रेल पुलों पर तैनात हुए स्थायी वाचमैन, ट्रैक पर भी बढ़ी पेट्रोलिंग

 

रेलवे ने बाढ़ को देखते हुए पुलों की न‍िगरानी बढ़ा दी है। - फाइल फोटो
 रेलवे प्रशासन के मुताबिक गोरखपुर और आसपास वाले पुलों पर अभी भी नदियों का पानी खतरे के निशान से नीचे बह रहा है। हालांकि गोंडा-लखनऊ के बीच स्थित घाघरा पुल पर नदी का पानी खतरे के निशान से कुछ सेंटीमीटर ऊपर आ गया था।

गोरखपुर, संवाददाता। भारी वर्षा में नदियों का जल स्तर बढ़ने के बाद भी पूर्वोत्तर रेलवे की ट्रेनों का संचालन प्रभावित नहीं हुआ है। ट्रेनें राप्ती, रोहिन और सरयू नदी के पुलों पर भी अपने निर्धारित गति से ही चल रही हैं। हालांकि, पानी के बढ़ते स्तर को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। सभी पुलों पर 24 घंटे के लिए स्थायी वाचमैन तैनात कर दिए गए हैं। जो हर पल पानी के स्तर बढ़ते और घटते स्तर पर नजर रख रहे हैं।

पुलों पर भी निर्धारित गति से दौड़ रहीं ट्रेनें, खतरे के निशान से नीचे बह रहा नदियों का पानी

रेलवे प्रशासन के मुताबिक गोरखपुर और आसपास वाले पुलों पर अभी भी नदियों का पानी खतरे के निशान से नीचे बह रहा है। ऐसे में ट्रेनें निर्बाध गति से चल रही हैं। हालांकि, गोंडा-लखनऊ के बीच स्थित घाघरा पुल पर नदी का पानी खतरे के निशान से कुछ सेंटीमीटर ऊपर आ गया था। पुल पर ट्रेनों की रफ्तार नियंत्रित हो गई थी, लेकिन जैसे ही पानी का स्तर नीचे आया गति फिर से बढ़ गई।

दरअसल, रेल पुलों पर पानी का स्तर रेलवे के निर्धारित खतरे के निशान से ऊपर होने पर ही ट्रेनों का संचालन प्रभावित होता है। खतरे के निशान से पानी ऊपर होने के साथ ट्रेनों की गति 30 किमी और 15 किमी प्रति घंटे हो जाती है। पानी ज्यादा बढ़ने पर ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया जाता है। जैसे पूर्व मध्य रेलवे के दरभंगा- समस्तीपुर रेल खंड के थलवारा-हायाघाट स्टेशन के बीच स्थित पुल पर पानी का स्तर बढ़ गया है। इसके चलते पुल से होकर ट्रेनों का संचालन रुक गया है। पुलों के अलावा रेल लाइनों पर भी पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई हैं। रेलकर्मी 24 घंटे अति आधुनिक उपकरणों के साथ निगरानी कर रहे हैं।

मिलने लगी है पानी के स्तर की सटीक जानकारी

रेलवे प्रशासन को पुलों पर पानी के स्तर की सटीक जानकारी मिलने लगी है। इसके लिए प्रमुख 12 पुलों पर वाटर लेवल मानिटरिंग सिस्टम लागू कर दिया गया है। गोरखपुर के राप्ती, रोहिन और मानीराम पुल पर सिस्टम लगाने की प्रक्रिया चल रही है। ऐसे में संरक्षा और सुरक्षा और पुख्ता हो गई है। कुल 15 पुलों पर सिस्टम लगाया जाना है।

मानसून के समय विपरीत परिस्थितियों से निपटने के लिए पहले से ही तैयारी सुनिश्चित कर ली गई है। आवश्यकतानुसार उपयोग के लिए चिन्हित स्थलों पर बाढ़ राहत सामग्री वैगनों में रखी हुई है। सभी संवेदनशील स्थलों की पेट्रोलिंग की जा रही है। पुलों पर स्थायी वाचमैन लगाए गए हैं। जो नदी के बहाव और पानी के स्तर की स्थिति की निगरानी के साथ ट्रेनों का सुरक्षित संचालन सुनिश्चित कर रहे हैं। पानी के स्तर को मापने के लिए पुलों पर वाटर लेवल मानिटरिंग सिस्टम लगाए गए हैं। - पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी- पूर्वोत्तर रेलवे।