चीन का अब अंग्रेजी से सौतेला बर्ताव, अंग्रेजी में रुचि रखने वाले चीनी नागरिक अब अपनी मनचाही भाषा नहीं पढ़ सकेंगे

 

अंग्रेजी में रुचि रखने वाले चीनी नागरिक अब अपनी मनचाही भाषा नहीं पढ़ सकेंगे ।

शंघाई में शिक्षा प्राधिकरण के अंग्रेजी की परीक्षा नहीं कराने के फैसले से दुनिया की ओर खुलेपन से बढ़ने वाले चीन ने रिवर्स गेयर लगा लिया है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चीन ने अपने 1950 के दौर के घातक औद्योगिक अभियान को पीछे की ओर धकेल दिया है।

बीजिंग, न्यूयार्क टाइम्स। चीन ने पश्चिमी प्रभाव को कम करने के लिए अपने शिक्षण संस्थानों में अंग्रेजी भाषा के इस्तेमाल को काफी हद तक कम कर दिया है। न्यूयार्क टाइम्स में लिखे एक आलेख में ली युआन ने बताया कि अब अंग्रेजी भाषा चीन में एक संदिग्ध विदेशी भाषा के रूप में देखी जाने लगी है। यह भय लोगों में चीन के सत्तारूढ़ दल के राष्ट्रवादी प्रभाव के लिए अंग्रेजी के खिलाफ भय फैलाने का नतीजा है। कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद से चीन में राष्ट्रवादी प्रचार-प्रसार अपने चरम पर है।

प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी भाषा की परीक्षा बंद

ली युआन ने बताया चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग यह खुद कह चुके हैं कि चीन में अंग्रेजी भाषा ने अपनी चमक 2008 के आर्थिक संकट के दौरान ही खोनी शुरू कर दी थी। अब विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके चीन में कभी अंग्रेजी भाषा सुधारवाद का दूसरा नाम हुआ करती थी। यही भाषा वहां दुनिया की ओर खुलती हुई नीतियों का जरिया भी बनी थी। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। पिछले ही महीने स्थानीय प्राथमिक स्कूलों में अंग्रेजी भाषा की परीक्षा बंद करा दी गई है। अंग्रेजी में रुचि रखने वाले चीनी नागरिक अब अपनी मनचाही भाषा नहीं पढ़ सकते हैं।

शंघाई में शिक्षा प्राधिकरण 'रिवर्स गेयर' लगाया

शंघाई में शिक्षा प्राधिकरण के अंग्रेजी की परीक्षा नहीं कराने के फैसले से दुनिया की ओर खुलेपन से बढ़ने वाले चीन ने 'रिवर्स गेयर' लगा लिया है। या दूसरे शब्दों में कहा जाए तो चीन ने अपने 1950 के दौर के घातक औद्योगिक अभियान को पीछे की ओर धकेल दिया है। पिछले साल ही चीन के शिक्षा प्राधिकरण ने प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में विदेशी पाठ्य पुस्तकों का पठन-पाठन बंद करा दिया था। सरकार के एक सलाहकार ने अब देश के कालेजों की सालाना प्रवेश परीक्षा में भी अंग्रेजी का इम्तिहान बंद करा दिया है।

अंग्रेजी की कोचिंग देने वाले सेंटरों पर भी ताला लगे

नए प्रविधानों के तहत मूल अंग्रेजी को पढ़ना-पढ़ाना भी बंद होता जा रहा है। स्कूल के बाद अलग से अंग्रेजी की कोचिंग देने वाले सेंटरों पर भी ताला लगता जा रहा है। विश्वविद्यालयों में अंग्रेजी साहित्य या अन्य विषयों की अंग्रेजी की मूल किताबों से पढ़ाए जाने की भी व्यवस्था खत्म कर दी गई है। खासकर पत्रकारिता और संविधान के विषयों में अंग्रेजी की किताबें अब नहीं पढ़ाई जाती हैं।