मेरठ पहुंचा शहीद मेजर मयंक का पार्थिव शरीर, सांसद ने पिता को दी सांत्‍वना

 

दुश्मन की गोली रोक नहीं पाई थी मेजर मयंक के फौलादी इरादे।
 बीती 27 अगस्त को मुठभेड़ में मेजर मयंक को लगी थीं कई गोलियां ऊधमपुर के सैनिक अस्पताल में उपचार के दौरान ली थी आखिरी सांस। शहीद का पार्थिव शरीर उनके पैतृक घर कंकरखेड़ा मेरठ लाया गया।

मेरठ,  संवाददाता।जम्मू-कश्मीर के शोपियां में आतंकियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए मेरठ के कंकरखेड़ा निवासी मेजर मयंक विश्नोई का पार्थिव शरीर उनके कंकरखेड़ा स्थित शिवलोकपुरी कालोनी में घर पर पहुंचा। करीब एक, सवा घंटे बाद शहीद मेजर की शव यात्रा सूरजकुंड श्मशान घाट को रवाना होगी। यह जानकारी शहीद मेजर बैंक बिश्नोई के जीजा मुरादाबाद निवासी जगत गुप्ता ने दी है। स्वजन ने पूरे कार्यक्रम के बारे में पुलिस और जिला प्रशासनिक अधिकारियों को भी बता दिया है। शाम को करीब चार बजे शहीद मेजर मयंक विश्‍नोई का पार्थिव शरीर मेरठ में उनके घर पहुंचा। इस बीच सांसद राजेंद्र अग्रवाल शहीद के पिता को सांत्‍वना देने के लिए उनके घर पहुंचे।

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आतंकियों से किया मुकाबला

गौरतलब है कि कई गोली लगने के बाद भी मेजर मयंक आंतकियों से मुकाबला करते रहे। बाद में उन्हें अस्पताल लाया गया। शुक्रवार देर रात वह वीरगति को प्राप्त हो गए। शहीद मेजर की दोनों बहनों ने बताया कि राष्ट्रीय रायफल्स (आरआर) में तैनात मेजर मयंक को 27 अगस्त को शोपियां में आतंकियों के होने की सूचना मिली। इस पर मेजर मयंक अपनी टुकड़ी को लेकर पहुंचे, जहां आतंकियों से मुठभेड़ में मेजर मयंक के सिर समेत शरीर के कई हिस्सों में गोली लगी थी। बताया कि मुठभेड़ में आतंकी भी ढेर हुए थे।

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2013 में बने थे अफसर

कंकरखेड़ा की शिवलोकपुरी कालोनी निवासी रिटायर्ड सूबेदार वीरेंद्र विश्नोई के बेटे मयंक विश्नोई 2013 में आइएमए देहरादून से पास आउट हैं। लेफ्टिनेंट बनने के बाद मयंक कई यूनिटों में तैनात रहे। मयंक की बहन तनु और अनु विश्नोई के अनुसार 2019 में मयंक प्रमोशन पाकर मेजर बने थे। मेजर की पहली पोस्‍टिंग 44 आरआर में हुई। वर्तमान में तैनाती जम्मू कश्मीर के शोपियां में थी। आरआर में दो वर्ष की ड्यूटी हो चुकी थी, एक वर्ष बाद आरआर से वापस अपनी यूनिट में तैनाती मिलनी थी।

भैया को देखने रविवार को अस्पताल जाना था

शहीद मेजर मयंक की बहन मुरादाबाद निवासी तनु और साहिबाबाद निवासी अनु ने बताया कि रविवार को ऊधमपुर अस्पताल में अपने भाई को देखने जाना था, जिसके लिए दोनों बहनें शुक्रवार शाम को ही कंकरखेड़ा घर पर आ गई थी। मगर, शुक्रवार रात करीब डेढ़ बजे सेना के अफसर ने फोन पर सूचना दी कि घायल मेजर मयंक विश्नोई शहीद हो गए हैं। उसके बाद से बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल सहित कई भाजपा नेता व क्षेत्रवासी शहीद के घर पहुंचे और सांत्वना दी।

18 अप्रैल 2018 को हुई थी शादी

मेजर मयंक विश्नोई 18 अप्रैल 2018 को हिमाचल प्रदेश के सुजानपुर टीला निवासी स्वाति संग विवाह के बंधन में बंधे थे। 14 अप्रैल को मेजर एक माह के अवकाश पर घर आए थे। इसी दौरान मेजर के पिता वीरेंद्र कुमार विश्नोई, माता मधु विश्नोई और पत्नी स्वाति कोरोना पाजिटिव हो गए थे। मेजर ने सभी की देखभाल की और उपचार कराने के बाद सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके 13 मई को मेजर मयंक पत्नी संग ससुराल हिमाचल प्रदेश पहुंचे। वहां पत्नी को छोड़कर ड्यूटी पर चले गए थे।