भारत ने बड़े पैमाने पर बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली में 1000 मेगावाट की परियोजना के लिए अपनी यात्रा शुरू की

 

केंद्र सरकार ने 1000 मेगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की स्थापना के लिए टेंडर आमंत्रित किया है।
बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि 2030 तक नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे ऊर्जा भंडारण प्रणालियों की स्थापना के साथ समर्थन मिलना जरूरी है।

नई दिल्ली, एएनआइ। देश में आए बिजली संकट के बाद केंद्र सरकार ने एक पायलट परियोजना के रूप में 1000 मेगावाट बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीईएसएस) की स्थापना के लिए टेंडर आमंत्रित किया है।यह नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय और ऊर्जा मंत्रालय दोनों का संयुक्त प्रयास है, जो देश में ऊर्जा भंडारण प्रणाली की स्थापना के लिए एक रोडमैप प्रदान करने के लिए इस पर काम कर रहे हैं।

बिजली मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि 2030 तक नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के 450 गीगावाट अक्षय ऊर्जा लक्ष्य को प्राप्त करने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य का समर्थन करने के लिए यह महत्वपूर्ण है कि इसे ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली, हाइड्रो पंप भंडारण संयंत्रों आदि) की स्थापना के साथ विधिवत समर्थन मिलना जरूरी है।

मंत्रालय ने कहा कि भारतीय सौर ऊर्जा निगम (एसईसीआई), नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के तहत एक सीपीएसयू ने 1000 मेगावाट बीईएस की खरीद के लिए रुचि की अभिव्यक्ति की मांग की है। इसे आरएफएस बोली दस्तावेज और मसौदा व्यापक गाइडलाइन के साथ प्रकाशित किया जाएगा। इसमें उत्पादन, पारेषण और वितरण परिसंपत्तियों और सभी सहायक सेवाओं के हिस्से के रूप में बीईएसएस की खरीद और उपयोग के बारे जानकारी होगी। इसने आगे कहा कि 28 अक्टूबर 2021 को होने वाली प्री बिड कान्फ्रेंस में इस पर चर्चा की जाएगी।

विभिन्न हितधारकों के सुझावों और फीडबैक के आधार पर अंतिम आरएफएस का दस्तावेज नवंबर 2021 के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा, साथ ही उत्पादन, पारेषण और वितरण परिसंपत्तियों के हिस्से के रूप में सभी सहायक सेवाएं के तहत बीईएसएस की खरीद और उपयोग के लिए अंतिम व्यापक गाइडलाइन के साथ जारी किया जाएगा। मंत्रालय के बयान के अनुसार, भारत अक्षय ऊर्जा के तहत ऊर्जा भंडारण प्रणाली के उपयोग करने की योजना बना रहा है। ट्रांसमिशन सिस्टम के उपयोग को अधिकतम करने और ग्रिड स्थिरता को मजबूत करने और ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर के संवर्धन में निवेश को बचाने के लिए ग्रिड तत्व के रूप में ऊर्जा भंडारण प्रणाली का प्रयोग किया जाएगा।

सेवाओं और लचीले संचालन को संतुलित करने के लिए एक संपत्ति के रूप में ऊर्जा का भंडारण किया जाएगा। सिस्टम आपरेटर यानी लोड डिस्पैचर्स (RLDCs और SLDCs) अन-जेनरेशन के कारण लोड में अंतर्निहित अनिश्चितता/भिन्नताओं को प्रबंधित करने के लिए फ्रीक्वेंसी कंट्रोल और बैलेंसिंग सेवाओं के लिए स्टोरेज सिस्टम का उपयोग कर सकते हैं। ऊर्जा की वितरण प्रणाली के लिए भंडारण यानी इसे अपने पीक लोड और अन्य दायित्वों के प्रबंधन के लिए लोड सेंटर पर रखा जा सकता है। ऊर्जा भंडारण प्रणाली डेवलपर द्वारा एक व्यापारी क्षमता के रूप में और बिजली बाजार में बेचते हैं।