भारतीय वायुसेना युद्ध व अन्य किसी आपात स्थितियों में राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर सकेंगे वायुसेना के लड़ाकू विमान

 

राष्ट्रीय राजमार्ग पर उतर सकेंगे वायुसेना के लड़ाकू विमान
पाकिस्तान सीमा के निकट होने के कारण यह सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक रनवे बाड़मेर जिले के बाखासर में बनकर तैयार हुआ है। 3 किलोमीटर लंबा और 33 मीटर चौड़े रनवे पर लडाकू विमान उतारने के साथ पार्क भी हो सकेंगे।

जयपुर, संवाददाता। भारतीय वायुसेना युद्ध और अन्य किसी आपात स्थितियों में राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने रनवे पर लड़ाकू विमान उतारने की तैयारी कर रही है। इसी के तहत राजस्थान के बाड़मेर व जालौर जिलों में भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो रनवे तैयार किए गए हैं। दोनों रनवे पर लड़ाकू विमान आपात स्थिति में सुरक्षित उतारे जा सकेंगे। विमान पार्क भी हो सकेंगे।

पाकिस्तान सीमा के निकट होने के कारण यह सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक रनवे बाड़मेर जिले के बाखासर में बनकर तैयार हुआ है। 3 किलोमीटर लंबा और 33 मीटर चौड़े रनवे पर लडाकू विमान उतारने के साथ पार्क भी हो सकेंगे।

अंतरराष्ट्रीय सीमा से बाखासर की दूरी करीब 40 किलोमीटर दूर है। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत दूसरा रनवे जालौर जिले के चितलवाना के पास से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनाया गया है। करीब 5 किलोमीटर लंबे इस रनवे पर वायुसेना के विमान आसानी से उतारे जा सकेंगे। यहां से उड़ान भी भर सकेंगे। वायुसेना अपने आपरेशन को आसानी से अंजाम दे सकेगी। पिछले दिनों इस रनवे पर वायुसेना ने दो हेलिकाप्टर उतार कर परीक्षण भी किया था। परीक्षण के बाद वायुसेना और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने दोनों हवाई पट्टियों को लड़ाकू विमानों के उतारने के लिए उपयुक्त माना था। 

जानकारी के अनुसार केंद्रीय रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी 9 सितंबर को दोनों रनवे का उद्धाटन करेंगे। जानकारी के अनुसार दोनों ही रनवे आपात स्थिति में वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे। बाड़मेर और जालौर जिले के अधिकारी उद्धाटन कार्यक्रम की तैयारियों में जुटे हैं।