अगले 10 वर्षो में और बहुआयामी होंगे भारत-सऊदी अरब के रिश्ते, भारतीय कंपनियों को होगा खास फायदा

 


डा. सऊद बिन मुहम्मद अल सती हैं भारत में सऊदी अरब के राजदूत
नई दिल्ली में सऊदी अरब के राजदूत डा. सऊद बिन मुहम्मद अल सती ने  बातचीत में मौजूदा रिश्तों की भावी दिशा के बा

नई दिल्ली, खाड़ी क्षेत्र के सभी देश बहुत ही बड़े बदलाव से गुजर रहे है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाड़ी के सभी देशों के साथ भारत के रिश्तों को नया आयाम दिया है। सऊदी अरब की भावी रणनीति में भी भारत को एक अलग स्थान दिया गया है। नई दिल्ली में सऊदी अरब के राजदूत डा. सऊद बिन मुहम्मद अल सती ने दैबातचीत में मौजूदा रिश्तों की भावी दिशा के बारे में विस्तार से बताया।

सऊदी अरब के विजन 2030 की क्या प्रगति है?

- आपको मालूम होगा कि सऊदी अरब किंगडम ने वर्ष 2016 में विजन-2030 को जारी किया था। हमने 500 सुधारों को लागू करने का फैसला किया था और इसमें से 45 फीसद को पूरा कर लिया गया है। हमने विदेशी उद्योगपतियों को सौ फीसद सुरक्षा देने का फैसला किया है। देश में 5,500 लाइसेंसिंग नियमों में सुधार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से 60 फीसद में सुधार हो चुका है या उन्हें खत्म किया जा चुका है। इसका असर यह हुआ है कि पिछले पांच वर्षों में गैर-तेल कारोबार से होने वाले रिजर्व में 222 फीसद की वृद्धि हुई है। वहां के वर्क फोर्स में महिलाओं की हिस्सेदारी 19.4 फीसद से बढ़कर 33.3 फीसद हो चुकी है। वर्ष 2021 की पहली तिमाही में 478 विदेशी निवेशकों को लाइसेंस दिया गया है। सऊदी अरब में कारोबार करने को आसान बनाने का भारतीय कंपनियों को भी फायदा होगा।

इस संदर्भ में भारत के साथ रिश्तों की क्या दिशा होने जा रही है?

- दोनों देशों के बीच रणनीतिक रिश्ते हैं जिसे सऊदी अरब किंगडम और प्रधानमंत्री मोदी की सरकार की तरफ से बहुआयामी बनाने का फैसला किया गया है। तीन हफ्ते पहले ही सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैजल बिन फरहान अल सऊद ने भारत की यात्रा की थी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उनकी बातचीत में कारोबार, ऊर्जा, डिफेंस, सिक्यूरिटी, संस्कृति, स्वास्थ्य और एक दूसरे के नागरिकों को सुविधा देने से जुड़े विषयों पर हाल में प्रगति की समीक्षा की है। कोरोना की स्थिति थोड़ी और सुधरने के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय दौरे भी होंगे। अगले 10 वर्षो में भारत और सऊदी अरब के द्विपक्षीय रिश्ते कई मायनों में बहुआयामी होंगे।

ऊर्जा क्षेत्र में हम आपसी रिश्तों को किस तरफ ले जा रहे हैं क्योंकि अभी तक तो यह कच्चे तेल की खरीद तक ही सीमित था?

- ऊर्जा क्षेत्र में हमारे द्विपक्षीय रिश्ते काफी अच्छे हैं। सऊदी अरब ने गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्त्रोतों पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया है और हमें लगता है कि भारत के साथ हम काफी अच्छे संबंध बना सकते हैं। जिस तरह कच्चे तेल की खरीद में हमारे रिश्ते रहे हैं, वैसे ही हम रिन्यूबल एनर्जी में भी बना सकते हैं। भारत के साथ इन नए ऊर्जा क्षेत्रों में रिश्ते बनने भी लगे हैं। सऊदी अरब बड़े पैमाने पर सोलर एनर्जी और हाइड्रोजन एनर्जी को बढ़ावा दे रहा है ताकि वर्ष 2030 तक हमारी अर्थव्यवस्था में पारंपरिक एवं गैर-पारंपरिक ऊर्जा का अच्छा मिश्रण हो। रियाद में 23 अक्टूबर, 2021 को ग्रीन मिडल ईस्ट इनीशिएटिव समिट शुरू कर रहे हैं। भारत में भी ग्रीन एनर्जी को लेकर काफी काम हो रहा है और हमारे बीच रणनीतिक रिश्तों को यहां बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं।

कोरोना महामारी से दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों पर किस तरह का असर हुआ है?

- कोरोना महामारी ने हमारे समक्ष कई तरह की चुनौतियां पेश की हैं, लेकिन भारत व सऊदी अरब के द्विपक्षीय रिश्तों को और प्रगाढ़ करने की हमारी कोशिशों पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। हमारे लिए भारत तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझीदार है। वर्ष 2020-21 में सऊदी अरब से तीन अरब डालर का निवेश भारत में हुआ है। भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में सऊदी अरब से बड़े निवेश आ रहे हैं। हाल ही में सऊदी के एक पब्लिक प्रोविडेंट फंड ने भारतीय कंपनी में 7.5 करोड़ डालर का निवेश किया है। भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के रिफाइनिंग और पेट्रो रसायन कारोबार में सऊदी अरामको 20 फीसद इक्विटी खरीद रही है। रिलायंस के खुदरा कारोबार आरआरवीएल में सऊदी अरब के एक वेल्थ फंड ने 1.3 अरब डालर का निवेश किया है। सऊदी अरब में भी टाटा समूह, विप्रो, टीसीएस, टीसीआइएल, एलएंडटी की उपस्थिति पहले से मजबूत हुई है।