दिल्ली दंगे के मामले में सामने आया पुलिस का एक और कारनामा, अदालत भी हुई हैरान

 

दिल्ली दंगे के मामले में पुलिस का एक और कारनामा, अदालत भी हुई हैरान

 दिल्ली दंगे के एक मामले में दिल्ली पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। दयालपुर इलाके में दुकान जलाने की एक ही घटना से जुड़े दो मुकदमे दर्ज कर पुलिस ने अलग-अलग आरोपपत्र दायर कर दिए।

नई दिल्ली । दिल्ली दंगे के एक मामले में दिल्ली पुलिस का नया कारनामा सामने आया है। दयालपुर इलाके में दुकान जलाने की एक ही घटना से जुड़े दो मुकदमे दर्ज कर पुलिस ने अलग-अलग आरोपपत्र दायर कर दिए। उसमें से एक मामले में बृहस्पतिवार को ही कोर्ट ने तीन आरोपितों को बरी किया है। जबकि दूसरे मामले में मुख्य आरोपित व आप के पार्षद रहे ताहिर हुसैन समेत दस लोगों पर आरोप तय करने को लेकर शुक्रवार को सुनवाई थी। कोर्ट ने दूसरे मामले की सुनवाई शुरू करते ही पुलिस की खामी की ओर इशारा करते हुए पूछा कि कानून की नजर में एक ही घटना के अलग-अलग मुकदमे और दो आरोपपत्र कैसे उचित प्रतीत होते हैं। इस मामले में मार्गदर्शन के लिए वरिष्ठ लोक अभियोजक ने समय मांगा है। अब इस मामले की सुनवाई नौ सितंबर तक टाल दी गई है।

गत वर्ष फरवरी में मुख्य शेरपुर चौक पर स्थित जीशान की फर्नीचर की दुकान में आग लगा दी गई थी, जिसमें दयालपुर थाने में एफआइआर संख्या 117/2020 दर्ज की गई थी। शुक्रवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव के कोर्ट ने कहा कि इस केस में पीड़ित जीशान के साथ हुई घटना को लेकर पुलिस ने जांच की और उसके आधार पर आरोपपत्र दायर किया, लेकिन इस केस में आरोप तय करने को लेकर सुनवाई करने में कानूनी पेच फंस गया गया है। क्योंकि, पीड़ित जीशान के साथ हुई इस घटना को पुलिस ने दयालपुर थाने में दर्ज एफआइआर संख्या 109/2020 में भी जोड़ रखा था। उस मामले में बृहस्पतिवार को यह कोर्ट तीन आरोपितों को बरी कर चुकी है।

कानून के मुताबिक एक मामले में आरोपितों को बरी कर दिया गया हो तो समान अपराध के लिए सजा पर ट्रायल नहीं किया जा सकता। इस पर कोर्ट ने अभियोजन की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ लोक अभियोजक से पूछा है कि कानून की नजर में वर्तमान मामले में आरोपपत्र कैसे उचित माना जा सकता है। इस पर जवाब देने के लिए वरिष्ठ लोक अभियोजक ने मार्गदर्शन के लिए समय मांगा है। ऐसे ही एक मामला सामने आने पर बीते दिन हाईकोर्ट ने चार एफआइआर निरस्त की थीं। बता दें कि आम आदमी पार्टी ने दंगे में नाम आने के बाद ताहिर हुसैन को पार्टी से निलंबित कर दिया था।