लाकडाउन में छूटी नौकरी तो मां-बेटी ने बनाना शुरु किया केक, अब हो रही अच्छी इनकम; खूब मिल रहे आर्डर


थमी जिंदगी तो मां-बेटी के हुनर ने दी परवाज

जहां चाह-वहां राह की कहावत को साकार किया है जीवन नगर में आंध्रा बैंक वाली गली में किराए के मकान में रहने वाली साम्या ने। साम्या की कहानी शुरू होती है 2020 के लाकडाउन से। लाकडाउन में बंदी के चलते पूरा परिवार घर पर था।

सोनीपत । लाकडाउन में शिक्षिका मां की नौकरी छूटी और पिता का कारोबार ठप हुआ तो 16 साल की साम्या ने पतवार संभाल ली। कक्षा 11 की छात्रा ने घर से ही केक बनाने का काम शुरू किया तो जिंदगी फिर से पटरी पर लौट आई। कठिन दौर में यू-ट्यूब से सीखे गए बेटी के हुनर ने परिवार को विकट स्थिति से उबार लिया। आजकल होम मेड केक लोगों को पसंद आ रहा है। इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सएप से उनको आर्डर मिल रहे हैं। रात में केक बनाने और दिन में डिलीवरी ब्वाय से सप्लाई कराकर अभी तक वह केवल शहर के आर्डर ही स्वीकार कर रही हैं। वहीं लड़कियों के लिए प्रेरणा बनीं मां-बेटी आनलाइन केक बनाना भी सिखा रही हैं।

जहां चाह-वहां राह की कहावत को साकार किया है जीवन नगर में आंध्रा बैंक वाली गली में किराए के मकान में रहने वाली साम्या ने। साम्या की कहानी शुरू होती है 2020 के लाकडाउन से। छंटनी के नाम पर स्कूल से उनकी शिक्षिका मां ऋतु अरोड़ा को अवकाश पर भेज दिया गया तो जूतों के बड़े कारोबारी उसके पिता आशीष अरोड़ा को लाखों का नुकसान उठाना पड़ा।

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लाकडाउन में बंदी के चलते पूरा परिवार घर पर था। ऐसे में छोटे भाई चिन्मय के जन्मदिन पर केक की जरूरत पड़ी, लेकिन सब बंद था। साम्या ने यू-ट्यूब देखकर केक बनाया तो वह सभी को पसंद आया। उसके बाद साम्या ने घर पर केक बनाकर स्टार्टअप शुरू किया। वह यू-ट्यूब पर तरह-तरह के केक बनाना सीखती और घर पर उसे बनाने की प्रैक्टिस करती।

चल निकला होम मेड केक

बेकारी और आर्थिक बदहाली झेल रहे परिवार को संभालने की दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए साम्या ने लाकडाउन में थोड़ी छूट मिलते ही आनलाइन आर्डर पर केक बनाने का सामान मंगवा लिया। साम्या ने बताया कि पहले सप्ताह में तीन परिचितों के केक बनाने के आर्डर मिले। उसके बाद जिसने खाया, उसने ही तारीफ की। एक से दूसरे में होता हुआ सौम्या का होम मेड केक का काम चल निकला। उसके बाद इंस्टाग्राम, फेसबुक और वाट्सएप पर उसने अपने बनाए केक की तस्वीर पोस्ट कीं। लोगों के आर्डर आने लगे।

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काम बढ़ा और आमदनी हुई तो ऋतु अरोड़ा भी बेटी के साथ मिलकर केक बनाने लगीं। शुरू में लोग उनके घर से आकर केक ले जाते। काम बढ़ा तो उन्होंने एक डिलीवरी ब्वाय रख लिया। आजकल रोजाना 15-20 केक के आर्डर मिल रहे हैं।

बना रहीं 12 तरह के केक

साम्या के गुणवत्तायुक्त केक का स्वाद लोगों को पसंद आ रहा है। स्वच्छता से बनाया गया केक बाजार से सस्ता मिलने के चलते पार्टियों में छाया हुआ है। मां-बेटी रात को केक बनाती हैं और सुबह से सप्लाई का काम शुरू होता है। कोई खुद आकर ले जाता है तो किसी के घर पर पहुंचावाना पड़ता है। वह 12 तरह का केक बना रही हैं। सबसे ज्यादा मांग चाकलेट, ओरियो, व्हाइट फारेस्ट, पाइन एप्पल, फास्ट फूड, किट-कैट केक, सूरजमुखी केक, फ्लावर केक और कप केक की है। आजकल वह लड़कियों को आनलाइन केक बनाने का प्रशिक्षण भी देने लगी हैं।

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डिजिटल द्रोणाचार्य की एमडी गौरी कपूर ने बताया कि साम्या और उनकी माता ऋतु अरोड़ा के बनाए केक की मांग बहुतायत में है। हम उनकी आनलाइन मार्केटिंग का काम कर रहे हैं। उनको लगातार आनलाइन आर्डर मिल रहे हैं। कक्षा 11 की छात्रा ने दृढ़ इच्छाशक्ति से होम मेड केक का काम शुरू किया है। लाकडाउन के बाद की स्थिति का मुकाबला करने का यह सकारात्मक उदाहरण है।