जापानी PM सुगा के हटने की क्‍या है बड़ी वजह, देश की अर्थव्‍यवस्‍था पर क्‍या होगा असर, नए पीएम की चुनौती

 

आखिर जापानी प्रधानमंत्री सुगा के हटने की क्‍या है बड़ी वजह।

जापान में आम चुनाव भी निकट है ऐसे में पार्टी सुगा के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि सुगा के विकल्‍प के तलाश शुरू हो गई। जापान में नए प्रधानमंत्री की दौड़ में मौजूदा तेजतर्रार वैक्सीन मंत्री टैरो कोनो सबसे आगे हैं।

नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। जापान में मौजूदा प्रधानमंत्री योशीहिदा सुगा के पद से हटने के ऐलान के बाद देश में एक राजनीतिक अस्थिरता का दौर शुरू हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्‍या सुगा का पीएम पद से हटने का असर देश के विकास और जापानी अर्थव्‍यवस्‍था पर पड़ेगा। सुगा ने ऐसे समय पीएम पद से हटने की घोषणा की है, जब वैश्विक राजनीति में काफी उथल-पुथल मची हुई है। जापान का धनिष्‍ठ मित्र और सहयोगी अमेरिका भी मुश्किल दौर से गुजर रहा है। अफगानिस्‍तान से अमेरिकी सेना के हटने के बाद राष्‍ट्रपति बाइडन की किरकिरी हुई। अमेरिका के महाशक्ति होने पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस घटना के बाद चीन ने भी अपने पड़ोसियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। ऐसे में यह सवाल काफी अहम हो जाता है। आखिर इन सब मसलों पर क्‍या है विशेषज्ञों की राय। 

सुगा के हटने के  बाद जापान की विदेश नीति और अर्थव्‍यस्‍था पर क्‍या होगा असर प्रो. हर्ष पंत का कहना है जापान में सबसे लंबे समय तक पूर्व प्रधानमंत्री रहे शिंजो आबे के पद से हटने के बाद से ही यह सवाल उठ रहे थे कि अब जापान का राजनीतिक परिदृश्‍य में स्थिरता का अभाव होगा। हालांकि, उन्‍होंने कहा कि इसका असर लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी पर नहीं पड़ेगा। पार्टी बहुत मजबूती से सत्‍ता में है। उन्‍होंने कहा कि सत्‍तारूढ़ पार्टी संसद के दोनों सदनों में पार्टी का बहुमत है। इसलिए जापान में आम चुनाव समय से ही होंगे।

  • उन्‍होंने कहा कि पूर्व पीएम आबे की सत्‍तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी और सरकार दोनों पर जबरदस्‍त पकड़ थी। पीएम के पद से हटने के बाद आबे के उत्‍तराधिकारी को लेकर पार्टी के अंदर एक संघर्ष का दौर चला। आबे के इस्‍तीफे के बाद जिस तरह से पीएम पद की रेस में कई नाम सामने आ रहे थे, उससे यह कयास लगाया जा रहा था कि जापान में नए प्रधानमंत्री का कार्यकाल बहुत लंबा नहीं होगा।
  • उन्‍होंने कहा कि जापान में कोरोना महामारी के चलते देश में बड़ी संख्‍या में मौतें हुईं। इसके चलते देश की अर्थव्‍यवस्‍था में काफी गिरावट आई। विदेश नीति के मोर्चे पर भी मौजूदा प्रधानमंत्री योशीहिदा सुगा की उस तरह की उपलब्धियां नहीं रही, जो आबे के कार्यकाल में हासिल हुई। जापान में कराए गए जनमत सर्वे में भी मौजूदा सुगा का ग्राफ तेजी से गिरा।
  • उन्‍होंने कहा कि जापान में आम चुनाव भी निकट है, ऐसे में पार्टी सुगा के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि सुगा के विकल्‍प के तलाश शुरू हो गई। जापान में नए प्रधानमंत्री की दौड़ में मौजूदा तेजतर्रार वैक्सीन मंत्री टैरो कोनो सबसे आगे हैं। सर्वेक्षण में उनकी लोकप्रियता सबसे ऊपर है। उन्हें पीएम पद के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। सर्वेक्षण में उन्हें सबसे ज्यादा 32 फीसद लोगों ने पसंद किया है। अंग्रेजी भाषा पर भी मजबूत पकड़ रखने वाले 58 वर्षीय कोनो इंटरनेट मीडिया पर युवाओं के बीच लोकप्रिय नेता हैं।
  • लोकप्रियता का ग्राफ गिरने के बाद सुगा ने घोषणा की कि वह अगले कार्यकाल में प्रधानमंत्री पद के दावेदार नहीं होंगे। संभावित रूप से नवंबर में होने जा रहे चुनाव को लेकर अब पीएम के संभावित दावेदारों की तलाश शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री पद के लिए दूसरे दावेदार पूर्व रक्षा मंत्री शिगेरु इशिबा हैं। दोनों ने ही प्रधानमंत्री बनने में रुचि दिखाई है, लेकिन आधिकारिक रूप से उम्मीदवारी घोषित नहीं की है।
  • पिछले कुछ दिनों से ही उनके नाम को लेकर पार्टी में खींचतान चल रही थी। उन्‍होंने कहा कि स्‍थानीय चुनाव में पार्टी की हार के बाद ये खींचतान काफी बढ़ गई थी। आबे के पद छोड़ने के बाद सुगा को पीएम पद की जिम्‍मदारी दी गई थी। उस वक्‍त उनके नाम पर 70 फीसद से अधिक लोगों की मुहर लगी थी, लेकिन स्‍थानीय चुनाव में हुई करारी हार के बाद उनको देश के 50 फीसद से भी कम लोगों ने पसंद किया था।
  • उन्‍होंने कहा जापान में इस राजनीतिक अस्थिरता का देश के विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। इसकी बड़ी वजह यह है कि देश में सत्‍तारूढ़ दल काफी मजबूत और स्थिर है। ऐसे में देश के विकास और अर्थव्‍यवस्‍था पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्‍होंने कहा जापान एक विकसित मुल्‍क है। जापान की लोकतांत्रिक प्रक्रिया काफी मजबूत है।

ओपिनियन पोल के नतीजों में तारो कोनो आगे

जापान में टीकाकरण मामलों के कैबिनेट मंत्री तारो कोनो देश के अगले प्रधानमंत्री पद के लिए लोगों की पहली पसंद हैं। यह खुलासा सोमवार को जारी ओपिनियन पोल के नतीजों में हुआ। वह पद छोड़ने जा रहे निवर्तमान प्रधानमंत्री योशिहिदो सुगा के उत्तराधिकारी के संभावित प्रत्याशी हैं। कोनो (58 वर्षीय) ने जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की है और फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं जो जापान की राजनीति में शायद ही देखने को मिलता है जिस पर बुजुर्ग नेताओं का दबदबा है। उनके प्रशंसकों में युवा हैं जिनसे वह सोशल मीडिया के माध्यम से संवाद करते हैं। उन्होंने देश के विदेश और रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी भी निभाई है।