दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय हुए राजनीतिक दल

 

दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर अभी से सक्रिय हुए राजनीतिक दल
कोरोना के चलते दिल्ली में सार्वजनिक स्थलों पर छठ पूजा के आयोजन की अनुमति नहीं मिली है। इसे लेकर राजधानी दिल्ली में सियासत शुरू हो गई है। आरोप लगा रहा है कि पूर्वांचल के लोगों की आस्था पर चोट पहुंचाई जा रही है।

नई दिल्ली। कोरोना संक्रमण का हवाला देकर दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सार्वजनिक स्थलों पर छठ पूजा के आयोजन की अनुमति नहीं दी है। इसे लेकर राजधानी दिल्ली में सियासत शुरू हो गई है। सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने सामने है। विपक्ष इसके लिए दिल्ली सरकार को निशाने पर ले रहा है। आरोप लगा रहा है कि पूर्वांचल के लोगों की आस्था पर चोट पहुंचाई जा रही है। उनके साथ भेदभाव हो रहा है। भाजपा के नेता इसे लेकर सड़क पर उतर रहे हैं। दूसरी ओर सत्ता पक्ष विपक्ष पर सस्ती राजनीति करने का आरोप लगा रहा है। दरअसल निगम चुनाव नजदीक है और पूर्वांचलियों को सभी पार्टियां अपने साथ जोड़ना चाहती हैं। इस कारण आने वाले दिनों में इसे लेकर राजनीति और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। जरूरत इस मामले में संवदेनशील होने की है, जिससे कि लोग छठ पूजा भी मना सकें और संक्रमण भी न फैले।

टिकट के लिए गणेश परिक्रमा

निगम चुनाव ज्यों-ज्यों नजदीक आ रहा है, राजनीतिक दलों के ऐसे कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ रही है जो चुनाव लड़ना चाहते हैं। ऐसे कार्यकर्ताओं ने पार्टी कार्यालय का चक्कर लगाना शुरू कर दिया है। ऐसा भी अब खूब देखा जा रहा है कि पार्टी के मुखिया या अन्य प्रमुख नेता जब इलाके में पहुंचते हैं तो वे वहां भी उनके आगे-पीछे घूम रहे होते हैं। आम आदमी पार्टी में भी ऐसा माहौल दिखाई दे रहा है। जबकि पार्टी प्रमुख यह स्पष्ट कर चुके हैं कि चमचागिरी से टिकट के लिए प्रयास न करें, बल्कि अपने इलाके में समाज के लिए इतना काम कर दें कि पार्टी स्वयं उनके पास टिकट देने के लिए पहुंच जाए। मगर टिकट की चाहत कार्यकर्ताओं को शांत होकर बैठने नहीं दे रही है। बार- बार दौड़ भाग कर रहे हैं। पार्टी मुख्यालय की बाहरी दीवार इन दिनों ऐसे कार्यकर्ताओं के पोस्टरों से भरी पड़ी है।

यमुना तट की सफाई या रस्म अदायगी

पिछले दिनों भाजपा के नेता व कार्यकर्ता यमुना तट की सफाई करते नजर आए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 71 वर्ष पूरे होने पर भाजपाइयों ने छह अक्टूबर को दिल्ली में यमुना किनारे 71 स्थानों पर सफाई की थी। इसकी सराहना भी हुई। पार्टी के नेताओं ने कहा था कि नियमित रूप से यह अभियान चलेगा। लेकिन, उस दिन के बाद कहीं भी नेता सफाई करते नजर नहीं आए। अभियान को आगे बढ़ाने के लिए कोई रूपरेखा तैयार कर कार्यकर्ताओं को निर्देश भी नहीं दिया गया है। इससे कुछ कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। उनका कहना है कि सिर्फ रस्म अदायगी के लिए यमुना की सफाई नहीं होनी चाहिए। इससे पार्टी की छवि खराब होती है, इसलिए इस कार्यक्रम को नियमित रूप से आगे बढ़ाने के लिए पूरी रणनीति तैयार की जानी चाहिए। वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, जिससे कि लोगों में यह संदेश जाए कि भाजपा इसे लेकर गंभीर है।

सही बात को भी मान रहे तुगलकी फरमान

कोरोना संक्रमण का खतरा कम क्या हो गया है, ऐसा लगता है कि लोग वैक्सीन को लेकर लापरवाह हो रहे हैं। हालांकि सरकार इस बारे में प्रयास कर रही है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लग सके। इसी बीच कुछ सख्ती दिखाते हुए मुख्य सचिव विजय देव ने वैक्सीन न लगवाने पर 16 अक्टूबर से सरकारी कर्मचारियों पर कार्यालय में प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोरोना संक्रमण की गंभीरता को समझने वाले कर्मचारी इसे सही मान रहे हैं तो तमाम कर्मचारी भड़के हुए हैं। वे इसे तुगलकी फरमान तक करार दे रहे हैं। आठ अक्टूबर को जारी हुआ मुख्य सचिव का आदेश सरकारी विभागों में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग आपस में चर्चा कर रहे हैं कि यह नियम तो कहीं लागू नहीं है तो फिर दिल्ली में ही ऐसा क्यों किया जा रहा है। हालांकि उनके कुछ साथी उन्हें समझा भी रहे हैं।