दिल्ली में जल निकासी के पैटर्न में बदलाव करने से ही सुधरेंगे हालात, करने होंगे ये दूरगामी उपाय

 

निश्चित ही इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना होगा।

 शनिवार को हुई बारिश से दिल्ली में ऐसी कोई जगह नहीं थी जहां जलभराव नहीं हुआ हो। क्या एयरपोर्ट और क्या अंडरपास। यही हालात थे कि दिल्ली में इस बार 100 से अधिक नई लोकेशन जलजमाव की बन गई हैं। जागरण आर्काइव

नई दिल्‍ली। दिल्ली में मानसून के दौरान जलभराव की समस्या साल दर साल बढ़ती ही जा रही है। अब तो स्थिति ऐसी हो गई है दुकानों और घरों तक में पानी भर रहा है। डेढ़ माह में चार बार ऐसे हालात सामने आए हैं जब बारिश के दौरान दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थिति देखने को मिली। हर गली, सड़क पर पानी था। तमाम वाहन पानी भर जाने से खराब हुए। कई अंडरपास में छह फीट तक पानी भर गया।

दक्षिणी दिल्ली में पुल प्रहलादपुर अंडरपास में पानी भरने का आज तक समाधान नहीं निकल सका है। अभी कुछ दिन पहले हुई बारिश में द्वारका अंडरपास में भी पानी भर गया। इस अंडरपास में पहले कभी पानी नहीं भरता था। यहां तक कि इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भी पानी भर गया। इन सब तथ्यों को बताने की जरूरत इसलिए पड़ रही है क्योंकि अब हमें इस ओर गंभीरता से सोचना पड़ेगा।

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आखिर कब तक दिल्ली इस समस्या से जूझती रहेगी। मैं करीब दस साल पहले लोक निर्माण विभाग का प्रमुख था। दिल्ली में उस समय भी जलभराव की समस्या थी, तब इतना पानी नहीं भरता था। निकासी भी जल्दी हो जाती थी। पिछले दिनों हुई बारिश में रिंग रोड पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की इमारत के पास सुबह से रात 10 बजे तक पानी भरा रहा।

तमाम एजेंसियां हैं जिम्मेदार : यह बात सही है कि दिल्ली में बरसाती पानी की निकासी के लिए जो सिस्टम है वह पूरे उत्तर भारत के पैटर्न पर है। जिसमें प्रति घंटे एक इंच बारिश का मानक है। दूसरे शब्दों में इसे 25 मिलीमीटर बारिश की क्षमता वाला माना जाता है। दिल्ली के कुछ इलाकों में 50 मिलीमीटर बारिश की क्षमता के सिस्टम की बात कही जा रही है तो मैं इससे सहमत हूं। हालांकि पूरी दिल्ली में यह व्यवस्था लागू नहीं है।

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करने होंगे दूरगामी उपाय : शहर के ऊंचे इलाकों से निचले इलाकों में सड़कों के माध्यम से तो पानी आता ही है, सीवर लाइन के माध्यम से भी पानी भर रहा है। सीवर लाइन में बरसाती पानी जा रहा है मतलब साफ है कि सीवर लाइन क्षतिग्रस्त है। कई इलाकों में सीवर लाइन नहीं है और बारिश के पानी की निकासी के लिए बनाए गए नालों का आउटफाल ठीक नहीं है। वर्तमान जरूरतों के हिसाब से बारिश के पानी की निकासी का सिस्टम नहीं है। यह सिस्टम 40 से 45 साल पुराना है। दूरगामी उपाय में इसे फिर से स्थापित करने की जरूरत है।

इन बातों पर हो अमल

  • दुरुस्त हो सीवर सिस्टम
  • संबंधित विभाग आपसी तालमेल से करें काम
  • दिल्ली में बड़े स्तर पर वर्षा जल संचयन की है जरूरत
  • निजी और सरकारी दोनों तौर पर इसे अभियान के रूप में लिया जाए
  • इससे जलभराव कम होगा और बारिश के पानी का हो सकेगा सही इस्तेमाल

अगर मान भी लें कि दिल्ली में इससे दो गुनी और तीन गुनी बारिश हो रही है, इस वजह से समस्या खड़ी हो रही है, फिर भी बड़ा सवाल यही है कि बारिश के पानी की निकासी की व्यवस्था बेहतर करने के लिए इतने सालों में क्या उपाय किए गए। दिल्ली बहु निकाय व्यवस्था वाला शहर है। यहां जलभराव न हो इसकी जिम्मेदारी कई एजेंसियों की है। लोक निर्माण विभाग, तीनों नगर निगम, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद व छावनी बोर्ड मुख्य रूप से इसमें शामिल हैं।

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सभी के अपने अपने दावे रहते हैं कि उनकी वजह से जलभराव नहीं होता है या हमारे यहां जलभराव नहीं हुआ है। एजेंसियां इसके लिए एक दूसरे पर जिम्मेदारी भी डालती हैं, लेकिन इस तरह से पल्ला झाड़ने से कुछ होने वाला नहीं है। न ही यह समस्या का हल है और न ही यह समस्या की जड़ है। जल निकासी की परेशानी कई विभागों से संबंधित है। इसमें बदहाल सीवर सिस्टम भी एक मुद्दा है। यदि वो दुरुस्त हो जाए तो बहुत हद तक जलभराव ही नहीं हो। सिर्फ ज्यादा बारिश होने पर थोड़ी देर पानी जमा हो और फिर स्वत: निकासी हो जाए।