सौर ऊर्जा में दिख रही पूर्वी निगम को रोशनी

 

फंड की कमी से जूझ रहे पूर्वी निगम की तरफ से लगातार राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
निगम की योजना अब अपने सभी संपत्तियों पर सोलर पैनल लगाने की है। इससे उत्पन्न बिजली का प्रयोग संबंधित संपत्ति में ही किया जाएगा। इसके बाद जो बिजली बचेगी उसे बिजली वितरण कंपनियों को बेच दिया जाएगा।

नई दिल्ली । फंड की कमी से जूझ रहे पूर्वी निगम की तरफ से लगातार राजस्व बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत अब निगम को सौर ऊर्जा में रोशनी दिखाई दे रही है। निगम की योजना अब अपने सभी संपत्तियों पर सोलर पैनल लगाने की है। इससे उत्पन्न बिजली का प्रयोग संबंधित संपत्ति में ही किया जाएगा। इसके बाद जो बिजली बचेगी उसे बिजली वितरण कंपनियों को बेच दिया जाएगा। इससे आय तो होगी ही, साथ ही बिजली बिल के भुगतान में बचत भी होगी। लेकिन दिक्कत यह है कि निगम के पास सोलर पैनल लगाने के लिए भी फंड नहीं है। इस वजह से अब निगम निजी कंपनियों से निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया में जुट गई है।

371 स्कूलों की छत पर लगाने की है तैयारी

निगम अधिकारियों के मुताबिक पूर्वी निगम के पास करीब 371 स्कूल हैं जिनकी छतों पर इसे लगाया जा सकता है। इसके अलावा 71 सामुदायिक भवन हैं। तीन अस्पताल हैं। इसी तरह से निगम के कई कार्यालय भी हैं जिनकी छतों का प्रयोग सोलर पैनल लगाने के लिए किया जा सकता है। इनमें बिजली का उपयोग होता है, जिसका भारी-भरकम बिल निगम को चुकाना पड़ता है। इसलिए इस प्रस्ताव पर गंभीरता से काम चल रहा है।

कंपनियों को बोली लगाने के लिए किया आमंत्रित

महापौर श्याम सुंदर और स्थायी समिति अध्यक्ष बीर सिंह पंवार के साथ निगमायुक्त विकास आनंद ने इस पर सहमति दे दी है। अब कंपनियों को बोली लगाने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। जिस कंपनी की बोली में निगम को सबसे ज्यादा फायदा दिखेगा, यह काम उसे सौंप दिया जाएगा। इसके बाद प्रस्ताव को स्थायी समिति और सदन की बैठक में पेश किया जाएगा। निगम को उम्मीद है कि आय बढ़ाने और बचत करने में यह योजना काफी कारगर साबित होगी। इसके लिए सोलर एनर्जी कारपोरेशन आफ इंडिया के साथ भी बातचीत चल रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इस योजना में उसका भी साथ मिल सकता है।

क्या कहते हैं महापौर

पूर्वी निगम का राजस्व बढ़ाने के लिए सभी लोग मेहनत कर रहे हैं। इसके लिए कई योजनाओं पर काम चल रहा है। सोलर पैनल की योजना भी शामिल है। हमें उम्मीद है कि योजना में कई कंपनियां दिलचस्पी दिखाएंगी। जिनकी बोली निगम के हित में होगी, उन्हें यह काम सौंप दिया जाएगा। इसमें अभी कुछ समय लग सकता है।