ऊंचाई पर रहने वालों में कम रहता है घातक स्ट्रोक का खतरा, जानिए और क्या कहता है यह शोध

 


फ्रंटियर्स इन फिजियोलाजी जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं इसके परिणाम

मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में से एक में खून का थक्का बनने से रुकावट पैदा होती है और उससे आघात (स्ट्रोक) होता है। हमें अपनी जीवन शैली और स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी बातों से परिचित होना जरूरी है जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं।

वाशिंगटन, एएनआइ। एक नए शोध से पता चला है कि जो लोग अधिक ऊंचाई पर रहते हैं, उनमें स्ट्रोक और स्ट्रोक से मौत होने का खतरा कम रहता है। दो हजार और 3,500 मीटर की ऊंचाई के बीच रहने वालों में यह सुरक्षा सबसे ज्यादा प्रभावी रहती है। इस अध्ययन के परिणाम 'फ्रंटियर्स इन फिजियोलाजी' जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।

इक्वाडोर में चार अलग-अलग ऊंचाई पर रहने वाले लोगों में स्ट्रोक से संबंधित बीमारियों से अस्पताल में भर्ती होने और मौत की घटनाओं के विश्लेषण पर आधारित यह पहला अध्ययन है। इसमें एक लाख से अधिक स्ट्रोक के शिकार रोगियों से संबंधित 17 वर्षो के दौरान जमा किए गए आंकड़ों को शामिल किया गया है।

जीवन शैली और स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ बातों से परिचित होना है जरूरी

पूरी दुनिया में स्ट्रोक मौत और दिव्यांगता का एक प्रमुख कारण है। आम तौर पर मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाली धमनियों में से एक में खून का थक्का बनने से रुकावट पैदा होती है और उससे आघात (स्ट्रोक) होता है। हमें अपनी जीवन शैली और स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी बातों से परिचित होना जरूरी है जो स्ट्रोक का खतरा बढ़ाती हैं। ऐसी बातों में धूमपान, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्राल, और शारीरिक गतिविधि में कमी शामिल है।अधिक ऊंचाई का मतलब आक्सीजन की उपलब्धता में कमी

लेकिन ऊंचाई स्वास्थ्य संबंधी एक ऐसा अनदेखा कारक है, जो आपके आघात के खतरे को प्रभावित कर सकता है। अधिक ऊंचाई का मतलब आक्सीजन की उपलब्धता में कमी है। ऐसे में जो लोग ऊंचाई पर रहते हैं, वे इन परिस्थितियों के अभ्यस्त हो गए हैं। हालांकि यह परिस्थिति किसी में आघात की स्थिति विकसित होने की आशंका को कैसे प्रभावित करता है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं है।