तालिबान को मान्यता नहीं देगा ब्रिटेन लेकिन करता रहेगा बात, यूरोपीय संघ ने भी यही रुख अपनाया

 

ब्रिटेन काबुल में नई सरकार के तौर पर तालिबान को मान्यता नहीं देगा।
ब्रिटेन काबुल में नई सरकार के तौर पर तालिबान को मान्यता नहीं देगा। लेकिन अफगानिस्तान के नए हालात से निपटने की जरूरत है। वहीं यूरोपीय संघ (ईयू) ने तालिबान के साथ सशर्त बातचीत के लिए मंजूरी दी है।

इस्लामाबाद, रायटर। ब्रिटेन काबुल में नई सरकार के तौर पर तालिबान को मान्यता नहीं देगा। वहीं यूरोपीय संघ (ईयू) ने तालिबान के साथ सशर्त बातचीत के लिए मंजूरी दी है। उधर जर्मनी के नेताओं ने तालिबान के लोगों से बातचीत शुरू कर दी है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डोमिनिक राब ने शुक्रवार को बताया कि वह अफगानिस्तान का सामाजिक और आर्थिक ताना-बाना टूटते हुए नहीं देखना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि तालिबान के सहयोग के बिना 15 हजार लोगों को निकालने का प्रबंध नहीं हो सकता है।

डोमिनिक राब ने आगे कहा कि हमारा रुख यही होगा कि तालिबान को मान्यता नहीं देंगे लेकिन उससे प्रत्यक्ष बातचीत करके राहत कार्यो को अंजाम दिया जाएगा। यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख जोसेफ बोरेल ने कहा कि कड़ी शर्तो के तालिबान से संपर्क बनाएंगे लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह नई अफगान सरकार को मान्यता देंगे। अफगानी आबादी का साथ देने के लिए वहां की मौजूदा सरकार से संपर्क साधना जरूरी है।इसी तरह अफगानिस्तान में जर्मनी के राजदूत मा‌र्क्स पुत्जेल ने तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख शेर मुहम्मद अब्बास स्तानेकजई से मुलाकात की है। इन दोनों ने अफगानिस्तान के ताजा हालात पर चर्चा की और जर्मनी की ओर से मानवीय सहायता के लिए काबुल एयरपोर्ट को फिर से खोलने पर विचार-विमर्श किया। 

इस बीच तालिबान ने दावा किया है कि वेस्टर्न यूनियन अफगानिस्तान में अपना कामकाज फिर से शुरू करेगी। तालिबान के सांस्कृतिक आयोग के प्रवक्ता अहमदुल्ला मुत्ताकी ने शुक्रवार को इस फैसले की जानकारी दी। तालिबान का मानना है कि इससे नकदी संकट से जूझ रहे अफगानिस्‍तान में विदेशी धन के प्रवाह का एक दुर्लभ माध्यम खुल जाएगा।