साबुत अनाज से नियंत्रित होगी टाइप-2 डायबिटीज, इलाज में होने वाले खर्च में भी आएगी कमी

 

इस शोध को जरनल 'न्यूट्रियंट्स' में प्रकाशित किया गया

ईस्टर्न फिनलैंड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेन मार्टिकेनेन के अनुसार उनके शोध में नियमित रूप से डायबिटीज टाइप-2 से पीड़ित एक बड़ी आबादी को साबुत अनाज का भोजन दिया गया। साथ ही उनसे डायबिटीज से जुड़े खर्च पर भी नजर रखने को कहा गया।

हेलसिंकी, एएनआइ। फिनलैंड में हुए एक ताजा शोध के मुताबिक साबुत अनाज की खपत बढ़ने से टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) की बीमारी कम होगी और इसके इलाज में होने वाले खर्च में भी कमी आएगी। इस शोध को जरनल 'न्यूट्रियंट्स' में प्रकाशित किया गया है।

ईस्टर्न फिनलैंड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर जेन मार्टिकेनेन के अनुसार उनके शोध में नियमित रूप से डायबिटीज टाइप-2 से पीड़ित एक बड़ी आबादी को साबुत अनाज का भोजन दिया गया। साथ ही उनसे डायबिटीज से जुड़े खर्च पर भी नजर रखने को कहा गया। उसके बाद उनके रोग और उस पर आए खर्च की तुलना उन डायबिटीज के उन मरीजों से की गई जिन्होंने नियमित रूप से साबुत अनाज नहीं खाया था। अगले दस साल बाद पाया गया कि उनके इलाज के खर्च में 3.3 फीसद से लेकर 12.2 फीसद तक की कमी आई थी। इसका मतलब है कि स्वास्थ्यवर्धक भोजन करने वाले डायबिटीज के मरीजों की नासिर्फ सेहत में सुधार आया बल्कि इलाज से उनकी जेब पर पड़ने वाला बोझ भी कम हो गया।

इस नए शोध के मुताबिक पौष्टिकता से भरपुर साबुत अनाज नियमित भोजन में लेना चाहिए। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्राय: डायबटीज के मरीज नियमित रूप से अपने भोजन में दो-तिहाई अनाज भी नहीं खाते हैं। उन्हें वह अनाज प्रचुरता से खाने चाहिए जिनमें फाइबर कम होता है। 

डायबिटीज के प्रमुख जोखिमों में है चीनी का इस्तेमाल

बता दें कि टाइप -2 डायबिटीज (मधुमेह) के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है चीनी का सेवन। चाहे वह मिठाई के रूप में हो या कार्बोनेटेड ड्रिंक के जरिए। जब चीनी का सेवन समय के साथ अत्यधिक बढ़ जाता है, तो यह इंसुलिन और रक्त शर्करा के संतुलन को बिगाड़ सकता है जिससे मधुमेह हो सकता है। इसलिए, अग्न्याशय या इंसुलिन की आपूर्ति पर दबाव न डालने का सबसे आसान तरीका चीनी की खपत को कम करना या उसका प्रबंधन करना।