बनाएं रखें अपनी ऊर्जा, सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा को लेकर खुद को इस तरह करें तैयार


सीधे-सीधे दिमाग से ही जुड़ी हुई प्रतियोगिता है सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा
यूपीएससी की आगामी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (10 अक्‍टूबर) में कुछ ही दिन बचे हैं। इस दौरान खुद को सकारात्मक रखते हुए आगे की तैयारी कैसे की जाए बता रहे हैं पूर्व आइएएस अधिकारी एवं एक्सपर्ट डा. विजय अग्रवाल...

 यह बताने की जरूरत नहीं है कि शारीरिक क्षमताओं वाली खेल प्रतियोगिताओं में एक मजबूत दिमाग की कितनी बड़ी भूमिका होती है। लगभग पच्‍चीस दिनों बाद होने वाली सिविल सेवा की प्रारंभिक परीक्षा तो सीधे-सीधे दिमाग से ही जुड़ी हुई प्रतियोगिता है। इसलिए आपको विशेषकर इनदिनों अपने मन को लगातार मजबूत और ऊर्जावान बनाये रखने पर भी उतना ही ध्‍यान देना चाहिए, जितना ध्‍यान आप सामान्य अध्ययन की तैयारी पर दे रहे हैं।

वैसे, सिविल सर्वेंट बनने का निर्णय आपने लिया है। भले ही किसी के दबाव में ही सही, लेकिन आप अपनी जिंदगी के सबसे कीमती समय का कुछ हिस्‍सा इसमें झोंक रहे हैं। इसकी सफलता का सीधा संबंध आपके अपने जीवन से है। जी हां, आपके जीवन से है। इसकी सफलता के साथ एक अच्‍छी वित्तीय स्थिति, सुविधाएं, सम्‍मान एवं भविष्‍य की निश्चिंतता जुड़ी हुई है। ये सब आप अपने कुल जीवन में से केवल तीन-चार साल की कुर्बानी देकर हासिल कर सकते हैं। तो क्‍या ये सब बातें तैयारी करने की आग को लगातार फूंक मारने के लिए पर्याप्‍त नहीं हैं?

निराशा न हावी होने दें

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को मैं ‘हाथी का पांव’ कहता हूं, जिसकी तैयारी के अंदर कमोबेश अन्‍य सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की काफी-कुछ तैयारी हो जाती है। इसलिए यदि आप पर कभी निराशा के बादल छा भी जाएं, जो कि छाते ही हैं, तो तुरंत इस सत्‍य का सूरज दिमाग में पैदा करें कि ‘यह न सही। कुछ और सही। मेरी यह तैयारी कभी भी बेकार नहीं जाएगी।' ऐसा सोचते ही निराशा के बादल खुद ब खुद छंटने शुरू हो जाएंगे।

संपूर्ण व्‍यक्तित्व की परीक्षा

इस परीक्षा की तैयारी का एक और भी अत्‍यंत महत्‍वपूर्ण पहलू है, जिसके बारे में ज्‍यादातर युवा जानते ही नहीं हैं। यह संपूर्ण व्‍यक्तित्व की गढ़न से जुड़ा हुआ पहलू है। इसे मैं जीवन में अनुशासन लाने, तनाव को बर्दाश्‍त करने तथा कठिन क्षणों में भी अपना आंतरिक संतुलन बनाये रखने की एक ट्रेनिंग मानता हूं। आपको यह प्रशिक्षण अनजाने में ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के दौरान मिलता रहता है। मैंने कई ऐसे युवाओं की इस रूप में पहचान की है, जब वे सिविल सर्विस की तैयारी के बाद अब कुछ और कर रहे थे। ये समूह में अपनी अलग ही पहचान रखते हैं यानी कि यहां भी वे एक सिविल सर्वेंट की तरह ‘सर्वोत्तम’ का प्रतिनिधित्‍व कर रहे होते हैं। निश्चित रूप से रास्‍ता आसान नहीं है। लेकिन आप भी तो कम क्षमतावान नहीं हैं। जरूरत केवल इतनी है कि आपको श्रम के द्वारा, समय का व्‍यवस्थित रूप से उपयोग करके उस ज्ञान को आत्‍मसात करना है, जो इस रास्‍ते को संभव बना सके। जो लोग सफल होंगे, वे आप लोगों में से ही होंगे। इनमें ‘मैं भी तो हो सकता हूं’, यह विचार निरंतर अपने मस्तिष्‍क को भेजते रहें। आखिरी बात यह कि दूसरों की तैयारी के बारे में सोचना बिल्‍कुल बंद कर दें। स्‍वयं की सोच को स्‍वयं तक केंद्रित करके पूरी तरह से तैयारी में तैनात कर दें, ताकि उसे कुछ और सोचने का मौका ही न मिल पाये।