12 अक्टूबर को वीर शहीद गणेश हांसदा की 22वी जयंती, गांव में उत्साह का माहौल

 

गणेश हांसदा फ़ेलोशिप 2021 की स्क्रीनिंग परीक्षा में चयनित 12 बच्चों ने ऑनलाइन साक्षात्कार में भाग लिया।
2020 की तरह 2021 में भी शहीद के चिंगड़ा पंचायत के पांच बच्चों को मिलेगी वीर शहीद गणेश हांसदा फ़ेलोशिप। निश्चय फाउंडेशन की पहल पर बच्चों को मिलेगी इन्टर से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई में मदद व मार्गदर्शन। परिणाम जल्द होंगे जारी।

जमशेदपुर / बहरागोड़ा : 12 अक्टूबर 2021 को झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के सुदूरतम प्रखण्ड बहरागोडा स्थित चिंगड़ा पंचायत के कोषाफलिया गांव में वीर शहीद गणेश हांसदा की 23वीं जयंती मनाई जा रही है। गांव के सपूत ने छोटी उम्र में ही देश के लिए शहादत देकर गांव का नाम देश के मानचित्र पर ला दिया था। वीर शहीद गणेश हांसदा 16 जून 2020 को गलवान घाटी में पड़ोसी देश चीन के साथ लड़ते हुए सीमा पर वीरगति को प्राप्त हुए थे। शहीद गणेश की शहादत ने इलाके में ना सिर्फ देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत किया है, वही पंचायत के बच्चों व युवाओं के लिए वह लगातार प्रेरणा का विषय बन रहे है।

वीर शहीद गणेश हांसदा फ़ेलोशिप एवं वीर शहीद गणेश हांसदा पुस्तकालय से पंचायत के बच्चों को शिक्षा को लेकर नई दिशा मिल रही है। रविवार को वीर शहीद गणेश हांसदा फ़ेलोशिप 2021 की स्क्रीनिंग परीक्षा में चयनित 12 बच्चों ने ऑनलाइन साक्षात्कार में भाग लिया। यहां के सुदूर गांव में नेटवर्क की समस्या एवं स्मार्टफोन की कमी भी अब पढ़ाई के लिए बच्चों का हौसला नहीं तोड़ पाती। सुदूर गांवों में भी शिक्षा के तकनीकी माध्यमों के उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फ़ेलोशिप की समूची प्रकिया ऑनलाइन ही आयोजित की जा रही है। इसके लिए बच्चों के उचित प्रशिक्षण के साथ-साथ बेहतर संवाद स्थापित किया गया है।

वीर शहीद गणेश हांसदा फ़ेलोशिप के दूसरे वर्ष आयोजित साक्षात्कार में अधिवक्ता राजीव कुमार, प्रोफेसर इंदल पासवान, डॉ शिवेंद्र शास्त्री, प्रोफेसर धनंजय कुमार सिंह, शिक्षक साजिद अहमद, शिक्षक विश्वनाथ बेरा, शिक्षिका पूजा कुमारी, शिक्षिका प्रियंका झा, प्रोफेसर प्रीति सोनकर, वरिष्ठ पत्रकार जयप्रकाश राय, वरिष्ठ पत्रकार अंतरा बोस, स्वतंत्र सलाहकार रवि शंकर , निश्चय के तरुण कुमार एवं शहीद गणेश हांसदा के बड़े भाई दिनेश हांसदा जी के पैनल ने छात्र-छात्राओं का विस्तार से इंटरव्यू किया। लगभग चार घण्टों से ज्यादा समय तक चले ऑनलाइन इंटरव्यू में बच्चों से उनके विषयों को लेकर समझ, उनका सपना, भविष्य को लेकर उनकी योजनाये, उनके और उनके परिवार की चुनौतियों और सोच से सम्बन्धित सामान्य प्रश्न पूछे गए। इस दौरान बच्चों के आत्मविश्वास, संवाद कौशल, चुनौतियों से जूझने की क्षमता, मोटिवेशन एवं सामाजिक सोच को आंकने की कोशिश की गई।

सभी बच्चों के लिए इंटरव्यू का अनुभव बहुत की ज्ञानवर्धक रहा। आईएएस बनने का सपना रखने वाली कोशाफलिया गांव की प्रमिला सिंह बताती है कि "मुझे पहले बहुत डर लग रहा था, क्योंकि यह मेरा पहला इंटरव्यू था, लेकिन इंटरव्यू में शामिल होने पर मुझे मालूम हुआ कि इंटरव्यू कैसे होता है, इसमें कैसे सवाल पूछे जाते है, इसका जबाब कैसे देना है। इंटरव्यू देना बहुत अच्छा लगा, इसका अनुभव भविष्य की परीक्षाओं की तैयारियों में बहुत काम आएगा। वही कृषि विकास पदाधिकारी बनने का सपना देखने वाली अर्जुनबेड़ा गांव की शिवानी घोष बताती है कि इंटरव्यू देकर बहुत अच्छा लगा, इंटरव्यू देकर मुझे बहुत सारा साहस और प्रेरणा मिला। इस दौरान इतने सारे सर लोगों से जो मार्गदर्शन मिला, वह मेरे बहुत काम आएगा।" इसी तरह सभी बच्चों के इंटरव्यू देने के अनुभव बेहद उत्साहवर्धक रहे।

बच्चों का इंटरव्यू लेने वाले पैनलिस्टस के लिए भी समूचा कार्यक्रम बेहद उत्साहवर्धक रहा। उन्होंने बताया कि "ग्रामीण क्षेत्र जहां बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए असंख्य परेशानियों का सामना करना पड़ता है, उनके पास पढ़ाई के सीमित संसाधन भी मुश्किल से उपलब्ध हो पाते है। उस कठिन माहौल में फ़ेलोशिप के माध्यम से ग्रामीण