यश बैंक को गिरवी रखी प्रॉपर्टी दूसरे को 2.40 करोड़ में बेच दी, दो सगे भाई गिरफ्तार

 

ठगों के नाम जितेंद्र आहूजा व रिंकल आहूजा है।

शिकायतकर्ता धर्मपाल गुप्ता ने शिकायत में कहा था कि राज कुमार आहूजा मधुबाला आहूजा और उनके बेटे राजेश आहूजा जो संपत्ति के मालिक थे। उन्होंने शालीमार बाग स्थित उक्त संपत्ति को उन्हें 2.40 करोड़ रुपये में बेच दिया।

नई दिल्ली । दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने 2.40 करोड़ की ठगी के आरोप में दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। आरोपितों ने यश बैंक से लोन लेने के एवज में बैंक के पास गिरवी रखी प्रॉपर्टी को शिकायत कर्ता को भी 2.40 करोड़ में बेच दी। इससे दोनों ने बैंक के साथ साथ शिकायत कर्ता को भी धोखा दिया। डीसीपी आर्थिक अपराध शाखा आर के सिंह के मुताबिक गिरफ्तार किए गए ठगों के नाम जितेंद्र आहूजा व रिंकल आहूजा है। दोनों पीतमपुरा के रहने वाले हैं।

शिकायतकर्ता धर्मपाल गुप्ता ने शिकायत में कहा था कि राज कुमार आहूजा, मधुबाला आहूजा और उनके बेटे राजेश आहूजा जो संपत्ति के मालिक थे। उन्होंने शालीमार बाग स्थित उक्त संपत्ति को उन्हें 2.40 करोड़ रुपये में बेच दिया। संपत्ति के कुछ मूल दस्तावेजों के गुम होने की झूठी बात बताते हुए आरोपितों ने उक्त मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज करा दी थी। ताकि लोगों को किसी तरह का शक न हो। लेकिन बाद में पता चला कि उक्त बेची गई संपत्ति पहले से ही यस बैंक के पास लोन के एवज में गिरवी रखी गई थी।

जितेंद्र आहूजा और रिंकल आहूजा ने आरोपी व्यक्तियों और शिकायतकर्ता के बीच उक्त संपत्ति के बिक्री विलेख के निष्पादन में गवाह के रूप में हस्ताक्षर किए थे। दिलचस्प बात यह है कि रिंकल आहूजा ने उसी संपत्ति पर पहले से ही अपनी स्वामित्व फर्मों के नाम पर ऋण लिया था और सह-आरोपी जितेंद्र आहूजा उक्त ऋण में गारंटर के रूप में था। इस प्रकार अपने परिवार के सदस्यों के साथ आपराधिक साजिश में आरोपित व्यक्तियों ने संपत्ति के खरीदार यानी शिकायतकर्ता के साथ-साथ यस बैंक को भी धोखा दिया है।

जांच के दौरान शिकायतकर्ता के साथ-साथ आरोपी व्यक्तियों के बैंक खाते के विवरण प्राप्त किए गए, जिससे पता चला कि उक्त बेची गई संपत्ति का विचार बैंक चैनल के माध्यम से स्थानांतरित किया गया था। यस बैंक से रिकॉर्ड प्राप्त किया गया और यह पाया गया कि उसी संपत्ति पर पहले का ऋण आरोपी रिंकल आहूजा ने अपनी स्वामित्व फर्मों के नाम पर लिया था। उक्त संपत्ति के विक्रय विलेख की प्रमाणित प्रति प्राप्त कर ली गई है। आरोपित व्यक्तियों ने शिकायतकर्ता को आश्वासन दिया था कि उक्त बेची गई संपत्ति पार्टियों के बीच निष्पादित बिक्री विलेख के माध्यम से सभी प्रकार के भारों से मुक्त है। इस तरह शिकायतकर्ता से 2.40 करोड़ रुपये की ठगी की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी मुहम्मद अली व एसीपी वीरेंद्र सिंह सजवान के नेतृत्व में एसआई नीरज, एएसआई शेडू, एएसआई ताहर सिंह की टीम ने दोनों को राजस्थान के भरतपुर में उनके ठिकाने से गिरफ्तार कर लिया।