अजब-गजब: अब सिहानी गेट थाना से गायब हो गया सीज जुगाड़ वाहन

 

वाहन गायब होने के बाद पीड़ित ने पुलिस से की शिकायत।
पुराने स्कूटर या बाइक का इंजन एक रेहड़ी में लगाकर लोग जुगाड़ वाहन तैयार कर मालवाहक के रूप में चलाते हैं। ऐसे वाहन का पंजीकरण इंजन या चेसिस नंबर नहीं होता।ये अवैध होते हैं जिन्हें सीज होने के बाद इन्हें छुड़ाया नहीं जा सकता क्योंकि कोई दस्तावेज नहीं होता है।

गाजियाबाद। थानों में रखी शराब चूहों के पीने के बारे में तो सुना ही होगा। सीज वाहनों से सामान चोरी के आरोप भी थाना पुलिस पर लगते रहते हैं। मगर ताजा मामला थाना सिहानी गेट से सीज वाहन के गायब होने का है। सब्जी बेचने वाले शिब्बनपुरा निवासी संदीप शर्मा का जुगाड़ वाहन पुलिस ने बीते साल लाकडाउन जब्त कर लिया था। कहा था कि इसे सीज कर रहे हैं। कुछ समय बाद थाने आकर छोड़ने की मांग की तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि अपना वाहन पहचान लो। संदीप का आरोप है कि उसे थाने में वाहन मिला ही नहीं। तभी से दर्जनों बार गुहार लगा चुके हैं, लेकिन वाहन नहीं मिल रहा है। शुक्रवार को एसएचओ सिहानी गेट मिथलेश कुमार उपाध्याय से मिले तो उन्होंने आश्वासन दिया।

वाहन छूटने का नहीं है प्रविधान

पुराने स्कूटर या बाइक का इंजन एक रेहड़ी में लगाकर लोग जुगाड़ वाहन तैयार कर मालवाहक के रूप में चलाते हैं। ऐसे वाहन का पंजीकरण, इंजन या चेसिस नंबर नहीं होता। ये पूरी तरह से अवैध होते हैं, जिन्हें सीज होने के बाद इन्हें छुड़ाया नहीं जा सकता, क्योंकि कोई दस्तावेज नहीं होता है। अपनी पत्नी व बच्चे के साथ शुक्रवार को थाने पहुंचे संदीप ने बताया कि उसने ब्याज पर 35 हजार रुपये लेकर कुछ दिन पहले ही नया वाहन तैयार कराया था। वाहन नहीं मिलने पर उसे पुलिस ने बताया कि हो सकता है, तुम्हारा वाहन गलती से कोई और ले गया है। अब सवाल है कि, जब सीज किया हुआ जुगाड़ वाहन दोबारा नहीं छूट सकता तो पुलिस ने किस तरह से संदीप का वाहन किसी और को दे दिया।

सीज होने के बाद वाहन छूटने का नहीं है प्रावधान

एसएचओ सिहानी गेट मिथलेश उपाध्याय से जब इस बारे में बात की गई तो वह बोले कि मुझे इसकी जानकारी नहीं है। एसएचओ का कहना है कि एक बार सीज होने के बाद जुगाड़ वाहन के छूटने का प्रविधान नहीं है। पहचान न होने के कारण सीज होते ही इसे कबाड़ मानकर डिस्पोजल भी किया जाता है। हो सकता है कि उक्त वाहन का डिस्पोज किया जा चुका हो या जगह बनाने के लिए कहीं साइड में लगा दिया हो। इस संबंध में मालखाना के प्रभारी से बात करने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।