चिड़ियाघर में 23 साल से अकेले रह रहे हाथी के लिए अब अफ्रीकन साथी की तलाश, जानिए क्यों पड़ा था शंकर नाम

 

जिम्बाब्वे समेत तीन देशों से संपर्क साध रहा है चिड़ियाघर प्रबंधन।
चिड़ियाघर में शंकर नामक हाथी अकेला रहता है जिसके लिए साथी की देशभर में तलाश की जा चुकी है लेकिन देश के किसी भी चिड़ियाघर में अफ्रीकन हाथी नहीं होने के कारण अब चिड़ियाघर प्रबंधन इसके लिए विदेशों के चिड़ियाघरों से संपर्क साधने की कवायद में जुट गया है।

नई दिल्ली । राजधानी के चिड़ियाघर में पिछले 23 साल से अकेले रह रहे बहुत ही संवेदनशील, बुद्धिमान और सामाजिक कहे जाने वाले अफ्रीकन हाथी के लिए उसके साथी की तलाश तेज हो गई है। चिड़ियाघर में शंकर नामक हाथी लंबे समय से अकेला रहता है, जिसके लिए साथी की देशभर में तलाश की जा चुकी है, लेकिन देश के किसी भी चिड़ियाघर में अफ्रीकन हाथी नहीं होने के कारण अब चिड़ियाघर प्रबंधन इसके लिए विदेशों के चिड़ियाघरों से संपर्क साधने की कवायद में जुट गया है। इसके लिए जिम्बाब्वे समेत तीन देशों से संपर्क किया जा रहा है। अधिकारियों को उम्मीद है कि शंकर के लिए साथी मिल जाएगा, जिसके बदले भारत को भी हाथी देना होगा। चिड़ियाघर ने इसको लेकर केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भी पत्र लिखा है।

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चिड़ियाघर के अधिकारियों का कहना है कि जंगलों में हाथियों की प्रजाति बड़े समूह में रहती हैं। जो हाथी नर होते हैं, उनमें बड़े दांत निकलते हैं। मादा में दांत नहीं होते या बहुत छोटे होते हैं। वहीं, अफ्रीकन हाथियों के कान बड़े होते हैं, जो अलग से ही पहचान में आ जाते हैं। निदेशक डाक्टर सोनाली घोष का कहना है कि दिल्ली के चिड़ियाघर में शंकर नाम का एक अफ्रीकी हाथी है, जो अपने बाड़े में अकेला रहता है। ये हाथी पूर्व राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा को जिम्बाब्वे के दौरान उपहार में मिला था। यही वजह है कि हाथी का नाम भी शंकर रखा है।

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तभी से ये हाथी दिल्ली चिड़ियाघर में अकेला रहता है। इस प्रजाति के हाथी आराम से करीब 60 सालों तक जी लेते हैं। ऐसे में शंकर के लिए मादा साथी की तलाश के लिए जिम्बाब्वे, नामीबिया, बोत्सवाना और साउथ अफ्रीका के चिड़ियाघरों से संपर्क किया जा रहा है, जहां इस प्रजाति के हाथी पाय जाते हैं। इसके अलावा दो एशियाई हाथी भी हैं, जो एक साथ एक ही बाड़े में रहते हैं।