मानस परिवर्तन का अभियान है राष्ट्रीय शिक्षा नीति

 

हिंदी उत्सव में बोले शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के अतुल कोठारी

शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास से जुड़े अतुल कोठारी ने ‘हिंदी हैं हम’ के हिंदी उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी से चर्चा के दौरान कहा कि पहले ज्यादातर शिक्षण संस्थानों में सेमिनार अंग्रेजी में होते थे अब हिंदी और अन्य भाषाओं में भी होने लगे हैं। ये काफी नहीं है।

 नई दिल्ली। पिछले करीब पौने दो सौ साल में हमारे देश में अंग्रजी लगातार बढ़ रही है। इस स्थिति को बदलना सरल नहीं होगा लेकिन देश का वातावरण बदल रहा है। पहले ज्यादातर शिक्षण संस्थानों में सेमिनार अंग्रेजी में होते थे अब हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में भी होने लगे हैं। ये काफी नहीं है। भारतीय भाषाओं के विकास के लिए धरातल पर काम करना होगा। अभी तक भाषा को तोड़ने का माध्यम बनाया गया था लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने भाषा को जोड़ने का माध्यम बनाया है।

इस शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी गई है। इस नीति के सामने आने के बाद कोई भाषा विवाद उत्पन्न नहीं हुआ। आज संपूर्ण देश में हिंदी स्वीकार्य है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बहाने हिंदी का विरोध चल नहीं पाया। सरकार ने नीति तो बना दी है पर उसको सफलतापूर्वक लागू करने में समाज और शिक्षा जगत की बड़ी भूमिका है। नीति की सही बात जनता तक पहुंचाने और जागरूक करने के लिए बड़ा अभियान चलाना पड़ेगा तब जाकर बदलाव आएगा। ये बातें शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास से जुड़े अतुल कोठारी ने ‘हिंदी हैं हम’ के हिंदी उत्सव में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी से चर्चा के दौरान कही।

अतुल कोठारी ने जोर देकर कहा कि बच्चों को मातृभाषा में पढ़ाना वैज्ञानिक है। इसके बारे में देशभर के अभिभावकों को बताना होगा। व्यावसायिक शिक्षा और उच्चतर शिक्षा का माध्यम भारतीय भाषाओं को बनाना होगा, प्रतियोगी परीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को बतौर माध्यम चुनने की छूट देनी होगी। न्यायालय और सरकारी कामकाज में भी अंग्रेजी का प्रयोग कम करना होगा। अंग्रेजी को लेकर जो भ्रम है उसको दूर करके जनमानस में परिवर्तन लाना होगा। इसके लिए कई स्तरों पर प्रयास आरंभ हो गया है। भाषा को रोजगार से जोड़ने के लिए क्रमबद्ध रूप से बदलाव की योजना बनानी पड़ेगी।

अकादमिक जगत में अंग्रेजी की अनिवार्यता हो गई है, इस भ्रम को दूर करने के लिए काम करना होगा। प्राथमिक शिक्षा में भी बहुत काम करना होगा। गुणवत्ता विकास को प्राथमिकता देनी होगी लेकिन इसमें भी समाज की सहभागिता की आवश्यकता पड़ेगी। बातचीत के क्रम में वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन ने भी कई उपयोगी जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि दुनिया के जितने भी विकसित देश हैं वो सब अपनी मातृभाषा में काम करते हैं जबकि विकासशील देश अंग्रेजी में। आपको बताते चलें कि अपनी भाषा को समृद्ध और मजबूत करने के लिए दैनिक जागरण का उपक्रम ‘हिंदी हैं हम’ के अंतर्गत हिंदी दिवस के मौके पर एक पखवाड़े का हिंदी उत्सव मनाया जा रहा है।शनिवार को शाम 6 बजे ‘हिंदी हैं हम’ के फेसबुक पेज पर “व्यावसायिक शिक्षा और हिंदी’ विषय पर भारतीय जनसंचार संस्थान के महानिदेशक संजय द्विवेदी से बात करेंगे लेखक राहुल चौधरी