लखीमपुर पहुंचा टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल, पीड़ितों से की मुलाकात

 

लखीमपुर पहुंचा टीएमसी का प्रतिनिधिमंडल, पीड़ितों से की मुलाकात
 मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर टीएमसी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को ही पीड़ितों से मिलने के लिए लखीमपुर खीरी जा रहा था लेकिन पुलिस ने उनको बीच रास्ते में ही रोक दिया था।‌ धारा 144 लागू होने के चलते वहां जाने की इजाजत नहीं दी थी।

राज्य ब्यूरो, कोलकाता । उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हिंसा के मद्देनजर मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के एक प्रतिनिधिमंडल ने वहां पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के अनुसार, टीएमसी की राज्यसभा सदस्य डोला सेन के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम ने लखीमपुर में घायलों से की मुलाकात की। डोला लेन ने कहा कि पीड़ितों से बातचीत हुई है और उनकी मांगों के बारे में जानकारी ली।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर टीएमसी सांसदों का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को ही पीड़ितों से मिलने के लिए लखीमपुर खीरी जा रहा था लेकिन पुलिस ने उनको बीच रास्ते में ही रोक दिया था।‌ घटनास्थल व उसके आसपास के इलाके में धारा 144 लागू होने के चलते अन्य विपक्षी दलों के नेताओं को भी पुलिस ने वहां जाने की इजाजत नहीं दी थी।

इधर, धारा 144 लागू होने के चलते तृणमूल कांग्रेस के सांसद दो अलग-अलग समूहों में बंट गए और सांसद सुष्मिता देव और काकोली घोष दस्तीदार अब भी प्रवेश नहीं कर पाई हैं।इससे पहले तृणमूल सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हिंसा की घटना व पार्टी सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को लखीमपुर जाने से रोके जाने को लेकर भाजपा पर सोमवार को करारा हमला बोला था। घटना की निंदा करते हुए ममता ने कहा था कि भाजपा सरकार लोकतंत्र में विश्वास नहीं करती है और केवल निरंकुशता चाहती है।उन्होंने यहां तक कहा था कि उत्तर प्रदेश में राम राज्य नहीं बल्कि हत्या राज्य है। बता दें कि उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के दौरे को लेकर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान रविवार को लखीमपुर खीरी जिले के तिकोनिया इलाके में भड़की हिंसा में चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गई थी। आरोप है कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री व स्थानीय सांसद अजय मिश्रा के बेटे ने प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ियां चढ़ा दी। इसके बाद यह हिंसा भड़की। इस मामले में पुलिस ने अजय मिश्रा के बेटे के खिलाफ एफआइआर दर्ज की है। वहीं, हिंसा की इस घटना के बाद विपक्ष लामबंद हो गया है और भाजपा सरकार के खिलाफ हमलावर है।