शिक्षक का सम्मान करना सिखाती हैं ये बॉलीवुड फिल्में, सिनेमा ने दिखाए हैं टीचर के अनेक रूप

 

Teachers Day 2021: स्वेदेस,जागृति, फोटो साभार: Twitter
अगर जीवन में शिक्षक न होते तो हर कोई लक्ष्यविहीन ही घूमता रहता। इसी महत्व को समझाता है हिंदी सिनेमा। आज शिक्षक दिवस के अवसर पर स्मिता श्रीवास्तव बता रही हैं ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में जिनमें शिक्षक की तरह-तरह की भूमिकाओं को बखूबी दिखाया गया है...

 मुंबई। अगर जीवन में शिक्षक न होते तो हर कोई लक्ष्यविहीन ही घूमता रहता। इसी महत्व को समझाता है हिंदी सिनेमा। आज शिक्षक दिवस के अवसर पर स्मिता श्रीवास्तव बता रही हैं ऐसी कुछ फिल्मों के बारे में जिनमें शिक्षक की तरह-तरह की भूमिकाओं को बखूबी दिखाया गया है...

फिल्म ‘जागृति’ का गाना ‘आओ बच्चों तुम्हें दिखाएं झांकी हिंदुस्तान की’ बच्चों के मन में भारतभूमि के सम्मान को भरने की बात कहता है। इस फिल्म में शिक्षक शेखर (अभि भट्टाचार्य) छात्रों को शिक्षित और अनुशासित करने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं। इसी फिल्म का गाना ‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल आज भी प्रासंगिक है। कवि प्रदीप का लिखा यह गीत आजादी पाने की लड़ाई से जुड़े संघर्षों की यादों को ताजा करता है। इसी तरह विनोद खन्ना अभिनीत फिल्म ‘इम्तिहान’ का गीत ‘रुक जाना नहीं तू कहीं हार के’आज भी सुनने पर आशा और ऊर्जा का संचार करता है। फिल्म‘हम नौजवान’ में देव आनंद और ‘बुलंदी’ में राजकुमार ने बच्चों को आदर्श और कर्तव्य का पाठ पढ़ाया था। फिल्म ‘प्रतिघात’ छात्र राजनीति और उसके बीच फंसी कालेज टीचर लक्ष्मी (सुजाता मेहता) की कहानी थी, जिसे खूब सराहा गया था। बच्चे को समझने में हुई चूक से उसका जीवन किस प्रकार प्रभावित हो सकता है यह संदेश ‘तारे जमीं पर’ में बखूबी दिया गया। आने वाली पीढ़ी के व्यक्तित्व, हुनर को तराशने में शिक्षकों की भूमिका आज भी जस की तस है। शिक्षकों के इन प्रयासों को हिंदी सिनेमा में दर्शाने में फिल्ममेकर भी पीछे नहीं रहे हैं।

पग-पग पर मिल जाते हैं शिक्षक

यह जरूरी नहीं कि शिक्षक हमें स्कूल या कालेज में ही मिलें। कई बार जीवन में कुछ ऐसे लोग मिलते हैं जो ताउम्र प्रेरणा बन जाते हैं। इस क्रम में ‘चक दे! इंडिया’ में कोच कबीर खान (शाह रुख खान) एक कमजोर भारतीय महिला हॉकी टीम को विजेता बनाता है। आमिर खान अभिनीत ‘दंगल’ में पिता ही अपनी बेटी का कोच बनकर उसे खेल जगत की नामचीन हस्ती बनाने का प्रयास करता है। राजकिरण अभिनीत ‘हिप हिप हुर्रे’ शिक्षक-छात्र के रिश्ते दिखाने वाली बेहतरीन फिल्मों में शुमार है। राजकिरण अपनी फुटबाल टीम के छात्रों को जीतने के लिए प्रेरित करते नजर आते हैं।

शिक्षक एक, रूप अनेक

हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन उन कलाकारों में रहे जिन्होंने सिल्वर स्क्रीन पर कई बार शिक्षक की भूमिका निभाई। इन फिल्मों में वे हर बार अलग-अलग अवतार में नजर आए। ‘कसमे-वादे’ में वे आदर्शवादी प्रोफेसर बने तो ‘आरक्षण’ में वे अपने सिद्धांतों पर अटल प्रभाकर आनंद के किरदार में स्वावलंबी योद्धा के रूप में उभरते हैं। ‘सत्याग्रह’ में उन्होंने सेवानिवृत्त अध्यापक की भूमिका निभाई तो ‘मोहब्बतें’ में बेहद अनुशासित प्राचार्य की भूमिका निभाई। हालांकि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘ब्लैक’ में उनके निभाए किरदार देवराज सहाय के लिए उन्हें काफी सराहना मिली। देवराज अपनी मूकबधिर छात्रा मिशेल (रानी मुखर्जी) को शब्दों से परिचित कराकर उसकी अंधेरी जिंदगी में ज्ञान का दीया प्रज्ज्वलित करते हैं। सही मायने में वह शिक्षक का अर्थ सार्थक करते हैं। राजकुमार हिरानी की ‘3 इडियट्स’ में बमन ईरानी इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रिंसिपल और ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ में डॉ. जे. अस्थाना के अनोखे अंदाज में नजर आ चुके हैं।

अधिकारों की करते बात

आशुतोष गोवारिकर की फिल्म ‘स्वदेस’ में गायत्री जोशी ने अध्यापिका की भूमिका निभाई, जो गांव में रहकर बच्चों को शिक्षित करना चाहती है और बच्चियों को शिक्षा का अधिकार दिलाने की बात करती है। फिल्म ‘हिचकी’ में नैना माथुर के किरदार में नजर आईं रानी मुखर्जी बिगड़ैल गरीब छात्रों और स्कूल प्रबंधन के साथ संघर्ष को दर्शाती नजर आईं। इस कड़ी में ऋतिक रोशन की ‘सुपर 30’ का जिक्र उल्लेखनीय है। इस फिल्म में वे ऐसे संघर्षशील शिक्षक की भूमिका में हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन प्रतिभावान बच्चों को मुफ्त शिक्षा देकर उनकी काबिलियत सामने लाते हैं।

बहरहाल, सिनेमा में दिखाई जाने वाली ये कहानियां शिक्षकों की उन चुनौतियों को दर्शाती हैं जिन्हें अक्सर हम देख नहीं पाते या नजरअंदाज कर जाते हैं। आज भी कई शिक्षक कठोर आदर्शों पर चलकर बेहतर समाज की स्थापना में महती भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। यह फिल्में उदाहरण हैं कि फिल्ममेकर्स अपनी कहानियों के जरिए उन्हें किस तरह सलाम करते हैं।