है कि आंदोलन शुरू होने के बाद आज तक राकेश टिकैत घर छोड़िये मुजफ्फरनगर जिले की सीमा तक में नहीं गए। हालांकि, रविवार को मुजफ्फरनगर में बुलाई गई महापंचायत में जरूर पहुंचेंगे, लेकिन अपने घर नहीं जाएंगे।

परिवार मिलने आएगा महापंचायत में

बताया जा रहा है कि मुजफ्फरनगर में आयोजित किसान महापंचायत के बाद उनके परिवार के कुछ लोग राकेश टिकैत से मिलने आएंगे। इनमें उनकी बेटियां शामिल हो सकती हैं, लेकिन राकेश टिकैत अपनी कसम की वजह से घर पर नहीं जाएंगे। 

गौरतलब है कि कहने तो भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बड़े भाई राकेश टिकैत हैं, लेकिन पिता महेंद्र सिंह टिकैत की किसान राजनीति की असली विरासत राकेश टिकैत ही संभाल रहे हैं। इसमें कोई शक नहीं है कि नवंबर 2020 में जब तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली-एनसीआर के तमाम बार्डर पर किसानों के आंदोलन की शुरुआत हुई, तब राकेश टिकैत की भूमिका सिर्फ यूपी गेट पर प्रदर्शन की अगुवाई तक सीमित थी। उन पर विपक्षी दलों से मिलीभगत के आरोप तक लगे थे, जो अब तक लग रहे हैं।