भजनपुरा इलाके की दुकानों में चोरी व तोड़फोड़ के मामले में पुलिस दायर करेगी अलग-अलग आरोप पत्र

 

दिल्‍ली दंगे के दौरान भजनपुरा इलाके की दुुकानों में आगजनी

दिल्ली दंगे के दौरान भजनपुरा इलाके की दुकानों में चोरी और तोड़फोड़ की कई शिकायतों को मिलाकर एक प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर कोर्ट की आपत्ति पर पुलिस ने अलग-अलग आरोपपत्र दायर करने का फैसला किया है। कोर्ट नेे जताई थी आपत्ति

नई दिल्‍ली,  संवाददाता। दिल्ली दंगे के दौरान भजनपुरा इलाके की दुकानों में चोरी और तोड़फोड़ की कई शिकायतों को मिलाकर एक प्राथमिकी दर्ज करने को लेकर कोर्ट की आपत्ति पर पुलिस ने अलग-अलग आरोपपत्र दायर करने का फैसला किया है। गत वर्ष भजनपुरा में सी, डी और ई-ब्लाक में अलग-अलग तारीखों दंगाइयों ने चोरी के बाद दुकानों में तोड़फोड़ की थी। पुलिस ने ऐसी पांच घटनाओं को साथ जोड़कर एक प्राथमिकी दर्ज की थी। बाद में एक ही आरोपपत्र दायर किया था।

इस पर आरोपित नीरज उर्फ काशी और मनीष को गिरफ्तार किया गया था। आरोपपत्र में इन पर आगजनी का आरोप भी लगाया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट ने पिछले दिनों इस मामले में सुनवाई करते हुए दोनों आरोपितों को आगजनी के आरोप से यह कहते हुए मुक्त कर दिया था कि शिकायतकर्ताओं ने अपनी मूल शिकायत में आगजनी का जिक्र नहीं किया है।

दंगा करने, घातक हथियारों का इस्तेमाल करने, गैर कानूनी समूह में शामिल होने, जबरन घुसना और चोरी करने के आरोपों पर सुनवाई के लिए इस मामले को मुख्य महानगर दंडाधिकारी के कोर्ट में भेज दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया था कि इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग तारीखों की घटनाओं को एक साथ जोड़ कर प्राथमिकी दर्ज की थी। इस पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली प्रश्न चिह्न लगाया था। इस पर पुलिस ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर बताया कि अलग-अलग तारीखों की शिकायतों को अलग किया जाएगा। सबकी जांच अलग की जाएगी। फिर आरोप पत्र दायर किए जाएंगे।

दंगे के डेढ़ साल बाद गिरफ्तार हुए आरोपित

कड़कड़डूमा कोर्ट ने प्रिंस कुमार को जमानत देने से इन्कार कर दिया। मुख्य महानगर दंडाधिकारी के कोर्ट ने कहा कि आरोपित के खिलाफ तीन गवाहों ने बयान दिया है। वीडियो से उसकी पहचान की गई है। बार-बार दबिश देने पर आरोपित पुलिस के हाथ नहीं लग रहा था। ऐसी स्थिति देखते हुए उसे जमानत देना उचित नहीं है। प्रिंस पर दंगा करने, गैर कानूनी समूह में शामिल होने, जबरन घुसने और चोरी करने का आरोप है।