लालू के बिहार आने से पहले सेटेलाइट से पहुंची उनकी छवि, एनडीए कह रहा- हमारा तो बड़ा फायदा

 

राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव। जागरण आर्काइव।
तेजस्वी नेपथ्य में और लालू सामने आ गए हैं। ये कोई और नहीं लालू प्रसाद ही हैं जिन्हें सामने रखकर वर्षों से राज्य की चुनावी राजनीति हो रही है। उत्कर्ष के बाद 2020 का पहला विधानसभा चुनाव था जिसमें लालू नहीं थे। शरीर से नहीं थे।

राज्य ब्यूरो, पटना: राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद रविवार की शाम हवाई जहाज से राजधानी पटना आए। सेटेलाइट के जरिए उनकी शैली पहुंच गई थी : भकचोन्हर। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भक्तचरण दास के लिए उन्होंने इसी शब्द का प्रयोग किया था। विरोधी इतने पर ही जवाबी हमले में जुट गए। चरम अभी बाकी था। बड़े पुत्र तेजप्रताप यादव ने इसे पूरा किया : यही हाल रहा तो तेजस्वी मुख्यमंत्री नहीं बन सकते। देर रात तक तेजप्रताप का धरना चला। विरोधी उत्साह से भर उठे। तेजस्वी के समर्थकों ने सिर थाम लिया। पता चला कि आग बुझ नहीं पाई थी। अंदर चिंगारी दबी थी, जो भड़क गई। लालू के बिहार आने को एनडीए अपने फायदे के रूप में देख रहा है। 

देखते ही देखते तेजस्वी नेपथ्य में और लालू सामने आ गए हैं। ये कोई और नहीं, लालू प्रसाद ही हैं, जिन्हें सामने रखकर वर्षों से राज्य की चुनावी राजनीति हो रही है। उत्कर्ष के बाद 2020 का पहला विधानसभा चुनाव था, जिसमें लालू नहीं थे। शरीर से नहीं थे। बैनर-पोस्टर पर नहीं थे। उनका प्रतिनिधित्व तेजस्वी कर रहे थे। गैर-हाजिर लालू विरोध के केंद्र नहीं बन सके। नतीजा तेजस्वी के हक में गया। राजद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा। महागठबंधन को अच्छी कामयाबी मिली।

विधानसभा के उप चुनाव में सत्तारूढ़ दल दबाव में है, लेकिन लालू के आने से दबाव कम महसूस होने लगा है। कारण है, भकचोन्हर और राजद के स्थापित हो रहे नेतृत्व के खिलाफ धरना। विपक्षी बता रहे हैं कि कुछ खास नहीं बदला है। कभी सत्ता मिली तो यही शैली रहेगी। वही पात्र रहेंगे। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को भरोसा है कि लालू प्रसाद प्रचार में गए तो और अवसर मिलेगा। वह शांत रहेंगे, लेकिन जोशीले समर्थक ऐसा कुछ कर देंगे, जिसके जरिए जनता को बताया जाएगा कि राजद में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। सोच-समझ कर वोट दीजिए। तय कार्यक्रम के अनुसार 27 अक्टूबर को लालू प्रचार के लिए निकल रहे हैं।

तुरंत का असर देखिए

लालू प्रसाद अनुसूचित जातियों के मसीहा हैं या उत्पीड़क, उनके पटना आने से पहले तक विधानसभा उप चुनाव में यह अध्याय नहीं था। रविवार की रात से यह जुड़ गया। पूर्व मुख्यमंत्री और कभी लालू प्रसाद के समर्थक रहे जीतनराम मांझी कह रहे हैं कि लालू को अनुसूचित जाति से शुरू से नफरत है। सरकार के मंत्री डा. अशोक चौधरी की राय है कि लालू राज में अनुसूचित जाति का नरसंहार हुआ। वे इस वर्ग के विरोधी हैं। सामाजिक विद्वेष फैला रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. अनिल शर्मा ने लालू प्रसाद को अनुसूचित जाति के साथ-साथ अल्पसंख्यकों का भी विरोधी बता दिया। उनका कहना है कि भागलपुर दंगे की जांच रिपोर्ट पर पति-पत्नी 15 साल तक कुंडली मार कर बैठे रहे। 

राजग के पक्ष में लालू का आना

पूर्व मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी तो लालू प्रसाद की चुनावी यात्रा को लेकर राजद से अधिक उत्साहित हो गए हैं। उन्होंने रविवार को भक्तचरण दास को भकचोन्हर कहे जाने पर कांग्रेस को ललकारा था। सोमवार को उन्होंने ऐलान कर दिया कि लालू के आने से राजग को फायदा होगा। जदयू के प्रचारक भी पहले की तुलना में जंगल-राज की याद तेजी से दिलाने लगे हैं। 

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