ताइवान पर क्‍यों नहीं हमला करता है चीन, अमेरिका का यह कानून बना सुरक्षा कवच, इससे घबराता है ड्रैगन

 

ताइवान पर क्‍यों नहीं हमला करता है चीन, अमेरिका का यह कानून बना सुरक्षा कवच।
ताइवान ने भी चीन से निपटने के लिए अपनी मिसाइलों का मुंह चीन की ओर मोड़ दिया है। चीन से निपटने की क्‍या है ताइवान की योजना? अमेरिका का कौन सा कानून ताइवान की सुरक्षा का बड़ा कवच है? चीन अपने किस कानून के तहत ताइवान को धौंस दिखाता है।

नई दिल्‍ली, आनलाइन डेस्‍क। ताइवान को लेकर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। अफगानिस्‍तान में अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद चीनी वायु सेना के लड़ाकू फाइटरों ने 60 बार ताइवान की सीमा क्रास किया है। ताइवान सीमा पर चीन अपनी शक्ति का लगातार प्रदर्शन कर रहा है। उधर, ताइवान ने भी चीन से निपटने के लिए अपनी मिसाइलों का मुंह चीन की ओर मोड़ दिया है। ताइवान को अमेरिका का पूरी तरह से समर्थन हासिल है। आइए जानते हैं कि चीन से निपटने की क्‍या है ताइवान की सैन्‍य योजना। अमेरिका का कौन सा कानून ताइवान की सुरक्षा का बड़ा कवच है। चीन अपने किस कानून के तहत ताइवान को धौंस दिखाता है।

जिमी कार्टर से बाइडन तक ताइवान के रिश्‍ते

  • अमेरिका में अलग-अलग राष्‍ट्रपति के कार्यकाल में ताइवान की नीति भिन्‍न रही है। ताइवान को लेकर अमेरिका नीति एक जैसी नहीं रही है। 1979 में तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जिमी कार्टर ने चीन के साथ कूटनीतिक संबंध स्‍थाप‍ित करने के लिए ताइवान के साथ आधिकारिक संबंध समाप्‍त कर लिए थे। उस वक्‍त अमेरिकी कांग्रेस ने ताइवान र‍िलेशंस ऐक्‍ट पारित किया था। यह कानून इस बात की इजाजत देता था कि अमेरिका ताइवान को रक्षात्‍मक हथ‍ियारों की बिक्री कर सकता था। ताइवान को लेकर अमेरिकी की नीति में एक तरह की रणनीतिक अस्‍पष्‍टता दिखाई देती रही है।
  • ताइवान को लेकर वर्ष 1996 में अमेरिका और चीन के बीच सबसे अधिक तनाव देखा गया। दरअसल, ताइवान के राष्ट्रपति चुनाव को अपने तरीके से प्रभावित करने के लिए चीन ने मिसाइल परीक्षण किए। इसके जवाब में तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने बड़े पैमाने पर अमरीकी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, जिसे वियतनाम युद्ध के बाद एशिया में सबसे बड़ा अमरीकी सैन्य प्रदर्शन कहा गया था। अमरीका ने ताइवान की ओर बड़े युद्धक अमरीकी जहाज भेजे और चीन को संदेश देने की कोशिश की कि ताइवान की सुरक्षा से अमरीका कोई समझौता नहीं करेगा।

     

  • वर्ष 2001 में तत्‍कालीन राष्‍ट्रपति जार्ज डब्‍ल्‍यू बुश ने कहा था कि चीन के हमले से ताइवान को बचाने के लिए जो भी जरूरी होगा वह करेंगे। ताइवान और चीन के मामले में अमेरिका सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहता कि वह हमले की सूरत में क्‍या करेगा। इससे चीन की मुश्किल बढ़ जाती है। चीन इस बात को लेकर दुविधा में रहता है कि अगर उसने ताइवान पर हमला किया तो अमेरिका की कितनी कठोर प्रतिक्रिया हो सकती है।
  • वर्ष 2000 में चेन श्वाय बियान ताइवान के राष्‍ट्रपति निर्वाचित हुए। बियान ने ताइवान की स्‍वतंत्रता का समर्थन किया। यह बात चीन को हजम नहीं हुई। तब से ताइवान-चीन के रिश्‍ते काफी तल्‍ख हो गए। डोनल्ड ट्रंप के कार्यकाल में ताइवान और अमेरिका एक दूसरे के नजदीक आए। अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने ताइवान की तत्कालीन राष्ट्रपति साइ इंग वेन से फोन पर वार्ता की थी। इसे अमरीका की ताइवान को लेकर चली आ रही नीति में बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर देखा गया था। मौजूदा राष्‍ट्रपति बाइडन भी अपने पूर्ववर्ती ट्रंप की तरह ताइवान को संरक्षण दे रहे हैं।

क्‍या है चीन का अलगाववादी विरोधी कानून

हांगकांग की राष्‍ट्रीय सुरक्षा नीति की तरह वर्ष 2005 में चीन ने अलगाववादी विरोधी कानून पारित किया था। चीन इस कानून के तहत ताइवान को बलपूर्वक मिलाने का अधिकार रखता है। इस कानून की आड़ में चीन कई बार ताइवान को धौंस देता रहा है, लेकिन वह अभी तक ताइवान को मिलाने में नाकाम रहा है। इस कानून के तहत यदि ताइवान अपने आप को स्‍वतंत्र राष्‍ट्र घोषित करता है तो चीन की सेना उस पर हमला कर सकती है। हालांकि, कई साल के तनाव और धमकियों के बाद ताइवान ने अपनी आजादी कायम रखी है। चीन की सरकार बार-बार कहती रही है कि वह ताइवान को ताकत के दम पर चीन में मिला लेगा। इन धमकियों के बावजूद चीन आत तक ताइवान के खिलाफ सैन्‍य कार्रवाई नहीं कर पाया।

15 देशों ने ही ताइवान को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र माना

चीन और ताइवान के बीच विवाद काफी पुराना है। इसकी बुनियाद 1949 में पड़ी। दुनिया के सिर्फ 15 देश ही ताइवान को एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र मानते हैं। इस विवाद के कारण ही ताइवान को सीमित देशों की ही मान्‍यता हासिल हो सकी। ताइवान के प्रति चीन का दृष्टिकोण अलग है। चीन इसे अपने से अलग हुआ हिस्‍सा मानता है। ताइवान को एक विद्रोही प्रांत मानता है।

चीन की नाक के नीचे है ताइवान

ताइवान की चीन से दूरी महज 180 किलोमीटर है। ताइवान की भाषा चीनी है। ताइवान की राजनीतिक व्‍यवस्‍था चीन से एकदम भिन्‍न है। चीन और ताइवान की भिन्‍न राजनीतिक व्‍यवस्‍था भी दोनों को एक दूसरे का विरोधी बनाते हैं। चीन में एकदलीय व्‍यवस्‍था है, जबकि 2 करोड़ 30 लाख की आबादी वाले ताइवान की व्‍यवस्‍था लोकतांत्रिक है।