बंद नहीं होगा दिल्ली स्थित अफगानी बच्चों का स्कूल, मिली मदद

 

सरहद नाम की संस्था ने अफगानिस्तान के लगभग 1000 बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया है।
दिल्ली के भोगल इलाके में जमाल-अल-दीन अफगानी नामक यह अफगान स्कूल है। इस समय यहां कक्षा 1 से 12वीं तक के लगभग 550 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल में अफगानिस्तान बोर्ड के तहत ही पढ़ाई होती है। अब तक वित्तीय सहायता अफगानिस्तान सरकार देती थी।

नई दिल्ली। ख़ुशी खिलौना खेलने से नहीं मिलती है। ख़ुशी स्कूल के दोस्तों के साथ खेलने से मिलती है। जागरण डॉट कॉम ने भी अपनी खबर के जरिए कई बच्चों की खुशी लौटा दी है। दरअसल अफगानिस्तान में बदले हालात का सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों की जिंदगी पर पड़ा है। दिल्ली में अफगानिस्तान सरकार की मदद से चल रहे अफगानी बच्चों के स्कूल जमाल-अल-दीन पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे थे। अफगान सरकार से मदद न मिलने से ये स्कूल बंदी की कगार पर था। इस स्कूल और यहां पढ़ने वाले लगभग 550 बच्चों के भविष्य को खतरे में देखते हुए जागरण डॉट कॉम ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। जागरण डॉट कॉम के सकारात्मक प्रयास परिणाम सामने आए हैं। पुणे की एक गैर सरकारी संस्था 'सरहद' ने मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं। इस संस्था ने इस सकूल की हर संभव मदद करने की बात कही है ताकि बच्चों की पढ़ाई जा रह सके।

सरहद संस्था के प्रबंधन से जुड़े जाहिद बट्ट ने बताया कि सरहद संस्था प्रमुख रूप से जम्मू कश्मीर और पंजाब की सरहद के करीब रह रहे लोगों की मदद के लिए काम करती है। उन्होंने बताया कि सरहद संस्था ने अफगानिस्तान में बच्चों के हालात को देखते हुए वहां के बच्चों की मदद के लिए हेल्पलाइन शुरू की है। वहीं संस्था ने अफगानिस्तान के लगभग 1000 बच्चों की शिक्षा का बीड़ा उठाया है। उन्होंने बताया कि दैनिक जागरण डॉट कॉम की खबर पढ़ कर उन्हें पता चला कि दिल्ली में अफगानी बच्चों का स्कूल है और बदले हालात के चलते ये बंदी की कगार पर है। इसके बाद संस्था ने दैनिक जागरण न्यू मीडिया से संपर्क कर इस स्कूल के बारे में और जानकारी प्राप्त की। दैनिक जागरण न्यू मीडिया की मदद से स्कूल की प्रिंसिपल से बात की गई। संस्था ने दिल्ली में अपने एक कोऑर्डिनेटर को इस स्कूल की मदद के लिए लगाया है। इस स्कूल की जरूरतों का आकलन करने के बाद इसकी मदद की जाएगी। संस्था की गुरु तेग बहादुर कमेटी के सामने इस स्कूल की मदद के मुद्दे को रखा गया है। जल्द ही इस स्कूल की मदद का हर संभव मदद का प्रयास किया जाएगा।

दिल्ली के भोगल इलाके में जमाल-अल-दीन अफगानी नामक यह अफगान स्कूल है। इस समय यहां कक्षा 1 से 12वीं तक के लगभग 550 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। इस स्कूल में अफगानिस्तान बोर्ड के तहत ही पढ़ाई होती है। अब तक इस स्कूल को चलाने के लिए हर तरह की वित्तीय सहायता अफगानिस्तान सरकार देती थी। लेकिन अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद से इस स्कूल पर संकट गहरा गया था। स्कूल की प्रिंसिपल और निदेशक सानिया ने बताया था कि जनवरी 2021 से अफगान सरकार की ओर से स्कूल को दी जाने वाली वित्तीय सहायता नहीं दी गई है। इसके चलते स्कूल के लिए बिल्डिंग का किराया, टीचर्स की फीस और अन्य खर्च का भार उठाना मुश्किल हो रहा है। यहां टीचर्स और अन्य कर्मचारियों को मिला कर कुल 36 लोग काम कर रहे हैं। फिलहाल कोरोना को ध्यान में रखते हुए बच्चों की पढ़ाई ऑनलाइन कराई जा रही है। यहां बच्चों को फारसी में पढ़ाया जाता है ताकि उन्हें आसानी से समझ में आए।

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1994 में स्थापित हुआ स्कूल

जमाल-अल-दीन अफगानी स्कूल 1994 में शुरू किया गया था। शुरू में ये एक गैर सरकारी संगठन, महिला फेडरेशन फॉर वर्क से संबंधित था। बाद में 2000 के दशक की शुरुआत में इस एनजीओ ने स्कूल को बंद कर दिया। कुछ दिन तक यह स्कूल चंदे की राशि से भी चलाया गया। हालांकि इसके बाद अफगान सरकार ने इसे आर्थिक सहायता देनी शुरू की थी।